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16 नवंबर 2013 :सचिन तेंदुलकर की वो फेयरवेल स्पीच, जिसने खोला था क्रिकेटिंग सफर की यादों का पिटारा, भावुक कर देगा संदेश

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सचिन तेंदुलकर की वो फेयरवेल स्पीच, जिसने खोला था क्रिकेटिंग सफर की यादों का पिटारा, भावुक कर देगा संदेश
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    1999 का वो दौर जब सचिन तेंदुलकर इंग्लैंड में वन-डे वर्ल्ड कप में खेलने गए थे। लेकिन पापा के निधन की खबर सुनकर सचिन स्तब्ध हो गए। जिसके बाद वह भारत लौट आएं। लेकिन वे वापिस जल्दी ही केन्या खेलने गए तो यहां उनका बल्ला खुब चला। उन्होंने केन्या के खिलाफ सैंचुरी मारी और इसे अपने पिता को समर्पित की। 

    क्रिकेट के मास्टर सचिन तेंदुलकर ने 16 नवंबर 2013 को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास लिया था। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में सचिन ने हजारों फैंस के सामने अपनी फेयरवेल स्पीच दी। इस स्पीच से निकले शब्द, भावनाएं और गूंज मानों हर किसी को भावुक कर गई। विदाई स्पीच के दौरान सचिन की फैमिली और साथी क्रिकेटर्स मौजूद थे।

    16 नवंबर 2013 की फेयलवेल स्पीच

    स्पीच की शुरुआत से पहले वानखेड़े स्टेडियम में सचिन...सचिन..सचिन...सचिन की गूंज मानों उनके करियर के महान योगदान को याद दिला रही है। उन्होंने कहा पिछले 24 साल में मेरी जिंदगी 22 गज में सिमटी रही। इस भावक पलों में उन्होंने कहा कि वे हर उस इंसान के नाम लिखकर लाएं हैं। ताकि किसी को भूल ना जाऊ। 

    फाइनल स्पीच में अपनी मां, पिता से लेकर कोच के लिए दिया भावुक संदेश 

    पिता : अपने पिता रमेश तेंदुलकर का जिक्र करते हुए सचिन ने कहा कि उनके निर्देशन के बिना वो यहां पर खड़े नहीं होते। 11 साल की आयु में उनके पिता ने कहा कि अपने सपने का पीछा करो। जब भी मैंने कुछ खास किया या बल्ला हवा मे उठाया ये उन्हीं के लिए था। 

    मां : सचिन की मां का उनके करियर में अहम योगदान रहा है। उन्होंने कहा मैरे जैसे शरारती बच्चें को संभालना आसान नहीं था। उन्हें हर वक्त मेरे जैसे शरारती बच्च की फिक्र रहती। मैंने जिस दिन से बल्ला थामा और क्रिकेट शुरू किया उन्होंने हर दिन मेरे लिए प्रार्थना की।

    कोच : मेरा क्रिकेटिंग करियर 11 साल की उम्र में शुरू हुआ। लेकिन करियर का टर्निंग पॉइंट तब था जब मेरा भाई मुझे आचरेकर सर के पास ले गया था। और मुझे खुशी है कि मेरे लास्ट मैच में उनका स्टैंड्स में मौजूद रहता देख मुझे काफी अच्छा लगा। आचरेकर सर ने मुझे अपने स्कूटर से मुंबई के एक मैदान से लेकर दूसरे मैदान तक कई बार लेकर गए। जिससे मेरा ज्यादा से ज्यादा अभ्यास हो सके। सचिन ने आगे कहा कि उनके कोच ने पिछले 29 सालों में कभी उन्हें...'वेल प्लेड' नहीं कहा। इसका कारण बताते हुए कहा कि सर को डर था कि ज्यादा तारीफ सुनकर मैं कहीं क्रिकेट की प्रैक्टिस बंद न कर दू। लेकिन अपनी फेयरवेल स्पीच में सचिन ने कोच को कहा कि सर अब आप मुझे वेल प्लेड कह सकते हैं यह मेरा आखिरी मैच है। 

    अंकल-आंटी को किया याद: जब सचिन स्कूल में थे तो उनका घर स्टेडियम से काफी दूर था। जिस कारण उन्हें अपने अंकल-आंटी के पास रहने पड़ा। सचिन यहां चार सालों तक रहे। उन्होंने बताया कि आंटी ने मेरी लिए बहुत मेहनत की और हर रोज सुबह मेरे लिए खाना बनाती थी। उनकी पूरी परवरिश एक बेटे के समान थी। इस मौके पर मैं उनका शुक्रिया कहे बिना नहीं रह सकता।

    पत्नी के लिएः 1990 में मेरे साथ सबसे खूबसूरत बात तब हुई, जब मैं अंजली से मिला। वे खास साल थे। अंजली पेशे से डॉक्टर हैं। उनके सामने शानदार करियर था। जब हमने परिवार बढ़ाने के बारे में सोचा तो अंजली अपने करियर से पीछे हटीं और कहने लगी.. कि तुम क्रिकेट में आगे बढ़ो, मैं परिवार संभालूंगी। उन्होंने मुझे बहुत सहा है। अंजली, तुम मेरी लाइफ की बेस्ट पार्टनरशिप हो।
    बच्चों के लिएः बच्चे बड़े हो गए हैं। मेरी बेटी 16 साल की है और बेटा 14 का। मैं उनके साथ वक्त बिताना चाहता था। अपने करियर में मैंने उनके बर्थडे, स्पोर्ट्स डे वगैरह को बहुत मिस किया। शुक्रिया कि तुमने मुझे समझा। तुम दोनों मेरे लिए बहुत स्पेशल हो। तुम सोच भी नहीं सकते कितना। बस अब, आने वाले साल तुम्हारे हैं।
    दोस्तों के लिए क्या बोले: मेरे वे दोस्त थे जो अपना काम छोड़कर मुझे बॉल डालने लगते थे। जब भी मुझे लगा कि चोटों की वजह से मेरा करियर खत्म हो रहा था, तब उन्होंने मुझे यकीन दिलाया कि मेरा खेल अभी खत्म नहीं हुआ।' उनकी इस बात ने मुझे हर बार अधिक मेहनत करने की प्रेरणा दी।
    क्रिकेट साथियों के लिएः अंतिम स्पीच में सचिन ने मैदान को, मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन, बीसीसीआई, अपने सिलेक्टर्स, सीनियर्स, साथी खिलाड़ियों राहुल द्रविड़, लक्ष्मण, सौरव गांगुली, अनिल कुंबले, अपने पहले मैनेजर मार्क मस्ट्रेनर्स, सारे कोच, डॉक्टर्स, फिजियो और सपोर्ट स्टाफ का शुक्रिया किया।
    फैन्स के लिएः मेरी स्पीच लंबी हो रही है...बस आखिरी बात।' 'मैं पूरी दुनिया से आए आप लोगों का शुक्रिया करना चाहता हूं। आपका सपोर्ट मेरे लिए बेशकीमती है। वक्त बहुत जल्दी बीत गया लेकिन ये यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी। और एक बात जो मेरे जहन में हमेशा गूंजती रहेगी, वह है... सचिन...सचिन...यह आखिरी सांस तक मेरे जहन में गूंजता रहेगा...गुड बाय।'
    अपनी भावुक कर देने वाली स्पीच में सचिन ने हर उस शख्स को याद किया जो विदाई लम्हों का साक्षी बना। उन्होंने फोटोग्रॉफी में लगे मीडिया का भी धन्यवाद दिया।
    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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