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23 सितंबर को "NO UPI DAY" इंदौर के 125 व्यापारी संगठन मैदान में: भोपाल-ग्वालियर तक पहुंची आवाज

UPI भुगतान पर प्रस्तावित MDR शुल्क के विरोध में इंदौर के 125 से ज्यादा व्यापारी संगठन एकजुट, 23 सितंबर को नकद भुगतान की अपील; भोपाल, ग्वालियर, मंदसौर और नीमच से भी मिला समर्थन.
23 सितंबर को "NO UPI DAY" इंदौर के 125 व्यापारी संगठन मैदान में: भोपाल-ग्वालियर तक पहुंची आवाज
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इंदौर। यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क यानी एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) के विरोध में इंदौर के व्यापारियों का आंदोलन अब प्रदेश के दूसरे शहरों तक पहुंचने लगा है। 23 सितंबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाने के ऐलान के बाद ग्वालियर, भोपाल, मंदसौर और नीमच सहित कई शहरों के व्यापारी संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन देने की बात कही है।अहिल्या चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के बैनर तले इंदौर के करीब 125 व्यापारी संगठनों ने 23 सितंबर को यूपीआई से भुगतान स्वीकार नहीं करने का आह्वान किया है। व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाया गया तो इसका सीधा असर व्यापार की लागत और अंततः ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है।

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सराफा से पेट्रोल पंप तक, कई संगठन आंदोलन में शामिल

अहिल्या चेंबर के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल के अनुसार 23 सितंबर को शहर के लगभग सभी प्रमुख व्यापारी संगठन ‘नो यूपीआई डे’ में शामिल होंगे। इनमें सराफा, कपड़ा, लोहा, प्लाईवुड, सेनेटरी, चाय-किराना और पेट्रोल-डीजल कारोबार से जुड़े संगठन शामिल हैं।व्यापारी संगठनों ने ग्राहकों से भी अपील की है कि 23 सितंबर को डिजिटल भुगतान के बजाय नकद भुगतान का विकल्प अपनाएं। खंडेलवाल के मुताबिक इंदौर के आंदोलन को अब ग्वालियर, भोपाल, मंदसौर और नीमच सहित अन्य शहरों से भी समर्थन मिल रहा है।

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मंडी व्यापारियों ने भी जताया विरोध

सकल अनाज, दलहन एवं तिलहन व्यापारी संघ के अध्यक्ष गोपालदास अग्रवाल ने भी प्रदेशभर के मंडी व्यापारियों से एमडीआर के विरोध में शामिल होने की अपील की है।अग्रवाल का कहना है कि व्यापारियों पर लगातार नए शुल्क और करों का बोझ बढ़ रहा है। उनका तर्क है कि यदि यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है तो व्यापारी के लिए यह कारोबार की लागत का हिस्सा बन जाएगा और इसकी भरपाई उत्पादों की कीमत में करनी पड़ सकती है।

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व्यापारियों का सवाल- ग्राहक ने माल लौटाया तो शुल्क का क्या होगा?

यूपीआई पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर व्यापारियों ने एक और व्यावहारिक सवाल उठाया है। इंदौर रिटेल रेडीमेड गारमेंट व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन के अनुसार, यदि किसी ग्राहक ने यूपीआई से भुगतान किया, व्यापारी ने उस पर लागू शुल्क सरकार को चुका दिया और बाद में ग्राहक ने सामान वापस कर दिया, तो ऐसी स्थिति में शुल्क का हिसाब कैसे होगा?व्यापारियों का कहना है कि ग्राहक को माल लौटाने पर भुगतान की पूरी राशि वापस करनी पड़ सकती है, जबकि संबंधित डिजिटल लेनदेन पर शुल्क पहले ही कट चुका होगा। इससे रिफंड प्रक्रिया में विवाद और अतिरिक्त जटिलता पैदा होने की आशंका है।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...

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