UPI ने पूरे किए 10 साल, अब 11 देशों में भी हो रहा इस्तेमाल, PM मोदी ने पूछा लोगों से उनका अनुभव

भारत की डिजिटल पेमेंट व्यवस्था UPI ने मंगलवार को अपने 10 साल पूरे कर लिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर UPI के सफर को भारत के डिजिटल भुगतान में बड़ा बदलाव बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर UPI इस्तेमाल करने वाले लोगों से अपने अनुभव साझा करने को भी कहा। उन्होंने पूछा कि UPI ने उनकी जिंदगी को किस तरह आसान बनाया है।
25 अगस्त 2016 को हुई थी शुरुआत
UPI को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने RBI की निगरानी में 25 अगस्त 2016 को आम लोगों के लिए शुरू किया था। हालांकि, इससे पहले अप्रैल 2016 में 21 बैंकों के साथ इसका ट्रायल शुरू हो चुका था। शुरुआत में बैंकों ने अपने UPI वाले मोबाइल ऐप लॉन्च किए। इसके कुछ महीने बाद दिसंबर 2016 में BHIM ऐप आया। इससे लोगों के लिए UPI के जरिए पैसे भेजना और लेना और आसान हो गया।
10 साल में 13 हजार गुना बढ़े लेनदेन
UPI की शुरुआत के समय इसके जरिए होने वाले लेनदेन बहुत कम थे। वित्त वर्ष 2016-17 में सिर्फ 1.78 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 24,162 करोड़ से ज्यादा हो गया। यानी करीब 10 साल में UPI ट्रांजैक्शन की संख्या लगभग 13 हजार गुना बढ़ गई।
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0.07 लाख करोड़ से 314 लाख करोड़ पहुंचा ट्रांजैक्शन
UPI के जरिए सिर्फ लेनदेन की संख्या ही नहीं बढ़ी, बल्कि इससे भेजी जाने वाली रकम में भी बड़ा उछाल आया है। वित्त वर्ष 2016-17 में UPI से करीब 0.07 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए थे। 2025-26 में यह रकम बढ़कर करीब 314 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। यानी एक दशक में UPI से होने वाले लेनदेन की कुल रकम 4,000 गुना से ज्यादा बढ़ी है।
चाय की दुकान से बड़े कारोबार तक UPI
आज UPI का इस्तेमाल छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक हर जगह हो रहा है। किराने की दुकान पर कुछ रुपये का भुगतान करना हो या किसी बड़े कारोबार में पैसा भेजना हो, UPI ने भुगतान को काफी आसान बना दिया है। मोबाइल से तुरंत पेमेंट होने की वजह से लोगों को कैश रखने या बैंक ट्रांसफर की लंबी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत कम हो गई है।
अब विदेशों में भी चल रहा UPI
भारत में लोकप्रिय होने के बाद UPI अब दूसरे देशों में भी पहुंच रहा है। फिलहाल 11 देशों में UPI स्वीकार किया जाता है। ग्रीस और मालदीव इसे अपनाने वाले नए देशों में शामिल हैं। इससे विदेश जाने वाले भारतीयों को भी कई जगहों पर भुगतान करने में आसानी होती है। साथ ही, भारत की डिजिटल पेमेंट तकनीक की पहुंच दूसरे देशों तक बढ़ रही है।
एक ऐप से कई बैंक खातों की सुविधा
UPI एक रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम है। इसके जरिए एक मोबाइल ऐप से कई बैंक खातों को जोड़ा और इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पैसे भेजना, लेना, बैंक अकाउंट मैनेज करना और दुकानदारों को भुगतान करना आसान हो जाता है। यही वजह है कि UPI रोजमर्रा की जिंदगी में डिजिटल पेमेंट का बड़ा माध्यम बन गया है।
सुरक्षा का भी रखा जाता है ध्यान
UPI में डिजिटल भुगतान को सुरक्षित रखने के लिए कई सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। इसमें टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसी तकनीकें शामिल हैं। इनका मकसद बैंक खाते और पेमेंट से जुड़ी जरूरी जानकारी को सुरक्षित रखना और बिना अनुमति होने वाले लेनदेन का खतरा कम करना है।
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ग्राहकों के लिए पेमेंट फ्री
UPI की लोकप्रियता की एक बड़ी वजह यह भी है कि ग्राहकों से पेमेंट करने पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता। सरकार की व्यवस्था के तहत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR से जुड़े शुल्क का प्रावधान व्यापारियों के लिए रखा गया है, जबकि ग्राहकों के लिए UPI पेमेंट फ्री रखा गया।
10 साल में बदल गया पेमेंट का तरीका
10 साल पहले कुछ बैंकों के साथ शुरू हुआ UPI आज करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। छोटी खरीदारी से लेकर बड़े कारोबार तक, इसने भारत में पैसे भेजने और लेने का तरीका काफी बदल दिया है। UPI के बढ़ते इस्तेमाल, बढ़ते ट्रांजैक्शन और दूसरे देशों में इसकी स्वीकार्यता को भारत के डिजिटल पेमेंट मॉडल की बड़ी सफलता माना जा रहा है।





















