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अमेरिका में केस खत्म होते ही गौतम अडानी ने किया पोस्ट, बोले- ‘सच्चाई और कानून पर भरोसा अटूट’

गौतम अडानी को अमेरिका में बड़ी कानूनी राहत मिली है। न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट ने रिश्वत और फ्रॉड से जुड़े क्रिमिनल केस को खारिज करने की मंजूरी दे दी। यह मामला नवंबर 2024 में सामने आया था। केस खत्म करने के अमेरिकी न्याय विभाग के फैसले पर जज ने सवाल भी उठाए। जानिए पूरा मामला और इसके मायने क्या हैं।
अमेरिका में केस खत्म होते ही गौतम अडानी ने किया पोस्ट, बोले- ‘सच्चाई और कानून पर भरोसा अटूट’
गौतम अडानी को अमेरिका से बड़ी राहत मिली है।

भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी को अमेरिका से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अमेरिका की फेडरल कोर्ट ने अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है। यह वही मामला है, जिसकी वजह से नवंबर 2024 में अडानी ग्रुप और उससे जुड़े अधिकारियों पर अमेरिका में रिश्वत और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए गए थे। 10 अगस्त 2026 को अमेरिका के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क के जज निकोलस गराउफिस ने अमेरिकी न्याय विभाग की केस खत्म करने की मांग को मंजूरी दे दी। इसका मतलब है कि इस आपराधिक मामले में अडानी के खिलाफ अमेरिका में अब यह केस आगे नहीं चलेगा।

नवंबर 2024 में क्या आरोप लगे थे?

नवंबर 2024 में अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। अमेरिकी अभियोजन पक्ष का आरोप था कि भारत में रिन्यूएबल एनर्जी से जुड़े प्रोजेक्ट्स के कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने की योजना बनाई गई थी। आरोप यह भी था कि अमेरिकी निवेशकों से पैसा जुटाते समय कथित रिश्वत से जुड़ी जानकारी छिपाई गई और निवेशकों को गलत जानकारी दी गई। अमेरिकी अधिकारियों ने मामले को करीब 250 मिलियन डॉलर की कथित रिश्वत से जोड़ा था। हालांकि, गौतम अडानी और अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को खारिज किया था।

अडानी ने क्या कहा?

कोर्ट के फैसले के बाद गौतम अडानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, 'मैं अमेरिकी अदालत के फैसले का विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वागत करता हूं। इस मुश्किल दौर में भी सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में हमारा भरोसा अटूट बना रहा। मैं उन सभी लोगों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं जिन्होंने हम पर, सिस्टम पर और न्याय दिलाने की भारत की क्षमता पर कभी भरोसा नहीं खोया, हम जरूरी काम करते रहेंगे। अपने देश के लिए निर्माण करना, ऐसी वैल्यू बनाना जो हमारे बाद भी बनी रहे और खुद से बढ़कर किसी मकसद के लिए काम करना, यही हमारा संकल्प है, जय हिंद’।

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आखिर केस खत्म क्यों किया गया?

अमेरिकी न्याय विभाग ने इस मामले को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया था। सरकार की दलील थी कि केस को साबित करने में कई व्यावहारिक मुश्किलें थीं। न्याय विभाग के मुताबिक, मामले से जुड़े ज्यादातर सबूत और गवाह भारत में हैं। इसके अलावा आरोपियों के विदेश में रहने और अमेरिका की अदालत में उनके सामने पेश न होने की स्थिति को भी सरकार ने अपने फैसले का आधार बताया। सरकार ने यह भी कहा कि उसने अपने अभियोजन संबंधी अधिकार के तहत इस मामले में आगे सरकारी संसाधन नहीं लगाने का फैसला किया है।

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जज ने पहले तुरंत मंजूर नहीं की थी केस खत्म करने की मांग

इस मामले में एक अहम मोड़ जून 2026 में आया था। उस समय अमेरिकी न्याय विभाग ने केस खत्म करने की मांग की थी, लेकिन जज निकोलस गराउफिस ने इसे तुरंत मंजूरी नहीं दी। जज ने सरकार से पूछा था कि आखिर वह इतने गंभीर मामले को खत्म क्यों करना चाहती है। कोर्ट ने न्याय विभाग से अपने फैसले के पीछे पर्याप्त कारण और तथ्य देने को कहा था।  अब 10 अगस्त को जज ने केस खारिज करने की मंजूरी दे दी, लेकिन अपने आदेश में न्याय विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के रवैये पर सवाल भी उठाए।

जज ने DOJ के रवैये पर क्यों उठाए सवाल?

अडानी को केस से राहत जरूर मिल गई है, लेकिन कोर्ट का आदेश अमेरिकी न्याय विभाग के लिए भी सवाल खड़े करता है। जज गराउफिस ने न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ट्रेंट मैककटर के केस खत्म करने के तरीके पर चिंता जताई। रिपोर्टों के मुताबिक, जज ने इस प्रक्रिया को असामान्य माना और कहा कि मामले की जांच करने वाले अधिकारियों और अभियोजकों की राय को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। यानी एक तरफ अडानी के लिए यह बड़ी कानूनी राहत है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी कोर्ट ने केस वापस लेने की सरकारी प्रक्रिया पर सवाल भी दर्ज किए हैं।

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अब अडानी के लिए इसका क्या मतलब है?

सबसे बड़ी बात यह है कि अमेरिका में चल रहा यह आपराधिक मामला अब खत्म हो गया है। यानी इस मामले में अडानी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा आगे नहीं चलेगा। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि केस का खारिज होना और आरोपों पर अदालत द्वारा ट्रायल के बाद निर्दोष घोषित किया जाना एक ही बात नहीं है। इस मामले में अमेरिकी सरकार ने अभियोजन आगे न बढ़ाने का फैसला किया और अदालत ने उसे मंजूरी दी है।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...Read More

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