SIR पर बैठक के बाद चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, नोटिस वाले मतदाताओं के घर जाएंगे BLO; दिल्ली-महाराष्ट्र में बढ़ी समयसीमा

नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की खबरों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी ने शनिवार को निर्वाचन सदन में बैठक की। बैठक के बाद चुनाव आयोग ने SIR की प्रक्रिया को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी दी। आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े प्रमुख आदेशों को तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी मिली थी। बैठक में उन मतदाताओं के लिए प्रक्रिया आसान करने का फैसला किया गया, जिन्हें नाम मैप नहीं होने या मतदाता रिकॉर्ड में तार्किक विसंगति के कारण नोटिस जारी किए गए हैं। ऐसे लोगों को अब हर मामले में चुनाव कार्यालय जाकर व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी।
नोटिस पाने वालों के घर जाएंगे बीएलओ
चुनाव आयोग के नए प्रावधान के मुताबिक जिन मतदाताओं को ‘अनमैप्ड’ या ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के आधार पर नोटिस मिला है, उनके घर बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO जाएंगे। बीएलओ संबंधित मतदाता से जरूरी दस्तावेज लेकर उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे। इसके बाद मामले पर चुनाव पंजीयन अधिकारी यानी ERO फैसला करेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मतदाताओं को सामान्य तौर पर ERO या AERO के सामने व्यक्तिगत सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा। केवल असाधारण परिस्थितियों में सुनवाई होगी और उसे भी प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन कराने की व्यवस्था की जाएगी। जरूरत पड़ने पर परिवार का कोई वयस्क सदस्य भी मतदाता की ओर से सुनवाई में शामिल हो सकेगा।
दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियों की समयसीमा बढ़ी
SIR के दौरान नाम छूटने या रिकॉर्ड से जुड़ी आपत्तियों के निपटारे के लिए आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में समयसीमा बढ़ाई है। दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख अब 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। इन दावों और नोटिसों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। वहीं महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 और उनके निपटारे की समयसीमा 10 नवंबर 2026 तक कर दी गई है।
रात के आश्रय, मजदूर और बेघर लोगों के लिए विशेष शिविर
चुनाव आयोग ने यह भी माना कि कुछ वर्गों के लिए SIR की प्रक्रिया में दस्तावेज जुटाना और चुनाव कार्यालय तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इसे देखते हुए जिला निर्वाचन अधिकारियों को रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए जरूरत के अनुसार पर्याप्त हेल्प डेस्क और विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के दौरान जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, उनमें युवा और पहली बार मतदान करने वाले लोग भी शामिल हो सकते हैं। ऐसे मतदाता लगातार अद्यतन प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के पास नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
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30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट सूची में 13.37 करोड़ नाम बाहर
SIR के तहत अब तक जारी ड्राफ्ट मतदाता सूचियों के आंकड़ों के अनुसार 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13.37 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हुए हैं। यह संख्या संबंधित राज्यों की SIR से पहले की मतदाता सूची का करीब 14.1 प्रतिशत है। यह आंकड़ा सितंबर की शुरुआत में उपलब्ध ड्राफ्ट सूचियों पर आधारित था और इसे अंतिम मतदाता सूची में स्थायी रूप से हटाए गए नामों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को कहा कि SIR 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हो चुका है। बाकी राज्यों में अंतिम सूची दावे, आपत्तियों और उनके निपटारे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आएगी।
EC के भीतर मतभेद की रिपोर्ट के बाद हुई बैठक
यह बैठक ऐसे समय हुई जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने, चुनावी डेटा से जुड़े तकनीकी सिस्टम और अन्य प्रक्रियाओं का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के बाद राजनीतिक बहस तेज हुई और विपक्षी समूहों ने CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी उनके इस्तीफे की मांग की थी और आंदोलन की चेतावनी दी थी। हालांकि चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के जवाब में कहा है कि SIR से जुड़े उसके प्रमुख आदेश और कार्यक्रम तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि संबंधित आंतरिक प्रशासनिक मामलों को नीतिगत मतभेद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
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ECINet की भी होगी समीक्षा
बैठक में चुनावी डेटा से जुड़े ECINet सिस्टम की भी समीक्षा का फैसला हुआ है। आयोग के अनुसार, एक समिति का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त करेंगे और इसमें IIT या IIIT से स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। समिति यह देखेगी कि ECINet संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं।




















