देश की पहली LNG ड्यूल-फ्यूल ट्रेन को आज मिलेगी हरी झंडी, जानिए क्या है इसकी खासियत?

अहमदाबाद। भारतीय रेलवे अब ईंधन के नए विकल्पों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में देश की पहली LNG ड्यूल-फ्यूल ट्रेन तैयार की गई है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज अहमदाबाद के साबरमती रेलवे स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसका इंजन है। इसमें ऐसी तकनीक लगाई गई है, जिससे इंजन LNG और डीजल दोनों ईंधनों पर चल सकता है। रेलवे को उम्मीद है कि इस तकनीक के इस्तेमाल से ईंधन की लागत कम करने और प्रदूषण घटाने में मदद मिल सकती है।
इंजन में पहली बार ड्यूल-फ्यूल सिस्टम
इस परियोजना के तहत ट्रेन की ड्राइविंग पावर कार यानी DPC में LNG आधारित ड्यूल-फ्यूल सिस्टम लगाया गया है। सामान्य तौर पर डीजल इंजन एक ही प्रकार के ईंधन पर निर्भर होते हैं, लेकिन इस तकनीक में जरूरत के अनुसार LNG और डीजल दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। रेलवे इस तकनीक को डीजल के वैकल्पिक ईंधन के तौर पर देख रहा है। इसका मकसद ईंधन की खपत और संचालन पर होने वाले खर्च को कम करना है। साथ ही, कम प्रदूषण वाले ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना भी इस परियोजना का हिस्सा है।
2029 से पहले 21 राज्यों में लागू होगा UCC! अमित शाह ने बताया सरकार का प्लान
1400 हॉर्स पावर के दो इंजन बदले गए
इस परियोजना में 1400 हॉर्स पावर क्षमता वाले दो DPC इंजन को ड्यूल-फ्यूल तकनीक में बदला गया है। रेलवे के अनुसार, इन दोनों इंजनों का 2,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक परीक्षण किया जा चुका है। ट्रायल के दौरान इंजन की क्षमता और प्रदर्शन को अलग-अलग परिस्थितियों में परखा गया। इसका उद्देश्य यह देखना था कि नई तकनीक रोजमर्रा के रेलवे संचालन में कितनी प्रभावी और भरोसेमंद साबित होती है।
एक बार LNG भरने पर 444 किलोमीटर तक सफर
इस ड्यूल-फ्यूल इंजन में करीब 2,200 लीटर क्षमता का LNG टैंक लगाया गया है। इसमें लगभग 950 से 1,000 किलोग्राम तक LNG भरी जा सकती है। रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, एक बार टैंक भरने के बाद ट्रेन करीब 444 किलोमीटर तक चल सकती है। हालांकि ट्रेन कितनी दूरी तय करेगी, यह उसके संचालन, रास्ते और ईंधन के इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करेगा।
सालाना 23.9 लाख रुपए तक बचत का अनुमान
रेलवे के परीक्षण से मिले आंकड़ों के आधार पर इस तकनीक से ईंधन खर्च में सालाना करीब 23.9 लाख रुपए तक की बचत का अनुमान लगाया गया है। हालांकि वास्तविक बचत LNG और डीजल की कीमतों के साथ-साथ ट्रेन के संचालन पर भी निर्भर करेगी। रेलवे का मानना है कि LNG के इस्तेमाल से कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और सूक्ष्म कणों जैसे प्रदूषकों के उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है।
साबरमती स्टेशन पर होगा बड़ा कार्यक्रम
अहमदाबाद के साबरमती रेलवे स्टेशन पर इस कार्यक्रम को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अमित शाह यहां कई रेलवे विकास कार्यों का लोकार्पण करेंगे। इसी दौरान देश की पहली LNG ड्यूल-फ्यूल ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाई जाएगी। इसके अलावा साबरमती में लोको इंजन के रखरखाव के लिए तैयार किए जा रहे WAG-12 मेंटेनेंस शेड का भी उद्घाटन किया जाएगा।
रेलवे में वैकल्पिक ईंधन की ओर बड़ा कदम
LNG ड्यूल-फ्यूल तकनीक रेलवे के लिए ईंधन के नए विकल्प की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना है। एक ही इंजन में LNG और डीजल दोनों के इस्तेमाल की सुविधा होने से संचालन में लचीलापन बढ़ सकता है। अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल रहती है, तो भविष्य में रेलवे के कुछ अन्य डीजल इंजनों में भी ऐसे बदलाव किए जाने की संभावना बन सकती है। इससे ईंधन की लागत, डीजल पर निर्भरता और प्रदूषण को कम करने की दिशा में रेलवे को मदद मिल सकती है।



















