अमेरिका के दौरे से खाली हाथ लौटे शी जिनपिंग, ताइवान में खुशी, चीन करता है ताइवान पर अपना दावा

ताइपे। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का तीन दिन का अमेरिका दौरा बिना किसी बड़े समझौते के खत्म हुआ, जिसके बाद ताइवान के अधिकारियों में राहत देखी जा रही है।10 साल में व्हाइट हाउस की यह शी की पहली यात्रा थी। उम्मीद थी कि ताइवान समेत कई विवादित मुद्दों पर कोई बड़ी डील होगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। यह दौरा सिर्फ दोनों नेताओं के बीच पर्सनल रिलेशन मजबूत करने तक ही सीमित रहा।इस दौरे की एकमात्र ठोस उपलब्धि यह रही कि अमेरिका और चीन ने 10 नवंबर को खत्म हो रहे ट्रेड सीजफायर को दो महीने और बढ़ाने पर सहमति जताई। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि इस डील की डिटेल सोमवार को जारी की जाएगी।
ताइवान को हिस्सा बताता है चीन
ताइवान को लेकर बीजिंग का स्टैंड हमेशा से सख्त रहा है। चीन उसे अपना हिस्सा बताता है, जबकि ताइवान की अपनी चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार है। बीजिंग कई बार कह चुका है कि जरूरत पड़ी तो वह बल प्रयोग से भी ताइवान को अपने नियंत्रण में ले सकता है।गुरुवार को शी ने ट्रंप के सामने ताइवान का मुद्दा जोर-शोर से उठाया और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका "ताइवान के मामले को समझदारी से हैंडल करेगा।" चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक शी ने यह भी कहा कि अमेरिका को "ताइवान की आजादी का विरोध करने के सही स्टैंड पर कायम रहना चाहिए।"अमेरिका का ज्यादातर देशों की तरह ताइवान के साथ कोई ऑफिशियल राजनयिक रिश्ता नहीं है, लेकिन अमेरिकी कानून के तहत वह ताइवान को अपनी सुरक्षा के साधन देने के लिए बाध्य है।
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अमेरिका सबसे बड़ा हथियार सप्लायर
अमेरिका ही ताइवान को हथियार सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है।वाशिंगटन के एशियाई सहयोगी भी बारीकी से देख रहे थे कि शी के दौरे के बाद ट्रंप ताइवान पर क्या बोलते हैं।चीनी सरकारी अखबार 'पीपुल्स डेली' ने अपने संपादकीय में फिर दोहराया कि ताइवान "चीन के सबसे अहम हितों का केंद्र है और चीन-अमेरिका रिश्तों की पहली रेड लाइन है जिसे पार नहीं किया जा सकता।"बता दें कि मई में बीजिंग की स्टेट विजिट के बाद ट्रंप ने ताइवान के लिए करीब 14 अरब डॉलर के सबसे बड़े हथियार पैकेज को रोक दिया था और इसे "बातचीत के लिए एक अच्छा कार्ड" बताया था। इसे ताइपे और वाशिंगटन के बीच दरार डालने की बीजिंग की बड़ी जीत माना गया था। लेकिन इस बार के दौरे में शी ताइवान को लेकर कोई और रियायत हासिल करते नहीं दिखे।




















