PU Special :सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में भोपाल का मास्टर प्लान-2047, अंतिम मंजूरी के लिए कोर्ट में फिर जाएगा मसौदा

भोपाल। राजधानी भोपाल के मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट शनिवार को जारी कर दिया गया है। अब इस पर दावे-आपत्तियां और सुझाव लिए जाएंगे, जिसके बाद अंतिम मसौदा तैयार किया जाएगा। खास बात यह है कि यह मास्टर प्लान अपनी तरह का देश का पहला ऐसा प्लान बन सकता है जिसकी अंतिम प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी रहेगी।
2005 के बाद 21 साल तक नहीं आया नया स्वीकृत मास्टर प्लान
भोपाल के मास्टर प्लान का इतिहास भी लंबा रहा है। शहर की पिछली स्वीकृत योजना भोपाल विकास योजना-2005 थी। इसके बाद नया मास्टर प्लान तैयार करने की कई कोशिशें हुईं लेकिन प्रक्रिया अंतिम रूप तक नहीं पहुंच सकी।
1995
भोपाल की आखिरी स्वीकृत मास्टर प्लान यानी भोपाल विकास योजना-2005 जारी हुई।
2005
इस मास्टर प्लान की अवधि समाप्त हो गई। इसके बाद नया स्वीकृत प्लान लागू नहीं हो सका।
2009
नए मास्टर प्लान की तैयारी की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन यह आगे नहीं बढ़ सकी।
2021
मास्टर प्लान-2031 के लिए दावे-आपत्तियां बुलाने की प्रक्रिया शुरू हुई। ड्राफ्ट में कई बड़े बदलाव प्रस्तावित थे, लेकिन इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका।
2023
मास्टर प्लान-2031 का संशोधित ड्राफ्ट जारी किया गया। इस पर करीब 3,005 आपत्तियां और सुझाव मिले। इन पर अगस्त और सितंबर में सुनवाई हुई।
2024
सरकार ने 2031 के ड्राफ्ट को खारिज कर नए सिरे से योजना तैयार करने का फैसला किया। इस बार योजना को 2047 की अनुमानित आबादी और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार करने की दिशा तय की गई।
2026
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीलिंग कार्रवाई के बीच नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर काम तेज हुआ और अब 2047 का प्रारूप सामने आया है।
59 हजार करोड़ रुपये की जरूरत सबसे बड़ी चुनौती
नए ड्राफ्ट में पिछली योजनाओं के क्रियान्वयन में रही कमियों को भी ध्यान में रखा गया है। योजना के तहत नए विस्तार के लिए करीब 7,000 हेक्टेयर जमीन की जरूरत बताई गई है। इस जमीन की खरीद पर करीब 14 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है
वहीं शहर में सड़क, परिवहन और दूसरी जरूरी सुविधाओं सहित विकास कार्यों पर करीब 45 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। इस तरह मास्टर प्लान को जमीन पर लागू करने के लिए कुल करीब 59 हजार करोड़ रुपये की जरूरत होगी। अब सरकार के सामने सिर्फ योजना तैयार करने की नहीं बल्कि इतने बड़े वित्तीय संसाधन जुटाने और प्रस्तावित परियोजनाओं को तय समय में पूरा करने की चुनौती भी होगी। ड्राफ्ट में पर्यावरण संरक्षण, पुराने भोपाल की विरासत, बेहतर नागरिक सुविधाओं और कमजोर वर्गों के लिए आवास को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। योजना में शहर के मौजूदा हिस्से पर लगातार दबाव बढ़ाने के बजाय बाहर नए विकास क्षेत्रों को तैयार करने और उन्हें बेहतर परिवहन से जोड़ने पर जोर है।
ऐसे बदलेगा भोपाल
1. 51 किलोमीटर का ग्रोथ कॉरिडोर
करीब 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र में 51 किलोमीटर लंबा ग्रोथ कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव है। इसमें एयरपोर्ट, E-KAI City, लॉजिस्टिक्स हब और नए विकास क्षेत्रों को आपस में जोड़ने की योजना है।
2. एक कॉरिडोर में कई तरह की सुविधाएं
ग्रोथ कॉरिडोर में होटल, अस्पताल, आईटी, एआई, मॉल, कॉरपोरेट ऑफिस, शिक्षा और आवास जैसी अलग-अलग गतिविधियों को विकसित करने का प्रस्ताव है। इससे रोजगार और कारोबारी गतिविधियों के नए केंद्र तैयार करने की योजना है।
3. शहर के बाहर नया ग्रीनफील्ड बायपास
शहर के बाहरी हिस्से में ग्रीनफील्ड बायपास प्रस्तावित है। इसके दोनों ओर 50-50 मीटर की ग्रीन बेल्ट रखने की योजना है ताकि शहर के अंदर आने वाले यातायात का दबाव कम किया जा सके।
4. चारों दिशाओं से मजबूत कनेक्टिविटी
भोपाल को इंदौर, विदिशा, रायसेन और नर्मदापुरम की ओर बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से जोड़ने की योजना है। इससे क्षेत्रीय आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।
5. BRTS से भविष्य में MRTS तक
ग्रोथ कॉरिडोर में BRTS का प्रस्ताव रखा गया है। भविष्य में जरूरत के अनुसार इसे MRTS में अपग्रेड करने की योजना भी शामिल है।
6. हरियाली बचाने के लिए Green TDR
ग्रीन एरिया में आने वाली निजी जमीन के लिए Green TDR का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। जरूरत पड़ने पर ऐसी जमीन की खरीद करने की व्यवस्था भी रखी गई है।
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7. E-KAI City बनेगी नए ज्ञान और रोजगार का केंद्र
भोपाल में E-KAI City विकसित करने का प्रस्ताव है, जहां एआई, नवाचार, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका लक्ष्य भोपाल को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के नए केंद्र के रूप में विकसित करना है।
8. भानपुर खंती का पुनर्विकास
भानपुर खंती क्षेत्र के पुनर्विकास की योजना है। यहां नए उपयोग के साथ गोल्फ कोर्स विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
9. कॉलोनियों में बढ़ेगा खुला क्षेत्र
कॉलोनियों में ओपन एरिया को 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा 2 फीसदी सर्विस एरिया रखना भी जरूरी किया जाएगा।
10. सस्ते और किराए के घरों पर जोर
ड्राफ्ट में अफोर्डेबल हाउसिंग और रेंटल हाउसिंग को बढ़ावा देने की योजना है। ऐसे आवासों के निर्माण के लिए एफएआर में राहत देने का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है।
11. जरूरतमंद संस्थानों को FAR में राहत
अनाथालय, वृद्धाश्रम, रैन बसेरा, दिव्यांग स्कूल और हॉस्टल जैसी संस्थाओं के लिए एफएआर में राहत का प्रावधान प्रस्तावित है, ताकि इन सुविधाओं का विस्तार आसान हो सके।
12. निजी CCTV को पुलिस नेटवर्क से जोड़ने का प्रस्ताव
शहर में निजी संस्थानों और परिसरों में लगे CCTV कैमरों को पुलिस नेटवर्क से जोड़ने का प्रस्ताव भी मास्टर प्लान में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य शहर की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना है।
13. बड़े चौराहों के लिए अलग ट्रैफिक प्लान
शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए विशेष योजना प्रस्तावित है। इनमें नादरा, रॉयल मार्केट, भोपाल टॉकीज, रंगमहल, न्यू मार्केट और तलैया जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं।
14. रहवासी इलाकों में कारोबार को लेकर नियम स्पष्ट
मास्टर प्लान में स्पष्ट किया गया है कि रेजिडेंशियल लैंड यूज का अर्थ कमर्शियल गतिविधियों की स्वत: अनुमति नहीं है। यानी रहवासी जमीन पर नियमों का उल्लंघन कर चल रहे व्यावसायिक उपयोग पर कार्रवाई मौजूदा नियमों के अनुसार जारी रहेगी।
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पुराने भोपाल के संरक्षण के साथ नए क्षेत्रों का विकास
मास्टर प्लान-2047 में भोपाल के विकास की दिशा को केवल शहर के विस्तार तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें पुराने शहर की पहचान और विरासत को बचाने के साथ शहर के बाहर नए विकास क्षेत्रों को तैयार करने की योजना है।
परिवहन नेटवर्क, नए रोजगार केंद्र, आवास, हरित क्षेत्र और नागरिक सुविधाओं को एक साथ विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। अब ड्राफ्ट पर जनता की आपत्तियां और सुझाव मिलने के बाद इसमें जरूरी बदलाव किए जाएंगे। इसके बाद अंतिम मसौदा तैयार होगा और सरकार को इसे लागू करने से पहले सुप्रीम कोर्ट की अनुमति लेनी होगी।
इस तरह भोपाल का 2047 मास्टर प्लान न सिर्फ शहर के अगले दो दशकों के विकास की दिशा तय करेगा बल्कि इसकी अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया भी न्यायिक निगरानी के दायरे में रहेगी।



















