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कवर्धा में किसानों का महाचक्काजाम, मुख्य मार्ग के 7 रास्ते बंद,धान के भाव और गन्ना बोनस पर आर-पार की लड़ाई

छत्तीसगढ़ में किसान आंदोलन तेज: कवर्धा में 7 रास्तों पर चक्काजाम, मध्यप्रदेश को जोड़ने वाला मार्ग भी बंद धान का भाव 3,358 और गन्ना बोनस बढ़ाने की मांग, कवर्धा में सड़कों पर उतरे हजारों किसान, कवर्धा में भारतीय किसान संघ की ‘बलराम किसान न्याय यात्रा’ के दौरान गुरुवार को हजारों किसानों ने धान के उचित मूल्य, गन्ना बोनस और बकाया भुगतान की मांग को लेकर सात प्रमुख मार्गों पर चक्काजाम किया।
कवर्धा में किसानों का महाचक्काजाम, मुख्य मार्ग के 7 रास्ते बंद,धान के भाव और गन्ना बोनस पर आर-पार की लड़ाई

रायपुर: कवर्धा में धान के उचित मूल्य, गन्ना बोनस और किसानों के बकाया भुगतान समेत विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ का आंदोलन तेज हो गया। ‘बलराम किसान न्याय यात्रा’ के तहत जिलेभर से पहुंचे किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ शहर के सात प्रमुख रास्तों पर चक्काजाम किया। रायपुर, राजनांदगांव और मध्यप्रदेश को जोड़ने वाले मार्गों पर भी यातायात प्रभावित हुआ। किसानों ने स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए। बिलासपुर में भी किसानों ने प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

कवर्धा में किसानों का शक्ति प्रदर्शन, सात रास्तों पर चक्काजाम

कवर्धा। छत्तीसगढ़ में किसानों की मांगों को लेकर विरोध तेज होता दिखाई दे रहा है। कवर्धा में भारतीय किसान संघ की ‘बलराम किसान न्याय यात्रा’ के दौरान गुरुवार को जिलेभर से हजारों किसान जुटे। किसानों ने सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सड़कों पर खड़ी कर शहर के चारों तरफ घेराबंदी की और एक साथ सात प्रमुख मार्गों पर चक्काजाम कर दिया। सुबह 11 बजे शुरू हुआ आंदोलन देर शाम तक जारी रहा। किसानों के प्रदर्शन के कारण शहर में प्रवेश करने और बाहर निकलने वाले वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। कई स्थानों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

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सात रास्ते बंद, रायपुर से राजनांदगांव तक यातायात प्रभावित

किसानों ने नेशनल हाईवे-30 के रायपुर रोड सहित जोराताल न्यू पुलिस लाइन, राजनांदगांव रोड, समनापुर रोड, न्यू बस स्टैंड और खुंटू नर्सरी रोड पर चक्काजाम किया। आंदोलन के दौरान मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाले बांधटोला-बोड़ला मार्ग को भी बंद किए जाने की जानकारी सामने आई। कई मार्गों पर वाहनों की आवाजाही रुकने से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई। बसों और अन्य यात्री वाहनों को रास्ते में रुकना पड़ा। कुछ यात्रियों को बसों से उतरकर पैदल आगे जाना पड़ा।

एंबुलेंस के लिए छोड़ी जगह, बस स्टैंड पर खड़ी रहीं 50 से ज्यादा बसें

चक्काजाम का सबसे ज्यादा असर बस परिवहन पर देखने को मिला। न्यू बस स्टैंड में 50 से ज्यादा बसें खड़ी रहीं। जाम की सूचना मिलने पर कुछ बस संचालकों ने रायपुर, बिलासपुर और राजनांदगांव जाने वाली बसों को बैरियर के बाहर ही रोक दिया। हालांकि, किसानों ने ट्रैक्टर खड़े करने के बावजूद सड़क पर करीब 10 फीट की जगह खाली छोड़ी थी, ताकि एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही के लिए रास्ता उपलब्ध रहे।

गन्ना बोनस पर किसानों का सवाल: 93 रुपये से घटकर 26 रुपये कैसे?

कवर्धा में आंदोलन की प्रमुख वजहों में गन्ने के बोनस का मुद्दा भी शामिल है। किसानों के मुताबिक, वर्ष 2018-19 में राज्य की ओर से गन्ने पर करीब 93 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मिलता था, जबकि वर्तमान व्यवस्था में राज्य की हिस्सेदारी 26 रुपये प्रति क्विंटल बताई जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गन्ने का कुल लाभकारी मूल्य यानी एफआरपी 355 रुपये प्रति क्विंटल है। इसमें 329 रुपये कारखाने की ओर से और 26 रुपये राज्य की ओर से बोनस के रूप में दिए जाने की बात कही गई है। किसानों का तर्क है कि केंद्र की ओर से एफआरपी बढ़ने के बावजूद राज्य के बोनस में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई। इसी अंतर को लेकर किसान बोनस की राशि बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

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धान का भाव 3,358 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग

भारतीय किसान संघ धान के उचित मूल्य और किसानों के बकाया भुगतान को लेकर भी सरकार पर दबाव बना रहा है। किसानों की मांग है कि धान का भाव 3,358 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए और लंबित भुगतान की चौथी किस्त के 1,975 करोड़ रुपये जारी किए जाएं। इसके अलावा खाद की उपलब्धता, धान खरीदी में अतिरिक्त तौल, सिंचाई की समस्या और प्राकृतिक आपदाओं से फसल को होने वाले नुकसान जैसे मुद्दे भी आंदोलन में उठाए गए।

किसान संघ का दो टूक संदेश: मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन

भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष डोमन चंद्रवंशी ने कहा कि किसानों की समस्याओं पर सरकार को गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए। गन्ने का बोनस और धान का उचित मूल्य किसानों के लिए बड़े मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि किसान अपनी मांगों को लेकर पूरी तैयारी के साथ आए हैं और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

एसडीएम बोले- नीतिगत मांगों पर शासन स्तर से होगा फैसला

कवर्धा के एसडीएम चेतन साहू के मुताबिक, किसान संगठन के नेताओं से चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगें प्रदेश स्तर की और नीतिगत हैं, इसलिए इन पर फैसला जिला स्तर पर संभव नहीं है। इस संबंध में निर्णय शासन स्तर से ही लिया जाना है।

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बिलासपुर में भी किसानों का प्रदर्शन, सरकार से ठोस निर्णय की मांग

किसानों की मांगों को लेकर बिलासपुर में भी भारतीय किसान संघ ने गुरुवार को प्रदर्शन किया। किसानों ने नेहरू चौक पर धरना देने के बाद ‘बलराम किसान न्याय यात्रा’ निकाली और कलेक्टोरेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। संघ के प्रदेश संगठन मंत्री मनीष शर्मा ने मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष माधो सिंह ठाकुर ने कहा कि किसान मेहनत कर प्रदेश के अन्न भंडार को भरते हैं, लेकिन उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य और अधिकार पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

33 जिलों में प्रदर्शन का दावा

भारतीय किसान संघ का दावा है कि प्रदेश के सभी 33 जिलों में जिला मुख्यालयों पर किसानों ने प्रदर्शन किया। संगठन ने बकाया भुगतान, धान के उचित मूल्य, गन्ना बोनस, खाद की उपलब्धता और सिंचाई संकट जैसे मुद्दों पर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों पर स्पष्ट निर्णय और भुगतान से जुड़ी समयसीमा चाहिए।

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...

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