छत्तीसगढ़ में किसानों का बड़ा आंदोलन ट्रैक्टर रैली-चक्काजाम से सड़कें जाम, 1700 करोड़ बकाया समेत 12 मांगों पर आर-पार

रायपुर/कवर्धा: छत्तीसगढ़ में किसानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आज प्रदेशव्यापी आंदोलन का मोर्चा खोल दिया है। भारतीय किसान संघ के आह्वान पर अलग-अलग जिलों में किसान जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। कवर्धा में ट्रैक्टर रैली और चक्काजाम के कारण कई प्रमुख रास्तों पर आवाजाही प्रभावित हुई। बैरिकेडिंग कर रास्ते रोके जाने से आम लोगों को परेशानी हुई। अस्पताल जा रहे राहगीर जाम में फंस गए, वहीं एक एंबुलेंस भी कुछ देर जाम की चपेट में रही। किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपने की तैयारी की है।
कवर्धा में ट्रैक्टर रैली के बाद चक्काजाम, सड़कों पर किसान
भारतीय किसान संघ के आंदोलन का असर कवर्धा में साफ दिखाई दिया। किसानों और संघ के कार्यकर्ताओं ने ट्रैक्टरों के साथ रैली निकाली। इसके बाद कई स्थानों पर चक्काजाम किया गया। प्रदर्शनकारियों ने रास्तों पर बैरिकेडिंग कर आवाजाही रोक दी। किसानों के सड़क पर उतरने से शहर और आसपास के इलाकों में यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। कई जगहों पर किसान बैरिकेडिंग के ऊपर चढ़कर भी प्रदर्शन करते नजर आए।

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अस्पताल जा रहे परिवार जाम में फंसे, खेतों के रास्ते निकले वाहन
चक्काजाम के कारण सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हुई, जिन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचना था। कई राहगीर छोटे बच्चों और परिवार के सदस्यों को लेकर जाम में फंस गए। कुछ लोगों ने मुख्य सड़क छोड़कर खेतों के रास्ते से अपने वाहन निकालने की कोशिश की। एक राहगीर ने कहा कि वह पत्नी और बच्चों को अस्पताल लेकर जा रहा था, लेकिन रास्ता बंद होने के कारण काफी परेशानी हुई। उसने कहा कि वह खुद भी किसान है, लेकिन बीमार व्यक्ति के लिए रास्ता मिलना चाहिए। एक अन्य राहगीर ने बताया कि वह छोटे बच्चे को अस्पताल लेकर जा रहा था और चक्काजाम में फंस गया।

एंबुलेंस भी जाम में फंसी, बाद में दिया गया रास्ता
प्रदर्शन के दौरान एक एंबुलेंस भी जाम में फंस गई। हालांकि बाद में प्रदर्शनकारियों ने एंबुलेंस को रास्ता दिया। घटना के बाद आंदोलन के बीच आम लोगों की परेशानी और यातायात व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।
1700 करोड़ का बकाया भुगतान बना आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा
भारतीय किसान संघ ने साल 2022-23 की धान खरीदी की लंबित करीब 1700 करोड़ रुपये की राशि तत्काल जारी करने की मांग की है। संघ का कहना है कि किसानों की मेहनत की कमाई को वर्षों तक लंबित रखना स्वीकार नहीं किया जा सकता। किसान संगठन ने सरकार से मांग की है कि लंबित भुगतान को लेकर स्पष्ट समयसीमा तय की जाए, ताकि किसानों को अपनी उपज की राशि के लिए लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
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धान का रेट 3358 प्रति क्विंटल करने की मांग
किसानों ने धान की खरीदी 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने की मांग रखी है। संघ के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में समर्थन मूल्य में हुई 258 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि का लाभ किसानों को मिलना चाहिए। इसके साथ ही सब्जी और फल उत्पादक किसानों को भी कृषक उन्नति योजना के दायरे में शामिल करने की मांग की गई है।
40 किलो 700 ग्राम से ज्यादा धान की कटौती बंद करने की मांग
भारतीय किसान संघ ने धान खरीदी के दौरान होने वाली कथित अतिरिक्त कटौती पर भी नाराजगी जताई है। संघ की मांग है कि एक बोरी में अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम ही धान लिया जाए और किसानों की उपज में मनमाने तरीके से अतिरिक्त वजन की कटौती बंद की जाए।
टोकन व्यवस्था में भी बदलाव की मांग
किसानों ने धान खरीदी की टोकन व्यवस्था में सुधार की मांग की है। संघ के अनुसार बड़े किसानों के लिए 5 टोकन, छोटे किसानों के लिए 3 और सीमांत किसानों के लिए 1 टोकन की व्यवस्था की जानी चाहिए। संघ का तर्क है कि टोकन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे किसान अपनी पूरी उपज बेच सकें और खरीदी सीजन खत्म होने से पहले उनका धान खरीदा जा सके।
बाढ़ से फसल बर्बाद, खेत-खेत सर्वे और मुआवजे की मांग
हालिया बाढ़ और जलभराव से प्रभावित किसानों के लिए तत्काल सर्वे और मुआवजे की मांग भी आंदोलन में प्रमुख मुद्दा है। किसान संगठन ने कहा है कि केवल अधिकारियों की रिपोर्ट और कागजी प्रक्रिया से किसानों का वास्तविक नुकसान सामने नहीं आएगा। संघ ने खेत-खेत सर्वे कराकर नुकसान के आधार पर जल्द मुआवजा देने की मांग की है।
खाद की कालाबाजारी पर कार्रवाई की मांग
भारतीय किसान संघ ने किसानों को निर्धारित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही बाजार में अधिक कीमत पर खाद बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। किसान संगठन का कहना है कि खेती के महत्वपूर्ण सीजन में खाद की उपलब्धता और कीमत दोनों पर प्रशासन को प्रभावी निगरानी रखनी चाहिए।
सिंचाई परियोजनाओं पर सरकार को घेरा
किसानों ने अरपा-भैंसाझार सहित वर्षों से लंबित सिंचाई परियोजनाओं को जल्द पूरा करने की मांग की है। संघ का कहना है कि किसान हर साल सूखा, अनियमित बारिश और सिंचाई संकट से जूझते हैं, जबकि करोड़ों रुपये की परियोजनाएं लंबे समय से अधूरी पड़ी हैं। संघ ने लंबित सिंचाई परियोजनाओं को गति देने और नई परियोजनाओं को जल्द स्वीकृति देने की मांग की है।
गन्ना किसानों के लिए 150 बढ़ाने की मांग
किसान संगठन ने गन्ने के मूल्य में 150 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि करने की मांग की है। इसके साथ ही गन्ना उत्पादकों को कृषक उन्नति योजना से जोड़ने की मांग की गई है। मक्का और गेहूं उत्पादकों के लिए भी समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग संघ ने सरकार के सामने रखी है।
15 नवंबर से 15 फरवरी तक हो धान खरीदी
भारतीय किसान संघ ने धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से 15 फरवरी तक निर्धारित करने की मांग की है। संघ का कहना है कि पर्याप्त समय मिलने से किसानों को धान बेचने में आसानी होगी और खरीदी केंद्रों पर अनावश्यक दबाव भी कम किया जा सकेगा। इसके साथ ही खरीदी केंद्रों की व्यवस्था और टोकन प्रणाली को व्यवस्थित करने की मांग की गई है।
भूमि अधिग्रहण पर किसानों के अधिकार सुरक्षित रखने की मांग
भूमि अधिग्रहण के मामलों में भी भारतीय किसान संघ ने किसानों के हितों की रक्षा करने की मांग की है। संघ ने भारतीय कृषि इकोनॉमिक रिसर्च सेंटर के उदयपुर डिक्लेरेशन के अनुरूप किसानों के अधिकार सुनिश्चित करने की बात कही है। किसान संगठन ने स्पष्ट किया कि विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों की जमीन का अधिग्रहण उनकी सहमति और उचित हित संरक्षण के बिना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
किसान वोट बैंक नहीं, अर्थव्यवस्था की रीढ़
भारतीय किसान संघ ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि किसान केवल वोट बैंक नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। संगठन का कहना है कि किसान की मेहनत का भुगतान रोककर, उसकी उपज का उचित मूल्य नहीं देकर और समस्याओं को लगातार टालकर प्रदेश का वास्तविक विकास संभव नहीं है।
सड़क से शासन तक आंदोलन की चेतावनी
भारतीय किसान संघ ने कहा कि यदि किसानों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। संगठन ने गांव-गांव किसानों को संगठित कर निर्णायक जनआंदोलन खड़ा करने की चेतावनी दी है। संघ ने मुख्यमंत्री से 12 सूत्रीय मांगों पर तत्काल उच्चस्तरीय बैठक बुलाने, प्रत्येक मांग पर स्पष्ट निर्णय लेने और समयबद्ध कार्ययोजना घोषित करने की मांग की है।
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किसानों की 12 प्रमुख मांगें एक नजर में
2022-23 की धान खरीदी का करीब 1700 करोड़ रुपये बकाया भुगतान।
धान की खरीदी 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने की मांग।
धान खरीदी में 40 किलो 700 ग्राम से ज्यादा वजन नहीं लेने की मांग।
टोकन व्यवस्था में बड़े, छोटे और सीमांत किसानों के लिए अलग व्यवस्था।
बाढ़ प्रभावित किसानों का खेत-खेत सर्वे और तत्काल मुआवजा।
किसानों को निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराने की मांग।
अरपा-भैंसाझार समेत लंबित सिंचाई परियोजनाओं को गति देने की मांग।
गन्ने के मूल्य में 150 रुपये प्रति क्विंटल वृद्धि।
मक्का और गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीदी।
भूमि अधिग्रहण में किसानों के अधिकारों की सुरक्षा।
धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से 15 फरवरी तक करने की मांग।
फल और सब्जी उत्पादकों को कृषक उन्नति योजना में शामिल करने की मांग।
संबंधित लेख: सीधी में स्कूल बस अनियंत्रित होकर घर में घुसी, 2 लोगों की मौत; गुस्साए लोगों ने किया चक्का जाम
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
छत्तीसगढ़ में किसानों के प्रदेशव्यापी आंदोलन ने सरकार के सामने एक साथ कई कृषि मुद्दे खड़े कर दिए हैं। एक तरफ किसान भुगतान, समर्थन मूल्य, धान खरीदी और सिंचाई जैसी मांगों पर तत्काल निर्णय चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ सड़क पर आंदोलन के कारण आम लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। अब निगाहें सरकार की प्रतिक्रिया और 12 सूत्रीय मांगों पर होने वाले अगले फैसले पर टिकी हैं।




















