भागीरथपुरा जांच रिपोर्ट पर अभी और इंतजार, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग पर टली सुनवाई

इंदौर।भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 36 मौतों के मामले में हाई कोर्ट में चल रही जनहित याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई नहीं हो सकी। मामले से जुड़ी कुल सात जनहित याचिकाएं 23 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थीं, लेकिन सुनवाई आगे बढ़ गई। अब मामले को 28 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया गया है। फिलहाल पूरे मामले में सबसे अहम मुद्दा हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में हुई जांच की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और उसकी प्रति उपलब्ध कराने की मांग है।
रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करने का आदेश
आयोग का गठन जनवरी में किया गया था। आयोग ने अपनी करीब 600 पन्नों की जांच रिपोर्ट अगस्त में हाई कोर्ट में प्रस्तुत कर दी। रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद शासन और मामले से जुड़े अन्य पक्षों की ओर से इसे सार्वजनिक नहीं करने की मांग की गई। इसके बाद हाई कोर्ट ने फिलहाल रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करने का आदेश दिया। हालांकि याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों को रजिस्ट्रार के समक्ष रिपोर्ट देखने और उसमें दर्ज बिंदुओं को नोट करने की अनुमति दी गई है।
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रिपोर्ट की प्रति देने की मांग
रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए जाने के आदेश के खिलाफ अधिवक्ता मनीष यादव और अधिवक्ता रितेश ईनानी के माध्यम से इंटरविनर याचिका दायर की गई है। इसमें जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के साथ ही उसकी प्रति उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसी मांग पर हाई कोर्ट में सुनवाई होना बाकी है। यह मामला बुधवार 23 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी। अब इसे 28 सितंबर को सूचीबद्ध किया गया है। ऐसे में उस दिन जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और उसकी प्रति उपलब्ध कराने की मांग पर सुनवाई होने की संभावना है।
मामले में सात जनहित याचिकाएं
भागीरथपुरा मामले में कुल सात जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। ये याचिकाएं रितेश ईनानी, महेश गर्ग, राकेश बैस, प्रभात पांडे, पूनम गुप्ता, विनोद द्विवेदी और पुनीत शर्मा की ओर से दायर की गई हैं। मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया के साथ अधिवक्ता कुलदीप पाठक, मनीष यादव, रितेश ईनानी, केके गुप्ता, गजेंद्र सिंह चौहान, मंजेश शर्मा और अनिल ओझा पैरवी कर रहे हैं। फिलहाल 600 पन्नों की जांच रिपोर्ट हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत हो चुकी है, लेकिन उसके सार्वजनिक होने और याचिकाकर्ताओं को उसकी प्रति मिलने पर निर्णय बाकी है। अब 28 सितंबर की सुनवाई पर इस मुद्दे पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।




















