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पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस, गृह सचिव और प्रमुख सचिव उद्योग को हाईकोर्ट का नोटिस, शक्कर कारखाने के नाम पर करोड़ों के फर्जीवाड़े का आरोप

बुरहानपुर की इश्वम सहकारी शक्कर एवं कृषि उद्योग से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का मामला मध्यप्रदेश हाई कोर्ट पहुंचा है। मुख्य पीठ जबलपुर ने पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस समेत वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में शक्कर मिल और जमीन से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठाए गए हैं।
पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस, गृह सचिव और प्रमुख सचिव उद्योग को हाईकोर्ट का नोटिस, शक्कर कारखाने के नाम पर करोड़ों के फर्जीवाड़े का आरोप
फाइल फोटो

इंदौर। बुरहानपुर की इश्वम सहकारी शक्कर एवं कृषि उद्योग मर्यादित से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। इसमें मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय मुख्य पीठ जबलपुर ने भाजपा की पूर्व कैबिनेट मंत्री अर्चना चिटनीस सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

महू के धर्मेन्द्र शुक्ला की याचिका

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश कोगजे व न्यायाधीश विवेक रूसिया की खंडपीठ ने 16 सितंबर 2026 को यह आदेश जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। इसकी जानकारी याचिकाकर्ता के अधिवक्ता हरीश शर्मा ने दी। याचिका महू निवासी धर्मेन्द्र शुक्ला ने अधिवक्ता हरीश शर्मा, अशोक कुमार गुप्ता, गोपालदास आर्य, संजय पराशर, नीलेश पटेल एवं कौटिल्य श्रीवास्तव के माध्यम से दायर की है।

अध्यक्ष रहते चिटनीस ने खरीदी थी जमीन

याचिका में आरोप है कि तत्कालीन अध्यक्ष रहते हुए अर्चना चिटनीस ने प्रमुख सचिव उद्योग विभाग भोपाल, अनुविभागीय अधिकारी खंडवा, कलेक्टर खंडवा और गृह सचिव मप्र के साथ मिलकर ग्राम टाकलखेड़ा, विकास खंड पंधाना, तहसील खंडवा में जमीन खरीदना बताया। बताया गया कि टाकलखेड़ा से पांच किलोमीटर दूर विश्रामपुर, खंडवा में शुगर मिल प्लांट लगाना प्रस्तावित है। उक्त स्थान पर टीन का एक कमरा बनाकर शक्कर मिल का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती से करवाया गया और इस कार्य के लिए शासन से राशि भी ली गई।

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याचिका में दावा : मौके पर न मिल, न जमीन

याचिकाकर्ता का दावा है कि सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेज प्राप्त करने और मौके पर जाकर देखने पर पता चला कि बताए गए स्थान पर कोई शक्कर मिल ही नहीं है। जमीन की रजिस्ट्रियां भी गोलमाल हैं और करोड़ों रुपये की बैलेंस शीट बनाकर उसका ऑडिट भी करवा लिया गया। इस संबंध में तहसीलदार द्वारा की गई कार्रवाई भी शंका के घेरे में है। याचिकाकर्ता धर्मेन्द्र शुक्ला ने बताया कि उन्होंने आरटीआई से संकलित दस्तावेजों की जांच के बाद अधिवक्ता हरीश शर्मा के माध्यम से सभी संबंधितों को सूचना पत्र जारी किया था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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