'नवीकरणीय ऊर्जा भरोसेमंद ऊर्जा है', वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी पर बोले क्रिस बोवेन

नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच ऑस्ट्रेलिया ने भारत के साथ ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया है। ऑस्ट्रेलिया के जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा मंत्री क्रिस बोवेन ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया अपनी-अपनी 'पूरक शक्तियों' का इस्तेमाल कर ऊर्जा साझेदारी को और गहरा कर सकते हैं। उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा को भरोसेमंद ऊर्जा बताते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में इसकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। नई दिल्ली में चिंतन रिसर्च फाउंडेशन (CRF) के प्री-COP संवाद के दौरान मीडिया से बातचीत में बोवेन ने भारत के साथ ऊर्जा सहयोग और COP31 से जुड़े मुद्दों पर बात की। उन्होंने बताया कि उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों यादव और जोशी के साथ COP31, ऑस्ट्रेलिया की ईंधन सुरक्षा और तरल ईंधन के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी को लेकर चर्चा की है।
COP31 को लेकर भारत के साथ चर्चा
क्रिस बोवेन ने कहा कि COP31 के संदर्भ में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने मंत्री यादव का जिक्र करते हुए कहा कि वह दुनिया के वरिष्ठ और सम्मानित जलवायु मंत्रियों में से एक हैं। बोवेन के मुताबिक, दोनों मंत्रियों ने तीन मौकों पर वार्ता की सह-अध्यक्षता की है और यादव COP31 में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान विद्युतीकरण, छोटे द्वीप विकासशील देशों के लिए वित्त तक पहुंच और महासागरों के महत्व जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। बोवेन ने कहा कि वह आने वाले हफ्तों में भारत और अन्य पक्षों के साथ इन मुद्दों पर आगे भी बातचीत करेंगे।
'हम दुनिया भर में ऊर्जा संकट के बीच में हैं'
ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए बोवेन ने कहा कि दुनिया इस समय ऊर्जा संकट के बीच में है। उन्होंने इस स्थिति को विश्वसनीय नवीकरणीय ऊर्जा की जरूरत से जोड़ते हुए इसके महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब वह रिलायंस और दूसरी कंपनियों से ईंधन सुरक्षा को लेकर बात कर रहे थे, तो उन्हें यह बात याद आई कि नवीकरणीय ऊर्जा भरोसेमंद ऊर्जा है। बोवेन ने कहा कि किसी युद्ध से सूर्य की किरणों का पृथ्वी तक पहुंचना बाधित नहीं किया जा सकता और किसी नाकाबंदी से हवा के प्रवाह को रोका नहीं जा सकता। उनका कहना था कि नए और भरोसेमंद सप्लाई चेन तैयार करने के लिए देशों को मिलकर काम करना होगा। यह सहयोग मौजूदा ऊर्जा संकट के दौरान ही नहीं, बल्कि लंबे समय में भी महत्वपूर्ण रहेगा, क्योंकि नवीकरणीय ऊर्जा तेजी से जीवाश्म ईंधन की जगह ले रही है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया की ‘पूरक शक्तियों’ पर जोर
भारत और ऑस्ट्रेलिया के ऊर्जा सहयोग को लेकर बोवेन ने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी उनकी संबंधित ताकतों पर आधारित है। उन्होंने सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में सहयोग का उदाहरण दिया। बोवेन ने कहा कि दोनों देशों की ऊर्जा साझेदारी इस बात पर आधारित है कि वे एक-दूसरे की किन चीजों में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के पास ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में अच्छा रिसर्च और पर्याप्त क्षमता है, जबकि भारत भी इससे जुड़े क्षेत्रों में काम कर रहा है। उन्होंने गुजरात स्थित सोलर अकादमी का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। बोवेन के मुताबिक, यह अकादमी 2,000 सोलर तकनीशियनों को प्रशिक्षित करेगी।
ईरान से दूरी, भारत से नजदीकी! ट्रंप ने IMEC को लेकर किया बड़ा ऐलान, आखिर क्या है प्लान?
मुंबई और जामनगर भी जाएंगे बोवेन
भारत यात्रा के दौरान क्रिस बोवेन ने मुंबई और जामनगर में रिलायंस का दौरा करने की बात भी कही। ऑस्ट्रेलियाई सरकार के अनुसार, उनकी भारत यात्रा का एक उद्देश्य ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा को लेकर सहयोग मजबूत करना है। भारत और ऑस्ट्रेलिया पहले भी ऊर्जा सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और सप्लाई चेन से जुड़े सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जता चुके हैं। जुलाई 2026 में दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन की मजबूती को लेकर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। बोवेन के ताजा बयान में भी इसी साझेदारी को आगे बढ़ाने और दोनों देशों की क्षमताओं को मिलाकर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।




















