हॉन्ग कॉन्ग के ताई पो जिले में बुधवार दोपहर लगी भीषण आग ने पूरे शहर को दहला दिया। वांग फुक कोर्ट नामक 8 ब्लॉक्स और लगभग 2,000 अपार्टमेंट वाले आवासीय कॉम्प्लेक्स में फैली इस आग ने कुछ ही घंटों में बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। अब तक 44 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 279 लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहत-बचाव टीमें रातभर ऊंची इमारतों में फंसे लोगों को निकालने में लगी रहीं।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, आग बुधवार को स्थानीय समय दोपहर 2:51 बजे एक 32 मंजिला इमारत की बाहरी बांस की स्कैफोल्डिंग से शुरू हुई। मरम्मत का काम चल रहा था और दीवारों पर स्टायरोफोम (पॉलिस्टाइरीन) जैसी अत्यंत ज्वलनशील सामग्री लगी होने के कारण आग तेजी से फैली। तेज हवाओं ने लपटों को एक इमारत से दूसरी इमारत तक पहुंचा दिया, जिससे 8 में से 7 बिल्डिंग आग की चपेट में आ गईं।
पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। जिनमें दो डायरेक्टर और एक इंजीनियरिंग सलाहकार शामिल है। इन तीनों पर गंभीर लापरवाही का आरोप है। माना जा रहा है कि उन पर गैर-इरादतन हत्या का मामला चल सकता है।
कई प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि, उन्होंने पहले तेज धमाके की आवाज सुनी, फिर कुछ मिनटों में पूरे ब्लॉक से आग की लपटें उठने लगीं। एक निवासी ने बताया कि, तेज धुआं 500 मीटर दूर ताई पो ट्रेन स्टेशन तक महसूस हो रहा था। हमें समझ नहीं आ रहा था कि पहले खुद बचें या दूसरों को बचाएं। इमारतें काफी पास-पास होने के कारण आग ने मिनटों में बड़े हिस्से को घेर लिया। कई बुजुर्ग तेजी से बाहर नहीं निकल पाए।

घटनास्थल पर 700 से अधिक फायरफाइटर्स तैनात किए गए और फायर सर्विसेज ने इस आग को “लेवल-5” अलार्म घोषित किया, जो हॉन्ग कॉन्ग की सबसे गंभीर आग की श्रेणियों में से एक है।
अत्यधिक गर्मी और घने धुएं की वजह से फायरफाइटर्स को अंदर जाना मुश्किल हो रहा था। हादसे में एक बहादुर फायरफाइटर हो वाई-हो की मौत भी हो गई।
अब तक:
सरकार ने कई कम्युनिटी सेंटरों में अस्थायी शेल्टर खोले हैं।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता देने का निर्देश दिया। हॉन्ग कॉन्ग के चीफ एग्जीक्यूटिव जॉन ली ने कहा कि, सरकार इस आपदा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी। 7 दिसंबर को होने वाले विधान परिषद चुनावों के प्रचार कार्यक्रम तुरंत रोक दिए गए हैं।
यह घटना हॉन्ग कॉन्ग के इतिहास में सबसे घातक आगजनी में शामिल हो गई है। इससे पहले 1996 में कोवलून की एक व्यावसायिक इमारत में लगी आग में 41 लोगों की मौत हुई थी।