Friendship Day Special:5 रुपए के बैंड से WhatsApp Status तक… बदल गई Friendship Day की पूरी कहानी

फ्रेंडशिप डे आते ही आज के समय में सोशल मीडिया पर दोस्तों की तस्वीरें, स्टोरी और खूबसूरत मैसेज दिखाई देने लगते हैं। WhatsApp Status, Instagram Story और Reels के दौर में दोस्ती का जश्न अब डिजिटल हो चुका है। लेकिन 90s की जनरेशन के लिए फ्रेंडशिप डे का मतलब कुछ और ही था। वो दौर जब दोस्ती दिखाने के लिए महंगे गिफ्ट नहीं, बल्कि स्कूल की दुकान से खरीदा गया 5 रुपए का छोटा सा फ्रेंडशिप बैंड ही काफी होता था। वो बैंड सिर्फ रंगीन धागा नहीं था, बल्कि उसमें छिपी होती थी दोस्ती, भरोसे और बचपन की अनगिनत यादें। आज भले ही दोस्ती मनाने के तरीके बदल गए हों, लेकिन 90s के बच्चों के दिल में उस छोटे से धागे की जगह आज भी कोई नहीं ले पाया है।
5 रुपए का बैंड और हजारों यादें… यही थी 90s की दोस्ती
90s के बच्चों के लिए फ्रेंडशिप डे किसी बड़े इवेंट से कम नहीं होता था। स्कूल जाने से पहले ही प्लान बन जाता था कि किस दोस्त को कौन सा बैंड देना है। स्कूल के बाहर छोटी-छोटी दुकानों पर रंग-बिरंगे फ्रेंडशिप बैंड मिलते थे। कोई लाल रंग का बैंड खरीदता था, तो कोई नीले या पीले रंग वाला। कीमत ज्यादा नहीं होती थी, लेकिन उस बैंड की भावनात्मक कीमत बहुत बड़ी होती थी। कई बच्चे अपनी पॉकेट मनी बचाकर ये बैंड खरीदते थे। कभी-कभी तो एक ही बैंड कई दोस्तों के बीच खास बन जाता था, क्योंकि उसे पहनना दोस्ती की निशानी माना जाता था। वो छोटा सा धागा बताता था कि कौन आपका खास दोस्त है।
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संडे का इंतजार और Friendship Day की तैयारी
आज की तरह तब Friendship Day की तारीख याद दिलाने के लिए मोबाइल नोटिफिकेशन नहीं आते थे। 90s के बच्चे कैलेंडर देखकर या दोस्तों से पूछकर फ्रेंडशिप डे याद रखते थे। रविवार का दिन खास होता था क्योंकि उस दिन दोस्त मिलने की प्लानिंग करते थे। किसी के घर जाना, साथ खेलना, पुराने फोटो देखना या बस घंटों बातें करना… यही उस समय दोस्ती का असली सेलिब्रेशन था। दोस्तों के साथ बिताया गया समय ही सबसे बड़ा गिफ्ट हुआ करता था।
बदल गया दोस्ती जताने का तरीका
समय बदला और दोस्ती मनाने का अंदाज भी बदल गया। आज फ्रेंडशिप डे पर लोग अपने दोस्तों के साथ तस्वीरें शेयर करते हैं, वीडियो बनाते हैं और सोशल मीडिया पर खास मैसेज लिखते हैं। एक क्लिक में दोस्ती का इजहार हो जाता है। WhatsApp Status और Instagram Story ने दूर बैठे दोस्तों को भी जोड़ दिया है। अब हजारों किलोमीटर दूर रहने वाला दोस्त भी एक मैसेज से आपके करीब महसूस हो सकता है। लेकिन 90s की जनरेशन को लगता है कि उस समय दोस्ती में जो व्यक्तिगत एहसास था, वो आज थोड़ा कम हो गया है।
पहले दोस्त मिलने के ढूंढते थे बहाने
स्कूल खत्म होने के बाद दोस्तों से मिलने के लिए अगले दिन का इंतजार करना पड़ता था। छुट्टी वाले दिन मिलना किसी खास मौके जैसा लगता था। ना मोबाइल था, ना चैटिंग ऐप। फिर भी दोस्तों के बीच रिश्ता मजबूत था क्योंकि बातचीत आमने-सामने होती थी। आज टेक्नोलॉजी ने जिंदगी आसान बना दी है। दोस्त हर समय ऑनलाइन जुड़े रहते हैं, लेकिन कई बार एक ही शहर में रहने वाले दोस्त भी महीनों तक नहीं मिल पाते।
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टिफिन शेयर करने से लेकर Memories शेयर करने तक
90s की दोस्ती छोटी-छोटी चीजों से बनती थी। एक-दूसरे का टिफिन खाना, स्कूल के बाद साथ घर जाना, खेल के मैदान में घंटों बिताना और छोटी बातों पर लड़कर फिर तुरंत मान जाना… यही बचपन की दोस्ती थी। आज दोस्ती की यादें फोटो, वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट में सेव होती हैं। पहले यादें दिल में रहती थीं, अब मोबाइल की गैलरी में। दोनों दौर की अपनी खूबसूरती है, लेकिन 90s की सादगी आज भी लोगों को अपनी ओर खींचती है।
क्या आज की दोस्ती कमजोर है?
यह कहना सही नहीं होगा कि आज की दोस्ती पहले जैसी नहीं है। हर दौर की दोस्ती का अपना तरीका होता है। आज के दोस्त मुश्किल समय में ऑनलाइन मदद करते हैं, दूर रहकर भी जुड़े रहते हैं और एक-दूसरे की जिंदगी का हिस्सा बने रहते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले दोस्ती को महसूस किया जाता था, आज उसे शेयर किया जाता है। पहले हाथ पर बंधा धागा दोस्ती की पहचान था, आज एक मैसेज और एक पोस्ट वही काम करती है।











