सरकार का बड़ा फैसला, फ्यूल एक्सपोर्ट ड्यूटी घटाई; डीजल पर 5 और पेट्रोल पर 1 रुपये टैक्स कटौती

डीजल पर निर्यात टैक्स 25 रुपए से घटाकर 20 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि ATF पर यह दर 19 रुपए से घटकर 15 रुपए हो गई है। पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क 1.50 रुपए से घटाकर 50 पैसे प्रति लीटर किया गया है। घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार हर दो हफ्ते में इन दरों की समीक्षा करती है और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर इनमें बदलाव किया जाता है।
डीजल, पेट्रोल और ATF के एक्सपोर्ट पर टैक्स घटा
केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स यानी निर्यात शुल्क में कटौती की है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, डीजल के निर्यात पर अब 20 रुपए प्रति लीटर टैक्स लगेगा, जबकि पहले यह दर 25 रुपए थी। ATF पर टैक्स 19 रुपए से घटाकर 15 रुपए और पेट्रोल पर 1.50 रुपए से घटाकर 50 पैसे प्रति लीटर कर दिया गया है।
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नई दरें 16 सितंबर से हुई लागू
सरकार की ओर से जारी नई दरें 16 सितंबर से शुरू हुए अगले पखवाड़े के लिए लागू होंगी। सरकार हर दो हफ्ते में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाली इन दरों की समीक्षा करती है। यह दरें समीक्षा अवधि के दौरान कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं। इस बार तीनों प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में कटौती की गई है।
घरेलू पेट्रोल-डीजल पर टैक्स में कोई बदलाव नहीं
सरकार ने साफ किया है कि घरेलू बाजार में इस्तेमाल के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी इस फैसले का सीधा संबंध केवल पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर लगने वाले टैक्स से है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा टैक्स व्यवस्था इस कटौती से प्रभावित नहीं हुई है।
क्या है विंडफॉल टैक्स और क्यों लगाया गया था?
बता दें कि विंडफॉल टैक्स ऐसा अतिरिक्त टैक्स है, जो किसी कंपनी को अचानक या असाधारण रूप से हुए ज्यादा मुनाफे पर लगाया जाता है। पेट्रोलियम उत्पादों के मामले में सरकार ने इसे उस समय लागू किया था, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई थी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा कीमत मिलने के कारण कंपनियां बड़े पैमाने पर पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात न करें और देश में इनकी उपलब्धता बनी रहे।
पश्चिम एशिया तनाव के बीच शुरू हुआ था शुल्क
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बीच सरकार ने 27 मार्च 2026 से डीजल और ATF के निर्यात पर यह टैक्स लगाया था। इसके बाद हर दो हफ्ते में इसकी दरों में बदलाव किया जाता रहा। पेट्रोल के निर्यात पर यह शुल्क 16 मई से लागू किया गया था। सरकार ने यह कदम घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय, घरेलू कीमतों के अंतर का फायदा उठाकर ज्यादा निर्यात करने की संभावना को कम करने के लिए उठाया था।
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तेल कंपनियों को निर्यात में मिलेगी राहत
विंडफॉल टैक्स में कटौती से पेट्रोलियम उत्पादों का एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को सीधे तौर पर राहत मिल सकती है। अब कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और ATF विदेशों में बेचने पर पहले के मुकाबले कम टैक्स देना होगा, जिससे उनकी निर्यात लागत घटेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिक्री से मिलने वाले मुनाफे पर टैक्स का बोझ कम होगा। सरकार ने यह कटौती ऐसे समय में की है, जब पश्चिम एशिया के तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों और उपलब्धता पर नजर बनी हुई है।



















