दर्द खत्म तो फिजियोथेरेपी भी बंद? कहीं आप तो नहीं कर रहे ये गलती

दर्द कम हुआ और फिजियोथेरेपी बंद कर दी? अगर आप भी ऐसा करते हैं तो एक बार रुककर सोचने की जरूरत है। कई बार दर्द खत्म होने के बावजूद शरीर की मांसपेशियां कमजोर, जोड़ जकड़े हुए या बैलेंस में कमी हो सकती है। यानी दर्द का जाना हमेशा पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं होता।
दर्द कम होना इलाज का आखिरी पड़ाव नहीं
डॉक्टर के मुताबिक, दर्द शरीर का एक संकेत है कि किसी हिस्से पर ज्यादा दबाव, चोट या सूजन हो सकती है। दवा, आराम और शुरुआती फिजियोथेरेपी से दर्द कम हो सकता है, लेकिन जिस वजह से समस्या हुई है, उसे ठीक होने में ज्यादा समय लग सकता है। उदाहरण के लिए, कमर दर्द में दर्द चला जाने के बाद भी कोर मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं या पोस्चर सही नहीं हुआ हो सकता। इसी तरह घुटने की चोट में दर्द कम होने के बावजूद पैर की ताकत और संतुलन पूरी तरह वापस आने में समय लग सकता है।
फिजियोथेरेपी का काम सिर्फ दर्द कम करना नहीं
डॉक्टर के मुताबिक, फिजियोथेरेपी का मकसद शरीर को दोबारा सही तरीके से काम करने के लिए तैयार करना है। इसमें मांसपेशियों को मजबूत करना, जोड़ों की मूवमेंट बढ़ाना, लचीलापन सुधारना, बैलेंस बेहतर करना और सही पोस्चर व मूवमेंट सिखाना शामिल हो सकता है। हर साल 8 सितंबर को वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे मनाया जाता है। इसका मकसद फिजियोथेरेपी के महत्व और इसके फायदों को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी है।
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दर्द जाते ही अचानक न बढ़ाएं गतिविधियां
डॉक्टर के मुताबिक, चोट, सर्जरी या लंबे समय तक आराम के बाद अचानक पहले जैसी गतिविधियां शुरू करना परेशानी बढ़ा सकता है। ऐसे में शरीर को धीरे-धीरे अपनी ताकत और क्षमता वापस पाने का समय देना जरूरी होता है। फिजियोथेरेपिस्ट व्यक्ति की स्थिति के हिसाब से एक्सरसाइज और गतिविधियों की तीव्रता धीरे-धीरे बढ़ाते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति को दर्द खत्म होने के बाद लंबे समय तक फिजियोथेरेपी की जरूरत हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
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कब तक करनी है फिजियोथेरेपी?
फिजियोथेरेपी कितने समय तक करनी है, यह समस्या, चोट की गंभीरता, शरीर की स्थिति और रिकवरी की रफ्तार पर निर्भर करता है। डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह के अनुसार एक्सरसाइज की अवधि और संख्या कम या ज्यादा की जा सकती है। इसलिए दर्द खत्म होना और समस्या पूरी तरह ठीक होना हमेशा एक ही बात नहीं है। सही समय तक की गई फिजियोथेरेपी शरीर की ताकत और काम करने की क्षमता वापस पाने में मदद कर सकती है और भविष्य में दोबारा दर्द या चोट के जोखिम को कम करने में भी भूमिका निभा सकती है।




















