जो बैग गुजरात में ₹500 का, Fendi ने उसी लुक पर लगा दिया ₹8.3 लाख का टैग! भारतीय कला को क्रेडिट क्यों नहीं?

भारत के पारंपरिक डिजाइन को कॉपी कर इंटरनेशनल लेवल पर लॉन्च करने का एक और मामला सामने आया है। इस बार जो मामला ऑनलाइन वायरल हो रहा है, वह फेंडी (Fendi, Italian Fashion Brand) के नए बैगेट (Baguette) बैग का है। यह ऐसा दिखता है, जैसा गुजरात के बाजार में नवरात्रि के दौरान या उसके बाद जो प्रोडक्ट्स दिखते हैं। इस फैशन ब्रांड ने अपनी वेबसाइट पर लॉन्च किए इस बैग में 475 शीशे, चमकदार कढ़ाई और 39,500 मोती लगे हैं, जिसे बनाने में 138 घंटे की कारीगरी लगी है।
नहीं दिया भारतीय कला को क्रेडिट
भारत में महज 500 रुपए तक में मिलने वाले इस बैग की कीमत 10,000 डॉलर रखी गई है। इतना ही नहीं, सदियों से जिसे हम साधारण बटुआ कहते आ रहे हैं, उसे फेंडी की वेबसाइट पर 'Baguette 26424: कढ़ाई और शीशों वाला मल्टीकलर री-एडिशन बैग' कहा गया है। खास बात यह है कि बैग के बारे में पूरी जानकारी दी गई है, लेकिन इसका इंस्पिरेशन कहां से लिया गया, यह गायब है। हालांकि, इस बैग को देखकर कोई भी यह आसानी से समझ जाएगा कि इसे कहां से कॉपी किया गया है।
ऑनलाइन छिड़ी जंग
इस बैग ने ऑनलाइन काफी चर्चा बटोरी है, लेकिन इस बार कारण सही हैं। मशहूर हस्तियों और इंटरनेट कम्युनिटी ने इस ब्रांड की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि फैशन ब्रांड ने इसे बिना क्रेडिट दिए भारतीय संस्कृति से कॉपी किया है। RPG एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने X पर भारतीय शिल्प (Crafts) पर कब्जा करने के लिए ब्रांड की आलोचना की। उन्होंने लिखा- प्राडा कोल्हापुरी चप्पल विवाद के बाद, अब फेंडी का नवरात्रि बैग आया है। एक ऐसे डिजाइन के लिए 8.3 लाख रुपए की कीमत मांगी जा रही है, जो बिल्कुल गुजरात की सड़कों पर मिलने वाले 500 रुपए के बैग जैसा दिखता है। भारतीय कारीगरों को इसका कोई श्रेय नहीं दिया गया। लग्जरी ब्रांड हमारे शिल्प पर कब्जा करना कब बंद करेंगे?
इससे पहले इन भारतीय वस्तुओं को कॉपी कर ब्रांड्स ने मार्केट में उतारा
कोल्हापुरी चप्पलें: इटली के लग्जरी ब्रांड प्राडा ने टी-स्ट्रैप वाले लेदर फ्लैट्स पेश किए थे। यह पारंपरिक महाराष्ट्रीयन कोल्हापुरी चप्पलों जैसे ही दिखते थे। इसका जोरदार ऑनलाइन विरोध होने के बाद ब्रांड ने इस डिजाइन के भारतीय मूल का जिक्र किया था।
बांधनी प्रिंट: राल्फ लॉरेन को पारंपरिक गुजराती और राजस्थानी बांधनी टाई-डाई स्टाइल वाली प्रिंटेड रैप स्कर्ट बेचने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा। ग्राहकों ने कहा कि यह लग्जरी ब्रांड टाई-डाई की पारंपरिक कला को श्रेय देने या स्थानीय कारीगर समुदायों का समर्थन करने में नाकाम रहा।
बॉटेनिकल और आध्यात्मिक डिजाइन: दिल्ली की इंडिपेंडेंट डिजाइनर अनुपमा दयाल के सिग्नेचर बॉटेनिकल और आध्यात्मिक मोटिफ्स की इंटरनेशनल रिटेलर रैप्सोडिया ने नकल की थी। यह तब हुआ, जब कंपनी के एक प्रतिनिधि ने महरौली में उनके स्टूडियो का दौरा किया था।
ब्लॉक प्रिंटिंग: डिओर को पारंपरिक ब्लॉक-प्रिंटिंग तकनीकों का इस्तेमाल करने के लिए कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। इन तकनीकों को दशकों से स्वतंत्र भारतीय सहकारी समितियों और पीपल ट्री जैसे राजस्थानी प्रिंटर्स ने हाथ से तैयार किया और बनाए रखा था। लेकिन, डिओर ने उन्हें इसका उचित श्रेय नहीं दिया।




















