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₹90 लाख की नौकरी छोड़ जुनून के पीछे चला युवक, अब ₹1.44 करोड़ का दावा, जानें कैसे शुरू किया बिजनेस

₹90 लाख सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर मोहित निझावन ने ₹30 हजार से माइक्रोग्रीन्स का बिजनेस शुरू किया। चंडीगढ़ में 100 वर्ग फुट से शुरू हुआ यह काम अब 500 वर्ग फुट तक पहुंच गया है। कंपनी के मुताबिक, मंथली टर्नओवर ₹12 लाख और सालाना प्रॉफिट ₹60 लाख है। मोहित की कहानी अपने इंटरेस्ट को करियर बनाने की मिसाल है।
₹90 लाख की नौकरी छोड़ जुनून के पीछे चला युवक, अब ₹1.44 करोड़ का दावा, जानें कैसे शुरू किया बिजनेस
₹90 लाख सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर मोहित निझावन ने ₹30 हजार से माइक्रोग्रीन्स का बिजनेस शुरू किया।

आज के दौर में ज्यादातर युवा अच्छी सैलरी वाली नौकरी को सफलता की निशानी मानते हैं। लेकिन चंडीगढ़ के मोहित निझावन ने एक अलग रास्ता चुना। करीब ₹90 लाख सालाना पैकेज वाली कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर उन्होंने अपने इंटरेस्ट के काम को चुना और माइक्रोग्रीन्स का बिजनेस शुरू कर दिया। शुरुआत आसान नहीं थी। पहला बिजनेस बंद हुआ, लेकिन मोहित ने हार नहीं मानी। महज ₹30 हजार से दोबारा शुरुआत की और धीरे-धीरे अपने काम को आगे बढ़ाया। आज कंपनी की ओर से लाखों रुपये के मासिक टर्नओवर और करोड़ों रुपये के सालाना कारोबार का दावा किया जाता है।

क्या होते हैं माइक्रोग्रीन्स?

माइक्रोग्रीन्स सब्जियों और हर्ब्स के बेहद छोटे और शुरुआती पौधे होते हैं। इन्हें बीज से निकलने के कुछ ही दिनों बाद काटकर खाया जाता है। आकार में छोटे होने के बावजूद इन्हें पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है। इसी वजह से हेल्थ और फिटनेस को लेकर जागरूक लोगों के बीच इनकी मांग बढ़ रही है। मोहित ने इसी बढ़ती मांग में बिजनेस का मौका देखा।

₹90 लाख की नौकरी छोड़ी

मोहित ने दिसंबर 2020 में अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने का फैसला किया। उनकी नौकरी का सालाना पैकेज करीब ₹90 लाख था। इसके बाद उन्होंने खेती से जुड़े कारोबार और केमिकल-फ्री न्यूट्रिशन के क्षेत्र में काम करने का फैसला किया। हालांकि, पहली कोशिश में उन्हें सफलता नहीं मिली। उनका पहला बिजनेस ज्यादा समय तक नहीं चल पाया और पार्टनर से जुड़े एक झटके के बाद उन्हें उसे बंद करना पड़ा। लेकिन यहीं से कहानी खत्म नहीं हुई।

₹30 हजार से फिर शुरू किया सफर

मई 2022 में मोहित ने चंडीगढ़ में महज 100 वर्ग फुट की किराए की जगह से दोबारा शुरुआत की। इस बार उनके पास बड़ी पूंजी नहीं थी। उन्होंने सिर्फ ₹30 हजार लगाए और रैक, ट्रे, ग्रो लाइट्स और बीजों की मदद से अपना इनडोर माइक्रोग्रीन्स फार्म तैयार किया। शुरुआत में उन्होंने करीब 21 ऑर्गेनिक माइक्रोग्रीन्स वैरायटी पर फोकस किया। इसमें नॉन-GMO और पेस्टिसाइड-फ्री तरीके से उत्पादन करने पर जोर दिया गया।

100 वर्ग फुट से 500 वर्ग फुट तक पहुंचा सेटअप

धीरे-धीरे लोगों को उनका प्रोडक्ट पसंद आने लगा और ग्राहकों की संख्या बढ़ती गई। इसके साथ ही उनका छोटा सा फार्म भी बड़ा होता गया। कंपनी की जानकारी के मुताबिक, उनका सेटअप अब करीब 500 वर्ग फुट तक पहुंच चुका है। इसमें लगभग 60 रैक लगाए गए हैं और इसकी क्षमता करीब 12,000 ट्रे प्रति महीने बताई जाती है। एक ट्रे की कीमत करीब ₹200 बताई गई है।

कंपनी का ₹12 लाख मंथली टर्नओवर का दावा

मोहित का ब्रांड 'ग्रीनू' (Greenu), एम्ब्रियोनिक ग्रीन्स प्राइवेट लिमिटेड के तहत काम करता है। कंपनी के मुताबिक, इसका मंथली टर्नओवर करीब ₹12 लाख है। इस हिसाब से सालाना कारोबार करीब ₹1.44 करोड़ तक पहुंचने का दावा किया गया है। कंपनी करीब ₹60 लाख सालाना प्रॉफिट का भी दावा करती है। हालांकि, ये आंकड़े कंपनी की ओर से साझा किए गए हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़े नहीं माना जाना चाहिए।

रेस्टोरेंट से जिम तक पहुंच रहे माइक्रोग्रीन्स

ग्रीनू के ग्राहक सिर्फ आम हेल्थ-कॉन्शस लोग नहीं हैं। कंपनी के मुताबिक, इसके माइक्रोग्रीन्स रेस्टोरेंट, कैफे, जिम और कुछ हेल्थ प्रोफेशनल्स तक भी पहुंचते हैं। प्रोडक्ट की ताजगी बनाए रखने के लिए कुछ मामलों में माइक्रोग्रीन्स को जड़ों के साथ भी ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है। इनडोर फार्मिंग के दौरान कोकोपीट और कोको फाइबर जैसे ऑर्गेनिक ग्रोइंग मीडिया का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही तापमान, नमी और एयरफ्लो को कंट्रोल करके पौधों को उगाया जाता है।

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सिर्फ प्रोडक्ट बेचने तक सीमित नहीं रखा बिजनेस

मोहित ने अपने बिजनेस को केवल माइक्रोग्रीन्स बेचने तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कमाई के दूसरे रास्ते भी जोड़े। कंपनी की ओर से ट्रेनिंग, किट और बीजों की बिक्री की जाती है। इसके अलावा फ्रेंचाइजी सेटअप शुरू करने में भी मदद दी जाती है। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, देशभर में 300 से ज्यादा किसानों और नए उद्यमियों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। अंबाला, गुरुग्राम, मोहाली और पंचकूला जैसे शहरों में फ्रेंचाइजी सेटअप को लेकर भी काम किया गया है।

बड़ी नौकरी से ज्यादा जरूरी था अपना इंटरेस्ट

मोहित की कहानी सिर्फ एक बिजनेस की कहानी नहीं है। इसमें उन युवाओं के लिए भी एक सीख है, जो नौकरी और अपने पैशन के बीच उलझे रहते हैं। हर किसी के लिए बड़ी सैलरी वाली नौकरी छोड़ना सही फैसला हो, यह जरूरी नहीं है। लेकिन मोहित ने अपने इंटरेस्ट को पहचाना और उसी दिशा में काम करने का जोखिम लिया। पहली कोशिश में असफल हुए, फिर दोबारा शुरुआत की और धीरे-धीरे अपने काम को एक बड़े बिजनेस मॉडल में बदल दिया। जब इंसान अपने पसंद के काम को सिर्फ नौकरी की तरह नहीं, बल्कि जुनून और मेहनत के साथ करता है, तो सफलता के साथ उसकी अपनी पहचान भी बन सकती है। मोहित की कहानी इसी बात की मिसाल है। ₹90 लाख के पैकेज वाली नौकरी छोड़कर ₹30 हजार से शुरुआत करना आसान फैसला नहीं था, लेकिन आज माइक्रोग्रीन्स के इसी काम ने उन्हें एक अलग पहचान दी है और कंपनी के मुताबिक अच्छी कमाई का जरिया भी बनाया है।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...Read More

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