यूजी में प्रवेश के लिए घटी लाड़ली लक्ष्मी की रुचि, पिछले वर्ष की तुलना में 12 फीसदी छात्राओं की कमी

भोपाल। उच्च शिक्षा विभाग के कॉलेजों में यूजी में एडमिशन लेने में ‘लाड़ली लक्ष्मी’ की रुचि कम होती दिखाई दे रही है। हाल यह है कि सत्र 2024-25 में शुरू की गई लाड़ली लक्ष्मी योजना 2.0 में तीसरे साल में ही गिरावट आ गई है। पिछले सत्र की तुलना में वर्तमान सत्र 2026-27 में करीब 12 फीसदी कम एडमिशन हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार योजना का गिरावट का कारण प्रचार प्रसार सही तरीके से नहीं होना है।
लाभ से वंचित रह सकती है छात्राएं
वर्तमान में यूजी-पीजी की काउंसलिंग में प्रवेश का ग्राफ जरूर बढ़ा है, लेकिन योजनाओं का लाभ छात्र-छात्राओं तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसकी वजह शाखाओं के प्रभारी अपने दायित्वों को मुंह फेर रहे हैं। इसलिए लाड़ली लक्ष्मी योजना में गत वर्ष की अपेक्षा 12 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है। गत वर्ष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहली योजना शुरू की थी जो अब विफल होती दिखाई दे रही है। आगामी सत्र 2027-28 में छात्राएं उक्त योजना का लाभ लेने से वंचित रह सकती हैं।
योजना के साथ आरक्षित स्कॉलरशिप भी ले सकती हैं छात्राएं
छात्राएं यूजी में प्रवेश लेने के दौरान लाड़ली लक्ष्मी योजना 2.0 का आवेदन करने के साथ अपने वर्ग जैसे ओबीसी, एससी-एसटी की स्कॉलरशिप भी ले सकेंगी। यूजी में दो लाख से ज्यादा छात्राओं ने प्रवेश लिया है। उक्त प्रवेशरत छात्राओं में से साढ़े 12 फीसदी छात्राएं ही योजना से जुड़ सकती हैं, जबकि गत वर्ष उक्त ग्राफ 18 फीसदी था। लाड़ली लक्ष्मी योजना 2.0 की पात्रता होने पर छात्राएं गांव की बेटी और प्रतिभा किरण योजना का आवेदन नहीं कर पाएंगी। छात्राएं उसी प्रोत्साहन राशि का चयन करेंगी, जिनसे उन्हें आर्थिक लाभ ज्यादा हो रहा हो। गांव की बेटी और प्रतिभा किरण में छात्राओं को छह हजार रुपए सालाना दिए जाते हैं, इसलिए लाड़ली लक्ष्मी योजना 2.0 में ज्यादा छात्राओं के आवेदन होना थे, जो नहीं हो सके।
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किन छात्राओं को मिलेगा योजना का लाभ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी छात्राओं को और आगे बढ़ाने लाड़ली लक्ष्मी योजना 2.0 लागू की थी। वर्तमान सत्र में करीब 25 हजार छात्राओं ने यूजी में दाखिले लिए हैं। योजना के तहत उक्त छात्राओं को 25 हजार रुपए दिए जाएंगे। योजना का लाभ उन्हीं छात्राओं को दिया जाएगा, जिसमें उनके माता-पिता की दो संतान हो। उनके माता-पिता ने परिवार नियोजन कराया हो। इसके अलावा छात्रा के माता पिता आयकर की श्रेणी में न आते हों। छात्राओं को तीन साल की डिग्री के दौरान दो किस्तों में प्रोत्साहन राशि अदा की जाएगी। पहली किस्त प्रथम वर्ष और दूसरी किस्त अंतिम वर्ष के अध्ययन के दौरान दी जएगी। इसके साथ छात्राओं की पूरी फीस भी शासन देगा। स्कीम को लागू करने में निजी और सरकारी कॉलेजों का बंधन नहीं है। छात्राएं आगामी सत्र में प्रदेश के किसी भी उच्च शिक्षा विभाग के काॅलेज में प्रवेश ले सकेंगी।
एक्सपर्ट व्यू
सरकार द्वारा छात्राओं के लिए योजनाएं तो बहुत चलाई जा रही हैं। लेकिन अफसर उसको छात्राओं तक पहुंचाने में असफल रहे हैं। कॉलेज चलो अभियान भी कागजों तक ही सीमित रह गया है। यदि छात्राओं को योजनाओं के बारे में सही तरीके से बताया गया होता तो आज यह स्थिति नहीं होती।
कई छात्राएं नियम के चलते बाहर
लाड़ली लक्ष्मी योजना का एक क्राइट एरिया है। इसके चलते कई छात्राएं उस नियम से बाहर हो जाती हैं। इसलिए उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पाता है। यही कारण है कि योजना के तहत कम एडमिशन दिखाई दे रहे हैं।
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