अवैध बैनर-पोस्टर के खिलाफ उपवास पर बैठे दंपति, 2018 की विज्ञापन नीति के बावजूद शहर में धड़ल्ले से लग रहे अवैध होर्डिंग

इंदौर। पांडेय का कहना है कि जब तक शहर से अवैध होर्डिंग-पोस्टर हटाने की ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे उपवास जारी रखेंगे। उन्होंने इसे शहर की सुंदरता को खराब करने, यातायात में बाधा और नियमों का उल्लंघन बताया। पांडेय ने अस्थाई गेट-गेंट्री को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि ये किसी वाहन चालक पर गिर सकते हैं। वहीं, उन्होंने विधायक गोलू शुक्ला के समर्थकों पर मारपीट करने और डिवाइस ले लेने का आरोप लगाया है।
2018 में बनी आउटडोर विज्ञापन नीति, सवाल अब भी कायम
पूर्व पार्षद छोटे यादव के मुताबिक मध्यप्रदेश में वर्ष 2018 में आउटडोर विज्ञापन नीति लागू की गई थी। इसमें नगर निगम द्वारा निर्धारित आकार और स्थानों पर ही विज्ञापन लगाने का प्रावधान है। इसके लिए निगम ने विज्ञापन एजेंसियों को ठेके भी दिए हैं। इसके बावजूद शहर में निर्धारित विज्ञापनों के मुकाबले कई गुना अवैध बैनर-पोस्टर लगाए जा रहे हैं। इनसे कई जगह यातायात प्रभावित होने के साथ शहर की दृश्य सुंदरता भी खराब हो रही है।
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राजनीतिक आयोजनों के बैनर-पोस्टरों पर ज्यादा सवाल
नीति के बावजूद राजनीतिक आयोजनों, जन्मदिन, स्वागत और अन्य अवसरों पर सड़कों और चौराहों पर बैनर-पोस्टर लगाने का सिलसिला जारी है। सबसे ज्यादा सवाल राजनीतिक बैनर-पोस्टरों को लेकर उठते रहे हैं। पांडेय दंपती का उपवास भी इसी मुद्दे को लेकर शुरू हुआ है। वहीं, वार्ड और शहर के अलग-अलग हिस्सों में लगातार लगने वाले पोस्टर और होर्डिंग को लेकर नियमों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं।
निगम का दावा-रोज हटाते हैं दो ट्रक अवैध पोस्टर
मामले में निगम आयुक्त का कहना है कि अवैध बैनर-पोस्टर के खिलाफ प्रतिदिन कार्रवाई की जाती है। उनके अनुसार रोज करीब दो ट्रक अवैध पोस्टर-बैनर हटाए जाते हैं। इसके बावजूद अगर शहर में लगातार नए विज्ञापन लग रहे हैं तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि हटाने की कार्रवाई और दोबारा लगने वाले अवैध विज्ञापनों के बीच स्थायी रोक क्यों नहीं लग पा रही है। पांडेय दंपती का उपवास इसी सवाल को लेकर अब निगम और प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी कर रहा है।
नेताओं की अपील, फिर भी नहीं थम रहे पोस्टर
कैलाश विजयवर्गीय ने समर्थकों से बैनर-पोस्टर नहीं लगाने की अपील की है। पुष्यमित्र भार्गव ने शहर की सुंदरता बनाए रखने के लिए अनावश्यक पोस्टर से बचने की अपील की है। मालिनी गौड़ ने भी समर्थकों से बैनर-पोस्टर नहीं लगाने की अपील की है। इसके बावजूद जमीनी तस्वीर यह है कि निगम के अनुसार रोज करीब दो ट्रक अवैध प्रचार सामग्री हटाई जा रही है, लेकिन शहर में नए बैनर-पोस्टर लगाने का सिलसिला जारी है।
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सवाल जो निगम से जवाब मांगते हैं
2018 की आउटडोर विज्ञापन नीति के तहत निर्धारित स्थानों के बाहर बैनर-पोस्टर क्यों लग रहे हैं? रोज कार्रवाई के बाद भी अगले दिन उन्हीं इलाकों में नए पोस्टर कैसे लग जाते हैं? अस्थाई गेट-गेंट्री और ट्रैफिक प्रभावित करने वाले विज्ञापनों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है? राजनीतिक समर्थकों के बैनर-पोस्टरों पर नियम समान रूप से लागू होते हैं या नहीं? केवल पोस्टर हटाना समाधान है या लगाने वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए?




















