NGT ने कहा-बंद खदानों को लावारिस नहीं छोड़ा जा सकता, सीसीटीवी निगरानी के निर्देश

भोपाल। महज सौ रुपये प्रति बोरी कोयले के लालच में बंद खदान की गहराई में उतरी दो जिंदगियों की मौत के बाद अब प्रशासन और कोल माफिया पर शिकंजा कस गया है। छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव में हुए दर्दनाक खदान हादसे पर एनजीटी ने संज्ञान लेते हुए साफ कर दिया है कि बंद खदानों को लावारिस नहीं छोड़ा जा सकता। एपजीटी ने वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड और जिला प्रशासन को
एक साल पहले हुआ था हादसा
दरअसल, 24-25 सितंबर 2025 को जुन्नारदेव स्थित बंद मोआरी/अंबारा ओपन कास्ट खदान में अवैध कोयला खनन के दौरान अचानक चट्टान ढह गई। इसमें हादसे में मोहम्मद आवेश और अंतिम नामक दो युवकों की मौके पर मौत हो गई, जबकि मुकेश यादव गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय युवक 100 रुपए प्रति बोरी के हिसाब से कोयला निकालकर बेचते थे। एनजीटी ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया था। एनजीटी के आदेश पर मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन की संयुक्त समिति ने स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपी।
संयुक्त समिति की रिपोर्ट
सुरक्षा व्यवस्था: खदान क्षेत्र में फेंसिंग और सुरक्षा गार्ड तैनात थे, लेकिन अवैध खननकर्ताओं ने तारों को काटकर अंदर प्रवेश किया था।
खनन स्थिति: अंबारा खदान में वर्ष 2022 से खनन बंद है।
भविष्य की योजना: खदान के गहरे गड्ढे को प्रस्तावित 'मोहन चरण-5' परियोजना से निकलने वाले मलबे से भरने की योजना है, जिसकी स्वीकृतियां प्रक्रियाधीन हैं।
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एनजीटी का आदेश
सुरक्षा सुदृढ़ीकरण: खदान क्षेत्र की फेंसिंग को मजबूत किया जाए, सतत निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और पुलिस व
वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड सुरक्षा बल की गश्त बढ़ाई जाए।
कोयला परतों को ढकना: खदान में बाहर दिख रही कोयले की उजागर परतों को मिट्टी/मलबे से ढका जाए ताकि अवैध खनन रोका जा सके।
पौधारोपण व भराव: स्वीकृत 'माइन क्लोजर प्लान' के तहत खदान के गड्ढों का भराव किया जाए और प्रति हेक्टेयर कम से कम 2,500 पौधे लगाए जाएं।
पर्यावरणीय नियम: जल एवं वायु प्रदूषण अधिनियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए।
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