Manisha Dhanwani
5 Feb 2026
वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका के कुख्यात फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी कुछ फाइल्स हाल ही में सार्वजनिक की गई हैं। इन फाइल्स के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दावा किया जा रहा है कि, इन दस्तावेजों में एपस्टीन के ईमेल पासवर्ड जैसी जानकारी गलती से दिखाई गई है, जिसके बाद किसी ने उसके निजी ईमेल अकाउंट में घुसने की कोशिश की। इस दावे के बाद अमेरिका में साइबर सुरक्षा और सरकारी दस्तावेजों की गोपनीयता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ यूजर्स ने दावा किया कि, फाइल्स में दिखे पासवर्ड का इस्तेमाल करके एपस्टीन का एक ईमेल अकाउंट लॉगइन किया गया है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि, अकाउंट में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन लॉगइन हो गया था। इन दावों के बाद यह खबर तेजी से वायरल हो गई और कई यूजर्स कहने लगे की एपस्टीन का अकाउंट हैक हो गया है।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि, दस्तावेजों में पासवर्ड जैसा टेक्स्ट दिखना रेडैक्शन यानी जानकारी छुपाने की प्रक्रिया में गलती हो सकती है। इसका यह मतलब नहीं है कि वह पासवर्ड अभी भी काम कर रहा हो, ईमेल अकाउंट सक्रिय हो या किसी ने वास्तव में हैक किया हो। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह भी पूरी संभावना है कि ये पासवर्ड पुराने, निष्क्रिय या पहले से बंद किए जा चुके अकाउंट्स से जुड़े हों।

अब तक अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ), FBI या किसी सरकारी एजेंसी ने यह पुष्टि नहीं की है कि एपस्टीन का कोई ईमेल अकाउंट हैक हुआ है। किसी भी आधिकारिक बयान में यह नहीं कहा गया है कि, सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे सही हैं।

सरकार ने जेफ्री एपस्टीन और उसकी सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल से जुड़े लाखों दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इन फाइलों में जांच से जुड़े रिकॉर्ड, ईमेल से संबंधित जानकारियां और डिजिटल डेटा शामिल हैं। इन्हीं दस्तावेजों में कुछ संवेदनशील जानकारी को पूरी तरह छुपाया नहीं जा सका, जिसके चलते यह पूरा विवाद सामने आया।
विशेषज्ञों का कहना है कि, सोशल मीडिया पर किए गए दावों पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार हर दावा सच नहीं होता और बिना ठोस सबूत किसी अकाउंट को हैक कहना गलत हो सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होने तक इंतजार करना जरूरी है।
यह मामला दिखाता है कि, अगर सरकारी दस्तावेज़ो को सार्वजनिक करते समय जानकारी सही तरीके से नहीं छुपाई जाए, तो अफवाहें और गलत दावे फैल सकते हैं।
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