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क्रश के सामने नर्वस?जानिए क्यों होता है ऐसा! कैसे पाएं कॉन्फिडेंस?

क्रश के सामने नर्वस होना सिर्फ शर्म या झिझक नहीं है। आपके दिमाग और हार्मोन्स की साइकोलॉजिकल वजहें हैं, जो एंग्जायटी और सेल्फ-कॉन्शसनेस बढ़ाती हैं। जानिए कैसे डोपामाइन, उम्मीद और अटैचमेंट आपके व्यवहार को प्रभावित करते हैं और क्यों हम अनजान लोगों से ज्यादा सहज रहते हैं।
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जानिए क्यों होता है ऐसा! कैसे पाएं कॉन्फिडेंस?
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    क्या आपने भी कभी महसूस किया है कि जब आपका क्रश या पसंदीदा शख्स आपके सामने होता है तो आपका दिल तेजी से धड़कता है, हाथ-पैर ठंडे पड़ जाते हैं और आप बोलते समय आत्मविश्वास खो देते हैं? वहीं, वही इंसान अगर आपके जीवन में सिर्फ एक जान-पहचान वाला व्यक्ति हो, तो आप सहज और रिलैक्स रहते हैं। यह सिर्फ शर्म या झिझक की वजह से नहीं होता, बल्कि इसके पीछे साइकोलॉजिकल कारण छिपे होते हैं।

    दिमाग हाई अलर्ट मोड में क्यों होता है?

    साइकोलॉजी के अनुसार, जब हमें किसी पर क्रश होता है, तो हमारा दिमाग पूरी तरह “हाई अलर्ट” मोड में चला जाता है। इसका कारण यह है कि हम उस इंसान के साथ आगे क्या होगा, इसका अनुमान लगाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि वह हमें पसंद करे, हमारी बात सुने और हमें रिजेक्ट न करे।

    इस सोच के कारण हमारा दिमाग लगातार यह सोचता है कि हमें क्या बोलना चाहिए, कैसे दिखना चाहिए और किस तरह का व्यवहार करना चाहिए। यही वजह है कि क्रश के सामने हम अक्सर ओवरथिंक करने लगते हैं और खुद पर शक करने लगते हैं।

    डोपामाइन का असर

    क्रश के समय हमारे दिमाग में डोपामाइन नाम का हार्मोन बढ़ जाता है। यह हार्मोन हमें अच्छा महसूस कराता है, हमें मोटिवेट करता है और सामने वाले को स्पेशल बना देता है। लेकिन इस हार्मोन के साथ रिजेक्शन का डर भी जुड़ा होता है।

    रिजेक्शन का डर हमारी एंग्जायटी को बढ़ाता है और हम खुद पर भरोसा खोने लगते हैं। यही कारण है कि कई लोग क्रश के सामने बोलते समय हिचकिचाते हैं और अपनी असली पहचान को पूरी तरह नहीं दिखा पाते।

    उम्मीद और प्रेशर

    जब किसी से इमोशनल अटैचमेंट होता है, तो हमारे मन में उम्मीद भी बढ़ जाती है। हम चाहते हैं कि चीजें हमारी उम्मीदों के अनुसार हों। लेकिन धीरे-धीरे यह उम्मीद प्रेशर में बदल जाती है। दिमाग बार-बार यह सोचता है कि अगर बात बिगड़ गई तो क्या होगा। यही वजह है कि अटैचमेंट अवेयरनेस बढ़ जाती है और हमारे अंदर एंग्जायटी पैदा होती है।

    बिना अटैचमेंट के सहजता

    इसके अलावा, जब किसी के प्रति इमोशनल अटैचमेंट नहीं होता, तो हमारा दिमाग रिलैक्स रहता है। हमें किसी रिजल्ट की चिंता नहीं होती और न ही रिजेक्शन का डर।

    ऐसे में नर्वस सिस्टम शांत रहता है। इंसान अपने आप में ऑथेंटिक महसूस करता है और उसका कॉन्फिडेंस अपने आप बाहर आता है। यही कारण है कि कई बार हम अनजान लोगों से ज्यादा आसानी से और खुलकर बात कर पाते हैं।

    क्रश के सामने खुद को संभालने के तरीके

    ओवरथिंकिंग कम करें- यह समझें कि आप हमेशा परफेक्ट नहीं होंगे।
    सांसों पर ध्यान दें- धीमी और गहरी सांस लेने से आपका दिमाग शांत होता है।
    छोटे स्टेप्स लें- सीधे क्रश पर ध्यान न दें, पहले दोस्ती या सामान्य बातचीत से शुरुआत करें।
    अपने आप को एक्सप्रेस करें- अपने विचार और भावनाओं को खुलकर व्यक्त करें।
    रिजेक्शन को नेगेटिव न लें- यह सीखने का हिस्सा है, हर रिजेक्शन दुनिया का अंत नहीं।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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