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MP News :क्या महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक की तरह अब मप्र BJP में भी नहीं भरेगा संगठन महामंत्री पद!

मप्र में भाजपा के वरिष्ठ नेता हितानंद शर्मा के संघ में जाने के बाद इस पद को लेकर कयास लगाने का दौर जारी है। एक चर्चा यह भी है कि प्रदेश BJP में संगठन महामंत्री पद पर नियुक्ति शायद ही हो क्योंकि  महाराष्ट्र, राजस्थान व कर्नाटक में भी ऐसा हो चुका है।
क्या महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक की तरह अब मप्र BJP में भी नहीं भरेगा संगठन महामंत्री पद!
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    राजीव सोनी, भोपाल। मध्यप्रदेश में यह पहला मौका है जब BJP संगठन महामंत्री पद को लेकर सस्पेंस की स्थिति बनी। नई नियुक्ति के बिना ही वर्तमान पदाधिकारी का दायित्व बदल दिया गया। पूर्व में भी बदलाव के पहले सह संगठन महामंत्री की व्यवस्था रही है। फिलहाल क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल के हाथ कमान सौंपी गई है। ऐसी संभावना है कि आगे उन्हें ही कंटीन्यू कर दिया जाए। यही वजह है कि निवर्तमान संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा के उत्तराधिकारी का ऐलान नहीं हुआ।

    मार्च की बैठक पर निगाहें

    सत्ता-संगठन की निगाहें मार्च में होने वाली संघ की अभा प्रतिनिधि सभा बैठक पर लगी हैं। जानकारों का दावा है कि प्रचारकों की कमी को देखते हुए नई नियुक्ति के आसार कम हैं। इसलिए मप्र में यथास्थिति बनी रह सकती है। कुछ नामों की अटकलें हैं। इनमें भीखू भाई के अलावा मिथिलेश माहेश्वरी, विमल गुप्ता, अनिल अग्रवाल और राजमोहन सिंह आदि हैं।  संघ ने यदि किसी नए व्यक्ति की नियुक्ति की तो कुछ नामों की अटकलें भी हैं।

    इन राज्यों में भी नहीं हुई नई नियुक्ति

    इसके अलावा देश में महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक और गोवा जैसे कतिपय राज्य हैं जहां संगठन महामंत्री के बिना ही व्यवस्थाएं चल रही हैं। संघ ने इन राज्यों में भी पद खाली होने के बाद किसी नए प्रचारक की नियुक्ति नहीं की। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश लगातार इन सभी राज्यों की सांगठनिक मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

    मप्र के सभी जिलों की फेरी लगा चुके जामवाल

    मप्र में विधानसभा चुनाव के करीब एक साल पहले जामवाल, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री के बतौर मप्र के साथ छत्तीसगढ़ में संगठन का काम देख रहे हैं। जबकि छग में संगठन महामंत्री पद पर पवन साय पहले से ही तैनात हैं। इसलिए जामवाल को पूरी तरह मप्र की देखरेख के लिए कहा जा सकता है। मप्र के लगभग सभी जिलों में कई मर्तबा उनकी फेरी लग चुकी है।  

    उपयोगिता के आधार पर नई नियुक्ति का फैसला

    हां, यह सही है कि मप्र में हमेशा बदलाव के साथ ही तत्काल नई नियुक्ति होती रही है। संगठन, उपयोगिता के आधार पर नई नियुक्ति का निर्णय करता है। व्यवस्थाओं में समय-समय पर बदलाव होता रहता है।

     कृष्ण मुरारी मोघे, पूर्व संगठन महामंत्री मप्र-छग

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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