Manisha Dhanwani
5 Feb 2026
वॉशिंगटन डीसी। दुनिया के सबसे प्रभावशाली और प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में गिने जाने वाले ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ में हुई हालिया छंटनी ने वैश्विक पत्रकारिता जगत को गहरा झटका दिया है। अमेरिका स्थित इस अखबार ने बड़े पैमाने पर पुनर्गठन के तहत अपने करीब एक-तिहाई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है।
इस फैसले की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इसकी चपेट में वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय मामलों के कॉलमिस्ट ईशान थरूर भी आ गए, जो भारतीय कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे हैं और पिछले 12 वर्षों से अखबार से जुड़े थे।
ईशान थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी नौकरी समाप्त होने की पुष्टि करते हुए इसे न्यूजरूम के लिए बेहद दुखद दिन बताया। उन्होंने लिखा कि, उन्हें अपने उन सहयोगियों से बिछड़ने का गहरा अफसोस है, जिन्होंने वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता को मजबूती दी। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने खाली पड़े न्यूजरूम की तस्वीर साझा करते हुए बस इतना लिखा- एक बुरा दिन।
ईशान थरूर 2013 में वॉशिंगटन पोस्ट से जुड़े थे और अंतरराष्ट्रीय राजनीति व वैश्विक घटनाओं पर उनकी पकड़ को व्यापक पहचान मिली। साल 2017 में शुरू किया गया उनका लोकप्रिय कॉलम ‘WorldView’ लाखों पाठकों के बीच बेहद चर्चित रहा। ईशान ने कहा कि, इस कॉलम के जरिए दुनिया की जटिल घटनाओं को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनके करियर का सबसे गर्व का पल रहा।
इस छंटनी का सबसे बड़ा असर अखबार की अंतरराष्ट्रीय कवरेज पर पड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मिडिल ईस्ट की पूरी रिपोर्टिंग टीम को हटा दिया गया। इंडिया, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कई एडिटर और रिपोर्टर बाहर किए गए। दिल्ली, बीजिंग, कीव, बर्लिन और काहिरा जैसे अहम वैश्विक ब्यूरो या तो बंद कर दिए गए या बेहद सीमित कर दिए गए।
काहिरा ब्यूरो चीफ क्लेयर पार्कर ने इस फैसले को समझ से परे बताया, जबकि युद्ध क्षेत्र से रिपोर्टिंग कर चुकीं पत्रकार लिजी जॉनसन को भी नौकरी गंवानी पड़ी।
वॉशिंगटन पोस्ट ने व्यापक पुनर्गठन के तहत अपने स्पोर्ट्स सेक्शन को पूरी तरह बंद करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही अखबार ने बुक्स कवरेज सेक्शन को समाप्त कर दिया है और उसका लोकप्रिय डेली न्यूज पॉडकास्ट ‘Post Reports’ भी बंद कर दिया गया है। इसके अलावा लोकल न्यूज सेक्शन को छोटा किया जा रहा है, जिससे स्थानीय रिपोर्टिंग पर भी असर पड़ेगा। हालांकि कुछ स्पोर्ट्स रिपोर्टर्स को फीचर्स डेस्क में समायोजित किया गया है, लेकिन अब अखबार में नियमित और स्वतंत्र खेल कवरेज नहीं की जाएगी।
कंपनी के मुताबिक इस छंटनी में कुल स्टाफ का लगभग 30% हिस्सा प्रभावित हुआ। न्यूजरूम के करीब 800 पत्रकारों में से 300 से ज्यादा को बाहर किया गया। जिन कर्मचारियों को हटाया गया है, वे 10 अप्रैल तक तकनीकी रूप से कंपनी में रहेंगे, लेकिन उनसे काम नहीं लिया जाएगा। उन्हें छह महीने तक हेल्थ इंश्योरेंस का लाभ मिलेगा।
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वॉशिंगटन पोस्ट पिछले कई सालों से लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक-
2023 में घाटा: 77 मिलियन डॉलर
2024 में घाटा: 100 मिलियन डॉलर
कुल दो साल में नुकसान: 177 मिलियन डॉलर (करीब 1,500 करोड़ रुपए)
इसका एक बड़ा कारण डिजिटल मीडिया में आया बदलाव है, जहां जनरेटिव AI के बढ़ते इस्तेमाल से गूगल सर्च ट्रैफिक में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
अखबार को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले मालिक जेफ बेजोस ने किसी भी उम्मीदवार को समर्थन न देने का फैसला लिया। इस फैसले के बाद बड़ी संख्या में पाठकों ने अपनी सदस्यता रद्द कर दी, जिससे रेवेन्यू और कमजोर हुआ।
वॉशिंगटन पोस्ट के पूर्व कार्यकारी संपादक मार्टिन बैरन ने इस कदम को अखबार की ब्रांड वैल्यू के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग में कटौती करना अखबार की पहचान को कमजोर करता है। वहीं मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि, यह फैसला वैश्विक पत्रकारिता के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
एग्जीक्यूटिव एडिटर मैट मरे ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि, बदलती तकनीक और पाठकों की आदतों में आए बदलावों के चलते अखबार को यह कठोर लेकिन जरूरी फैसला लेना पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि, आगे वॉशिंगटन पोस्ट का फोकस मुख्य रूप से अमेरिकी राजनीति, राष्ट्रीय खबरें, बिजनेस और हेल्थ से जुड़ी रिपोर्टिंग पर रहेगा, जबकि अंतरराष्ट्रीय कवरेज को काफी हद तक सीमित किया जाएगा।
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