वोट चोरी जैसे गंदे शब्‍द... चुनाव आयोग का राहुल को करारा जवाब, बोला- यह करोड़ों वोटर्स पर हमला

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वोट चोरी जैसे गंदे शब्‍द... चुनाव आयोग का राहुल को करारा जवाब, बोला- यह करोड़ों वोटर्स पर हमला
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। बिहार में वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर चुनाव आयोग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। आयोग ने कहा कि बिना सबूत इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल न केवल करोड़ों भारतीय मतदाताओं का अपमान है, बल्कि लाखों चुनावकर्मियों की ईमानदारी पर भी सवाल उठाता है।

    चुनाव आयोग का जवाब- ‘सबूत दें, बेबुनियाद बयान नहीं’

    चुनाव आयोग ने बयान में कहा कि ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ का सिद्धांत भारत के पहले आम चुनाव 1951-52 से लागू है। यदि किसी के पास यह प्रमाण है कि किसी व्यक्ति ने किसी चुनाव में दो बार मतदान किया है, तो वह इसे शपथपत्र के साथ आयोग को सौंपे। ‘वोट चोरी’ जैसे शब्द झूठा नैरेटिव बनाने की कोशिश हैं। यह देश के सभी मतदाताओं और चुनाव प्रक्रिया में लगे कर्मियों पर सीधा हमला है।

    राहुल गांधी के आरोप और विवाद की पृष्ठभूमि

    7 अगस्त: राहुल गांधी ने कर्नाटक के महादेवपुरा सीट पर 1 लाख से अधिक वोट चोरी और एक महिला के दो बार वोट डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के चुनाव में भी संदिग्ध तरीके से नतीजे बदले गए और मशीन रीडेबल वोटर लिस्ट नहीं दी गई।

    8 अगस्त: चुनाव आयोग ने राहुल को कहा कि अपने दावे को सही मानते हैं तो हलफनामे पर हस्ताक्षर करें, वरना माफी मांगें।

    10 अगस्त: कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी ने राहुल के दस्तावेजों को रिकॉर्ड से मेल नहीं खाने की बात कही।

    12 अगस्त: राहुल ने कहा कि अब उनके पास सबूत हैं और EC को इसे लागू करना चाहिए। उन्होंने ‘पिक्चर अभी बाकी है’ वाला बयान भी दिया।

    बिहार SIR अभियान- क्या है मामला

    • 24 जून 2025 को बिहार में वोटर लिस्ट अपडेट करने और अवैध वोटरों को हटाने के लिए SIR (Special Intensive Revision) की घोषणा हुई।
    • यह 25 जून से 26 जुलाई के बीच चलना था।
    • उद्देश्य: विदेशी नागरिकों, मृत व्यक्तियों, या स्थानांतरित लोगों के नाम हटाना।
    • कुल वोटर: 7.80 करोड़, जिनमें से 4.96 करोड़ को दस्तावेज देने की जरूरत नहीं, जबकि 2.93 करोड़ का वेरिफिकेशन जरूरी।

    विपक्ष की आपत्तियां

    • कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के नाम पर वैध मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटाए जा रहे हैं।
    • संसद से लेकर सड़क तक विरोध हो रहा है।
    • सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई भी शुरू हो चुकी है।
    • विपक्ष का कहना है कि यह सरकार और EC की मिलीभगत से मताधिकार पर हमला है।

    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

    13 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिहार की SIR प्रक्रिया में अनुच्छेद 324 (EC की शक्तियां) और अनुच्छेद 326 (वयस्क मताधिकार) के बीच टकराव का मुद्दा सामने आया है। अदालत का कहना था कि यह सिर्फ तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि नागरिक के संवैधानिक अधिकार से जुड़ा मामला है।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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