Manisha Dhanwani
11 Jan 2026
सोमनाथ/राजकोट। गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में रविवार को आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को इतिहास, आस्था और आत्मगौरव से जोड़ने वाला सशक्त संदेश दिया। 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम को पीएम मोदी ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि, हजार साल पहले आक्रांताओं को लगा था कि उन्होंने भारत की आस्था को नष्ट कर दिया, लेकिन आज भी सोमनाथ मंदिर पर लहराती ध्वजा भारत की सनातन शक्ति का प्रतीक है।
पीएम मोदी ने न सिर्फ सोमनाथ के गौरवशाली इतिहास को याद किया, बल्कि देश को आज भी बांटने वाली ताकतों से सावधान रहने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम सोमनाथ पहुंचे। रविवार सुबह उन्होंने लगभग 30 मिनट तक विधिवत पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया, पंचामृत से अभिषेक किया और बेलपत्र, फूल व दूध अर्पित किए। पूजा के समय उन्होंने मंत्रोच्चार किया और मंदिर के पुजारियों से आशीर्वाद प्राप्त किया।
पूजा-अर्चना के बाद प्रधानमंत्री मोदी 108 अश्वों के साथ निकाली गई शौर्य यात्रा में शामिल हुए। यह भव्य शौर्य यात्रा उन वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया।
शौर्य यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने वीर हमीरजी गोहिल की प्रतिमा को नमन किया। वीर हमीरजी गोहिल 14वीं सदी में सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए दिल्ली सल्तनत के सुल्तान जफर खान से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।
शौर्य यात्रा के बाद पीएम मोदी ने सद्भावना मैदान में विशाल जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि, मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में मुझे इस स्वाभिमान पर्व में सेवा का अवसर मिला। यह समय, यह वातावरण और यह उत्सव अद्भुत है। पीएम ने समुद्र की लहरों, सूर्य की किरणों, मंत्रों की गूंज और भक्तों की उपस्थिति को अविस्मरणीय अनुभव बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, जब मैं आज आपसे बात कर रहा हूं, तो मन में बार-बार प्रश्न उठता है कि ठीक 1000 साल पहले इसी स्थान पर क्या माहौल रहा होगा। हमारे पुरखों ने अपनी आस्था और विश्वास के लिए जान की बाजी लगा दी थी।
उन्होंने कहा कि, आक्रमणकारी यह सोचकर गए कि उन्होंने भारत की आत्मा को तोड़ दिया, लेकिन वे नहीं जानते थे कि सोमनाथ अमर है।
पीएम मोदी ने कहा, गजनी से लेकर औरंगजेब तक, जिन्होंने भी सोमनाथ को तोड़ने की कोशिश की, वे इतिहास के पन्नों में दफन हो गए। लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी सागर तट पर उसी गौरव से खड़ा है। उन्होंने कहा कि ,सोमनाथ का इतिहास पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है।
प्रधानमंत्री ने आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का जिक्र करते हुए कहा, जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की शपथ ली, तब भी उन्हें रोकने की कोशिश की गई। यहां तक कि राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मंदिर आने का भी विरोध हुआ। पीएम मोदी ने इसे गुलामी की मानसिकता का उदाहरण बताया।
प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि, आज तलवारों की जगह दूसरे तरीकों से भारत को कमजोर करने के प्रयास हो रहे हैं। इसलिए हमें आज भी सावधान और एकजुट रहना होगा। उन्होंने कहा कि, जब देश अपनी आस्था से जुड़ा रहता है, तब उसकी सभ्यता की जड़ें मजबूत रहती हैं।
पीएम मोदी ने स्वाभिमान पर्व की भव्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि, यह आयोजन अभूतपूर्व और अलौकिक अनुभूति से भरा हुआ है। उन्होंने बताया कि, 72 घंटे तक अनवरत ओंकार नाद और मंत्रोच्चार किया गया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। इस अवसर पर 1000 ड्रोन के माध्यम से सोमनाथ की 1000 वर्षों की गौरवशाली गाथा का भव्य प्रदर्शन किया गया, जिसने इतिहास और आस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ा। साथ ही वैदिक गुरुकुलों के 1000 विद्यार्थियों की सहभागिता ने इस पर्व को और अधिक पवित्र और दिव्य बना दिया। पीएम मोदी ने कहा कि ऐसी अनुभूति को शब्दों में बांधना संभव नहीं है, इसे केवल महसूस किया जा सकता है।
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विशेषता |
विवरण |
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स्थापत्य शैली |
चालुक्य / मरु-गुर्जर |
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ऊंचाई |
155 फीट |
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ध्वजदंड |
11 मीटर (दिन में 3 बार ध्वज परिवर्तन) |
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निर्माण सामग्री |
बलुआ पत्थर |
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लोहे का उपयोग |
नहीं |
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कलश |
1666 स्वर्ण कलश |
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मुख्य कलश वजन |
10 टन |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 से 12 जनवरी तक गुजरात के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। सोमनाथ कार्यक्रम के बाद वे राजकोट जाएंगे, जहां व्यापार मेले और प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे तथा वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन में भाग लेंगे। इसके बाद पीएम मोदी अहमदाबाद पहुंचकर मेट्रो फेज-2 के अंतिम खंड का उद्घाटन करेंगे, जिससे शहर की शहरी परिवहन व्यवस्था को नई गति मिलेगी। अपने दौरे के दौरान वे साबरमती आश्रम जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे और साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित काइट फेस्टिवल में भी शामिल होंगे। यह दौरा धार्मिक, आर्थिक और विकासात्मक दृष्टि से गुजरात के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।