6 साल बाद मिले ट्रंप-जिनपिंग :साउथ कोरिया में 100 मिनट तक चली बैठक, ट्रेड डील से लेकर ताइवान और यूक्रेन पर हुई चर्चा

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साउथ कोरिया में 100 मिनट तक चली बैठक, ट्रेड डील से लेकर ताइवान और यूक्रेन पर हुई चर्चा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    सियोल। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने गुरुवार को दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में मुलाकात की। यह मुलाकात करीब 6 साल बाद हुई, जो लगभग 100 मिनट यानी 1 घंटा 40 मिनट तक चली। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में ट्रेड वॉर, टैरिफ, ताइवान, फेंटेनाइल ड्रग तस्करी, और यूक्रेन-रूस युद्ध जैसे अहम मुद्दे शामिल रहे।

    ट्रंप बोले- मुलाकात बहुत कामयाब होगी

    द्विपक्षीय बातचीत की शुरुआत में ट्रंप ने कहा कि, उन्हें भरोसा है कि यह मुलाकात बहुत सफल साबित होगी। उन्होंने चीनी राष्ट्रपति की तारीफ करते हुए कहा, शी बहुत सख्त वार्ताकार हैं और यह अच्छी बात नहीं है। लेकिन हम एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं। ट्रंप ने इशारा दिया कि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर आज ही हस्ताक्षर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि, अमेरिका चीन के साथ एक बेहतरीन समझौता करने की स्थिति में है।

    शी जिनपिंग ने की ट्रंप की तारीफ

    चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप के संवाद और शांति की कोशिशों की सराहना की। उन्होंने कहा कि, भले ही चीन और अमेरिका के बीच मतभेद हैं, लेकिन सहयोग जारी रहना चाहिए। शी ने कहा कि, बड़ी शक्तियों के बीच मतभेद होना सामान्य बात है। लेकिन हमें सहयोग और साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि, चीन का विकास ट्रंप की 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' की सोच के साथ चलता है।

    एयरपोर्ट पर क्यों हुई मुलाकात?

    ट्रंप और शी जिनपिंग की यह मुलाकात साउथ कोरिया के बुसान शहर के गिम्हे इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह लोकेशन दोनों नेताओं के शेड्यूल और सुरक्षा कारणों से चुनी गई थी। दरअसल, ट्रंप पहले दिन ही एशिया से लौटने वाले थे, लेकिन मीटिंग को जल्दबाजी में करने की बजाय इसे अगले दिन सुबह रखा गया ताकि समय और सुरक्षा दोनों का संतुलन बना रहे।

    चीनी शेयर बाजार में उछाल

    ट्रंप-शी की बातचीत शुरू होते ही चीन के शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिली। शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.2% बढ़कर 4,025.70 पर पहुंच गया, जो 2015 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी 0.6% चढ़ा। विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों को उम्मीद है कि इस मीटिंग से ट्रेड वॉर में राहत मिलेगी और नए व्यापारिक समझौते का रास्ता खुलेगा।

    ट्रेड वॉर कम करने की कोशिश

    2019 के बाद यह पहली बार है जब दोनों नेता आमने-सामने बैठे। पिछले कुछ महीनों से अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड टैरिफ को लेकर तनाव बना हुआ था। अमेरिका ने फरवरी 2025 में 10% टैरिफ लगाया था, जो अप्रैल तक बढ़कर 145% तक पहुंच गया। फिलहाल चीन पर 30% टैरिफ लागू है। ट्रंप का कहना है कि, यह कदम अमेरिकी कंपनियों को मजबूत बनाने के लिए है, लेकिन आलोचकों के मुताबिक इससे महंगाई और बेरोजगारी बढ़ी है।

    ट्रंप का फोकस- रेयर अर्थ मेटल्स और सोयाबीन डील

    इस मुलाकात में ट्रंप ने अमेरिकी सोयाबीन की बिक्री बढ़ाने और चीन से आने वाले रेयर मिनरल्स पर लगे प्रतिबंध हटाने पर बातचीत की। अमेरिका अपने रक्षा उद्योग के लिए इन खनिजों पर निर्भर है। चीन दुनिया के 90% से अधिक रेयर अर्थ मटेरियल्स को रिफाइन करता है। इनसे मिसाइल, फाइटर जेट, टैंक और इलेक्ट्रिक वाहनों के मैग्नेट बनते हैं। चीन ने हाल ही में 12 रेयर मेटल्स के निर्यात पर रोक लगाई थी, जिससे अमेरिका और यूरोप चिंतित हैं।

    यूक्रेन जंग रोकने में चीन की भूमिका

    ट्रंप ने बैठक के दौरान शी जिनपिंग से रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने में सहयोग मांगा। हाल ही में अमेरिका ने रूसी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे, जिसका चीन ने विरोध किया था। ट्रंप ने कहा कि, मैं चाहता हूं कि शी जिनपिंग इस युद्ध को खत्म करने में भूमिका निभाएं। चीन की स्थिति रूस पर असर डाल सकती है।

    बातचीत में ताइवान का मुद्दा भी शामिल रहा। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान को हथियार सपोर्ट देता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पहले ही साफ किया था कि, ताइवान को छोड़ना व्यापार समझौते का हिस्सा नहीं होगा।

    अमेरिकी बाजार पर असर

    जब ट्रंप ने चीन से आने वाले सामानों पर 100% टैक्स लगाने का ऐलान किया था, तो अमेरिकी शेयर बाजार में अप्रैल के बाद सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल से अब तक 42,000 अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियां गई हैं। ट्रंप का दावा है कि, यह कदम अमेरिका को आत्मनिर्भर बनाएगा, जबकि विपक्ष इसे आर्थिक जोखिम बता रहा है।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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