Manisha Dhanwani
11 Jan 2026
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ और बादल फटने की घटना ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस आपदा ने न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि दूर-दराज से आए पर्यटकों को भी अपने चपेट में ले लिया। इन्हीं में शामिल थे महाराष्ट्र के 24 दोस्त, जो 35 साल बाद मिलने के लिए एक साथ उत्तराखंड आए थे। लेकिन किस्मत ने ऐसा खेल खेला कि यह रियूनियन उनकी जिंदगी का आखिरी मिलन बन गया।
महाराष्ट्र के पुणे से लगभग 60 किलोमीटर दूर मंचर के आवासी खुर्द गांव के एक स्कूल में 1990 में 10वीं कक्षा में साथ पढ़े 24 सहपाठी, वर्षों बाद एक रियूनियन के लिए मिले। इन सभी ने चारधाम यात्रा का कार्यक्रम बनाया और 1 अगस्त को मुंबई से रवाना हुए। योजना के अनुसार, 12 अगस्त को उनकी वापसी थी, लेकिन 6 अगस्त को उत्तरकाशी के धराली में बादल फटने से आई बाढ़ ने उनका सब कुछ बदल दिया।
अशोक भोर इस समूह के प्रमुख आयोजक थे, उनके बेटे आदित्य ने बताया कि आखिरी बार सोमवार शाम 7 बजे के आसपास बात हुई थी। उस वक्त वे गंगोत्री से 10 किलोमीटर दूर मामूली भूस्खलन के कारण रुके हुए थे। उसके बाद से उनका फोन बंद है और कोई संपर्क नहीं हो पाया।
समूह के एक और बैचमेट मल्हारी अभंग ने बताया कि सोमवार दोपहर आखिरी बार वीडियो कॉल पर बात हुई थी। सभी दोस्त बेहद उत्साहित थे और यात्रा से जुड़े फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर रहे थे। 5 अगस्त को वे उत्तरकाशी में रुके थे और अगले दिन गौरीकुंड जाने की योजना थी। हरिद्वार से बस बुक करने के बाद, अचानक मौसम बिगड़ा और उसके बाद से संपर्क टूट गया।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, उत्तराखंड में महाराष्ट्र के कम से कम 149 पर्यटक फंसे हुए हैं। इनमें से 76 मुंबई, 17 छत्रपति संभाजीनगर, 15 पुणे, 13 जलगांव, 11 नांदेड़, पांच ठाणे, नासिक और सोलापुर से चार-चार, मालेगांव से तीन और अहिल्यानगर से एक पर्यटक शामिल हैं। लगभग 61 पर्यटक सुरक्षित हैं और हनुमान आश्रम में ठहरे हुए हैं, जबकि 75 लोगों से अब भी संपर्क नहीं हो पा रहा।
जलगांव के कलेक्टर आयुष प्रसाद ने बताया कि जिले के 19 लोग उत्तरकाशी में थे, जिनमें से तीन से संपर्क हो चुका है, लेकिन 16 अब भी लापता हैं। प्रशासन लगातार उत्तराखंड सरकार के साथ समन्वय कर रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने भी आपदा में फंसे लोगों को ढूंढने के लिए सभी संसाधन जुटाए हैं।
राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) के महानिरीक्षक अरुण मोहन जोशी ने बताया कि बचाव दलों की प्राथमिकता लापता लोगों को ढूंढना और फंसे हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालना है। धराली में 50-60 फुट ऊंचा मलबे का ढेर जमा है, जिसके नीचे लापता लोगों के दबे होने की आशंका है। उन्नत उपकरणों को हवाई मार्ग से मौके पर पहुंचाया जा रहा है, ताकि मलबे में फंसे लोगों की तलाश तेजी से हो सके।