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तांबे की बोतल में पानी पीना कितना सही? जानें फायदे, सही तरीका और जरूरी सावधानियां

तांबे के बर्तन में पानी रखना भारतीय घरों की पुरानी परंपरा है। आज भी कई लोग इसे रोज की आदत मानते हैं। माना जाता है कि तांबे के संपर्क में रहने से पानी में थोड़ी मात्रा में कॉपर आ सकता है और इसमें कुछ जीवाणुरोधी असर भी हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि तांबे का पानी हर बीमारी का इलाज है। सही मात्रा और सही तरीके से इस्तेमाल करना सबसे जरूरी है।
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तांबे की बोतल में पानी पीना कितना सही? जानें फायदे, सही तरीका और जरूरी सावधानियां
तांबे की बोतल में पानी

तांबे की बोतल में पानी रखना आज फिर लोगों के बीच चर्चा में है। कई घरों में रातभर पानी तांबे के बर्तन में रखकर सुबह पीने की परंपरा अब भी जारी है। तांबा शरीर के लिए जरूरी खनिज है और यह ऊर्जा बनाने, रक्त वाहिकाओं, तंत्रिका तंत्र और प्रतिरक्षा से जुड़े कई कामों में भूमिका निभाता है। हालांकि शरीर को इसकी बहुत कम मात्रा चाहिए। तांबे के बर्तन में पानी रखने से कुछ कॉपर पानी में आ सकता है लेकिन इससे कई बड़े स्वास्थ्य फायदे मिलते हैं, ऐसे दावों के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। इसलिए इसे सामान्य पानी का विकल्प नहीं बल्कि सीमित मात्रा में अपनाई जाने वाली आदत समझना बेहतर है।

तांबे के पानी में क्या खास है?

तांबे की सबसे अच्छी तरह पहचानी गई खूबियों में उसका जीवाणुरोधी असर शामिल है। कुछ परिस्थितियों में तांबे की सतह पानी में मौजूद कुछ बैक्टीरिया को कम करने में मदद कर सकती है। लेकिन पानी को केवल तांबे की बोतल में रखने से वह हर तरह के प्रदूषण से सुरक्षित नहीं हो जाता। WHO भी सुरक्षित पेयजल को प्राथमिक जरूरत मानता है।

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शरीर को कॉपर क्यों चाहिए?

कॉपर शरीर के लिए जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व है। यह ऊर्जा उत्पादन, संयोजी ऊतकों, रक्त वाहिकाओं, तंत्रिका तंत्र और प्रतिरक्षा तंत्र के सामान्य काम में मदद करता है। वयस्कों के लिए इसकी रोज की अनुशंसित मात्रा करीब 900 माइक्रोग्राम है। इसकी जरूरत आमतौर पर भोजन से पूरी हो सकती है।

पानी रखने का आसान तरीका क्या है?

अगर आप तांबे की बोतल इस्तेमाल करना चाहते हैं तो उसमें सामान्य साफ पानी भरें और कुछ घंटों के लिए रख सकते हैं। रातभर रखा पानी सुबह पीना एक आम तरीका है, लेकिन 6 या 8 घंटे को किसी तय चिकित्सकीय नियम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पानी की गुणवत्ता, बर्तन और इस्तेमाल की स्थिति के अनुसार कॉपर की मात्रा बदल सकती है।

कितना पानी पीना ठीक है?

तांबे की बोतल से दिनभर का पूरा पानी पीने की जरूरत नहीं है। कॉपर की मात्रा का अंदाजा लगाए बिना “दो-तीन बोतल रोज” जैसी तय सलाह देना सही नहीं है। WHO ने पीने के पानी में कॉपर की गाइडलाइन वैल्यू 2 mg/L रखी है और अधिक कॉपर से पेट संबंधी परेशानी हो सकती है। इसलिए सामान्य पानी को अपनी मुख्य जलयोजन जरूरत के लिए रखें और तांबे के पानी का इस्तेमाल सीमित रखें।

गर्म पानी या नींबू पानी डालना सही है?

तांबे की बोतल में उबलता या बहुत गर्म पानी डालने से बचना बेहतर है। खासकर नींबू पानी, सिरका, जूस या दूसरे अम्लीय पेय इसमें स्टोर नहीं करने चाहिए, क्योंकि अम्लीय चीजों के संपर्क में धातु से कॉपर निकलने की संभावना बढ़ सकती है। तांबे की बोतल में सामान्य पानी रखना सबसे आसान और सुरक्षित विकल्प है।

सफाई में भी रखें खास ध्यान

बोतल को नियमित रूप से साफ और पूरी तरह सूखा रखना जरूरी है। तेज रगड़, कठोर रसायन या ऐसी सफाई विधि से बचें जिससे सतह खराब हो। अगर बोतल के अंदर कोटिंग है तो निर्माता के निर्देश जरूर देखें। इस्तेमाल से पहले यह भी जांच लें कि बोतल वास्तव में पीने के पानी के लिए बनी है।

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किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?

जिन लोगों को कॉपर से जुड़ी कोई स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें डॉक्टर से सलाह लेकर ही इसका नियमित इस्तेमाल करना चाहिए। शरीर में कॉपर की अधिक मात्रा नुकसान पहुंचा सकती है और पेट की परेशानी जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसलिए तांबे के पानी को किसी बीमारी का इलाज समझना सही नहीं है।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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