भोपाल मास्टर प्लान-2047 पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं, कारोबार से पर्यावरण तक हितधारकों ने रखी अपनी बात

भोपाल। करीब 21 साल के लंबे इंतजार के बाद भोपाल विकास योजना-2047 का प्रारूप जारी होने के साथ ही राजधानी के विकास को लेकर बहस तेज हो गई है। नए मास्टर प्लान में शहर के विस्तार, ग्रोथ कॉरिडोर, मिश्रित भूमि उपयोग, हरित क्षेत्र, आवास, कारोबार, परिवहन और नए रोजगार केंद्रों से जुड़े कई प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। ड्राफ्ट अब आम लोगों, कारोबारियों और अन्य हितधारकों के सुझाव और आपत्तियों के लिए उपलब्ध होगा।
इस बार मास्टर प्लान की प्रक्रिया इसलिए भी अहम है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को ड्राफ्ट प्रकाशित करने और उस पर दावे-आपत्तियां लेने की अनुमति दी है। राज्य सरकार ने अदालत के सामने आश्वासन दिया है कि अंतिम मास्टर प्लान को अधिसूचित करने से पहले उसे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा जाएगा। यानी फिलहाल जो जारी हुआ है वह अंतिम मास्टर प्लान नहीं बल्कि प्रारूप है।
नए प्रारूप को लेकर जहां भाजपा नेताओं और कारोबारी संगठनों ने इसे लंबे समय से अटकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने वाला कदम बताया है वहीं कांग्रेस नेताओं और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसके प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए दावे-आपत्तियां दर्ज कराने की बात कही है।
आलोक शर्मा ने बताया महत्वपूर्ण कदम
भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने भोपाल विकास योजना-2047 का प्रारूप जारी होने का स्वागत किया। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताते हुए कहा कि नए मास्टर प्लान की जरूरत वे विभिन्न मंचों पर लगातार उठाते रहे हैं।
आलोक शर्मा के मुताबिक भोपाल का विकास ऐसा होना चाहिए जिसमें शहर की भविष्य की सीमाएं स्पष्ट हों और अनियोजित विस्तार पर नियंत्रण रहे। उन्होंने व्यापारियों और रहवासियों के हितों की सुरक्षा के साथ बड़े तालाब, छोटे तालाब और अन्य जलस्रोतों, हरित क्षेत्रों तथा प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण पर जोर दिया।
टीएंडसीपी ने बताया महानगरीय विकास की दिशा
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के आयुक्त एवं संचालक कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि नया मास्टर प्लान-2047 भोपाल और आसपास के क्षेत्रों के सुनियोजित विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भोपाल को महानगरीय क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम होगा। मास्टर प्लान में शामिल किए गए गांवों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजना भी इसका हिस्सा है।
दावे-आपत्तियों के लिए मिलेगी प्रक्रिया
भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया कि प्रारूप जारी होने के बाद शासन के निर्देश के अनुसार दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। लोगों को मास्टर प्लान के अलग-अलग प्रावधानों पर अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।
इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की व्यवस्था की जाएगी, ताकि नागरिक अपने सुझाव और आपत्तियां निर्धारित प्रक्रिया के तहत दर्ज करा सकें।
CREDAI ने किया ड्राफ्ट का स्वागत
CREDAI भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने भी मास्टर प्लान के प्रारूप को स्वागत योग्य बताया। उन्होंने कहा कि करीब 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र में 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर का प्रस्ताव महत्वपूर्ण है। यह कॉरिडोर ईकेएआई सिटी, एयरपोर्ट और प्रमुख लॉजिस्टिक व कमर्शियल क्षेत्रों को जोड़ने की योजना का हिस्सा है।
उन्होंने मिश्रित भूमि उपयोग और चौड़ी सड़कों पर एफएआर में अधिक गुंजाइश के प्रस्ताव को भी अहम बताया। उनके मुताबिक हरित क्षेत्र को 16 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने, भानपुर खंती में गोल्फ कोर्स और भौंरी क्षेत्र में एजुकेशन-एआई हब विकसित करने जैसे प्रावधान भी ड्राफ्ट में शामिल हैं। मनोज मीक ने कहा कि CREDAI अंतिम मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएगा।
अरेरा कॉलोनी के रहवासी दावे-आपत्तियां लगाएंगे
मास्टर प्लान को लेकर याचिकाकर्ता और अरेरा कॉलोनी के रहवासी विवेक त्रिपाठी ने कहा कि ड्राफ्ट में किए गए प्रावधानों का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है।
पर्यावरणविद ने उठाया बाघ भ्रमण क्षेत्र का मुद्दा
पर्यावरणविद राशिद नूर ने कहा कि नए ड्राफ्ट में बाघ भ्रमण वाले क्षेत्रों में निर्माण को लेकर प्रावधान किए गए हैं जो महत्वपूर्ण हैं।
हालांकि उन्होंने कहा कि वह पूरे दस्तावेज का अध्ययन कर रहे हैं।
भोपाल चेंबर भी करेगा ड्राफ्ट की समीक्षा
भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष गोविंद गोयल ने कहा कि लंबे समय बाद मास्टर प्लान का प्रारूप सामने आना महत्वपूर्ण है लेकिन व्यापारियों के हितों का वास्तविक आकलन ड्राफ्ट का विस्तार से अध्ययन करने के बाद ही किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि यदि कारोबारियों की जरूरतों और हितों को पर्याप्त जगह नहीं मिली तो भोपाल चेंबर की ओर से आपत्ति दर्ज कराई जाएगी।
BCCI ने बताए व्यापारियों के लिए नए अवसर
BCCI के सचिव अजय देवनानी ने भोपाल विकास योजना-2047 का स्वागत करते हुए कहा कि 1,016.90 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और करीब 45 लाख की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर बनाई गई यह योजना व्यापार और उद्योग के लिए नए अवसर खोल सकती है।
उन्होंने 51 किलोमीटर के ग्रोथ कॉरिडोर, मिश्रित भू-उपयोग, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार तथा लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार मल्टीलेवल पार्किंग, निजी विकासकर्ताओं के माध्यम से सड़क निर्माण और पुनर्विकास जैसे प्रावधान भी कारोबारियों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। देवनानी ने कहा कि BCCI जल्द ही अपने सुझाव BDA को देगा।
कोलार व्यापारी महासंघ ने मुख्यमंत्री का जताया आभार
कोलार व्यापारी महासंघ ने भी मास्टर प्लान की पहल का स्वागत किया। भाजपा भोपाल जिला अध्यक्ष रवीन्द्र यति के नेतृत्व में महासंघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार जताया।
महासंघ के संयोजक हरीश यादव ने कहा कि मास्टर प्लान आने से कोलार क्षेत्र के व्यापारियों के हितों को बेहतर तरीके से जगह मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने व्यवस्थित व्यापार और क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम बताया।
महासंघ के अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे कोलार में सड़क, यातायात, पार्किंग और दूसरी नागरिक सुविधाओं के विस्तार से व्यापारिक गतिविधियों को भी बेहतर आधार मिल सकता है।
उनका कहना है कि योजनाबद्ध विकास से बाजार और ग्राहकों दोनों को फायदा होगा।
व्यापार मंडल ने कनेक्टिविटी और FAR को बताया अहम
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के महासचिव अनुपम अग्रवाल ने कहा कि ग्रोथ कॉरिडोर के जरिए भोपाल को विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम और इंदौर रोड की ओर बेहतर कनेक्टिविटी देने की योजना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने भोपाल विकास योजना-1991 और भोपाल विकास योजना-2005 के बाद सामने आए नए प्रारूप को लंबे अंतराल के बाद आई बड़ी योजना बताया। उनके मुताबिक थोक व्यापार, हाइपरमार्केट, मॉल-मल्टीप्लेक्स और कॉरपोरेट कार्यालयों के लिए अधिक एफएआर के प्रस्ताव से निवेश और रोजगार की गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया दूरदर्शी पहल
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के मध्यप्रदेश चेयर एवं प्राइवेट यूनिवर्सिटीज एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने भी मास्टर प्लान-2047 के प्रारूप का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शहर के विस्तार की योजना नहीं है बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया विकास का विजन है। उनके मुताबिक पर्यावरण संरक्षण, बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार, निवेश, आधुनिक अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं को साथ लेकर चलने की जरूरत है। उन्होंने उद्योग और व्यापार जगत सहित सभी हितधारकों की भागीदारी को अंतिम योजना के लिए जरूरी बताया।
विधायक भगवानदास सबनानी ने कहा- जन अपेक्षाओं के अनुरूप है ड्राफ्ट
भोपाल विधायक भगवानदास सबनानी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जन अपेक्षाओं और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप मास्टर प्लान का प्रारूप जारी किया है।
उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट में शहर की हरियाली, बड़ा तालाब और दूसरे जलस्रोतों के संरक्षण का ध्यान रखा गया है। साथ ही व्यापार-व्यवसाय से जुड़े लोगों और रहवासियों की जरूरतों को भी शामिल करने की कोशिश की गई है।
हेमंत खंडेलवाल ने भी बताया महत्वपूर्ण पहल
मप्र भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि भोपाल के मास्टर प्लान का लंबे समय से इंतजार था।
उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि ड्राफ्ट में व्यापारियों और रहवासियों के हितों के साथ हरियाली और नागरिक सुविधाओं को भी जगह दी गई है।
रामेश्वर शर्मा बोले- पहले अध्ययन करेंगे
विधायक रामेश्वर शर्मा ने मास्टर प्लान का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे समय बाद ड्राफ्ट सामने आया है।
उन्होंने कहा कि प्रारूप का विस्तार से अध्ययन करने के बाद ही वह इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे।
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सरकार पर उठाए सवाल
मध्य भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने ड्राफ्ट को लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह अभी अंतिम मास्टर प्लान नहीं बल्कि प्रारूप है और इसे लेकर आगे लंबी प्रक्रिया होगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और भोपाल की जनता के दबाव के बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि अंतिम रूप देने से पहले सरकार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जाना होगा और इसके बाद दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होगी।
आतिफ अकील ने पुराने भोपाल की अनदेखी का मुद्दा उठाया
उत्तर भोपाल विधायक आतिफ अकील ने कहा कि मास्टर प्लान के लिए लोगों को आंदोलन और सड़कों पर उतरना पड़ा, तब जाकर ड्राफ्ट सामने आया है।
उन्होंने कहा कि अब दावे-आपत्तियां ली जाएंगी और उनकी सुनवाई व निराकरण के बाद ही अंतिम योजना तैयार होगी। आतिफ अकील ने पुराने भोपाल में ट्रैफिक दबाव, सड़क किनारे रहने वाले लोगों, रोजगार और नागरिक सुविधाओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इन क्षेत्रों के लिए अभी और प्रावधान किए जाने की जरूरत है। उन्होंने एफओबी, नई सड़कों और रोजगार के लिए स्थान उपलब्ध कराने जैसे विषयों को भी उठाया।
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एक्टिविस्ट बोले- अभी कई सवाल बाकी
एक्टिविस्ट कमल राठी ने कहा कि 21 साल का इंतजार खत्म होने की दिशा में यह कदम है, लेकिन अभी सिर्फ ड्राफ्ट आया है। उन्होंने कहा कि इसके कई प्रावधानों पर अध्ययन और दावे-आपत्तियों की जरूरत होगी।
उनके मुताबिक अंतिम मास्टर प्लान का स्वरूप जनता की आपत्तियों के निराकरण के बाद ही स्पष्ट होगा।
एक अन्य एक्टिविस्ट पुर्णेंदु शुक्ल ने ड्राफ्ट में प्रस्तावित प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रावधानों के जरिए रहवासी क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को शुल्क के जरिए वैध किए जाने की गुंजाइश बन सकती है।
उन्होंने इस मुद्दे पर आपत्ति दर्ज कराने की बात कही और कहा कि इस मामले में अंतिम नजर सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया पर रहेगी। इन आरोपों पर अंतिम स्थिति दावे-आपत्तियों और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
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2047 के भोपाल का आकार बदलने वाले प्रमुख प्रस्ताव
नए ड्राफ्ट में करीब 1,016.90 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को योजना में शामिल किया गया है और 254 गांवों को प्लानिंग क्षेत्र में जोड़ा गया है। करीब 45 लाख की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखते हुए शहर के विकास का खाका तैयार किया गया है।
योजना के प्रमुख प्रस्तावों में करीब 3,000 हेक्टेयर में 51 किलोमीटर लंबा ग्रोथ कॉरिडोर, मिश्रित भूमि उपयोग, हरित क्षेत्र को करीब 27 प्रतिशत तक बढ़ाना, नई कनेक्टिविटी, ईकेएआई सिटी, एजुकेशन-एआई हब, हरित क्षेत्र के लिए Green TDR, नए आवासीय और वाणिज्यिक विकास क्षेत्र तथा पुराने क्षेत्रों के पुनर्विकास जैसे प्रावधान शामिल हैं।
ड्राफ्ट में रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नियमों को भी स्पष्ट किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के 22 सितंबर के आदेश के मुताबिक मौजूदा व्यावसायिक संपत्तियों की वैधता अभी भी मौजूदा मास्टर प्लान और लागू भवन नियमों के आधार पर जांची जाएगी; नया ड्राफ्ट अपने आप मौजूदा सीलिंग कार्रवाई को खत्म नहीं करता।
अब आगे की प्रक्रिया दावे-आपत्तियों और सुझावों से होकर गुजरेगी। यही चरण तय करेगा कि शनिवार को जारी हुआ प्रारूप अंतिम भोपाल विकास योजना-2047 में किस स्वरूप में बदलेगा। अंतिम योजना को जारी करने से पहले सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखने की शर्त के कारण इस बार भोपाल के मास्टर प्लान की प्रक्रिया पर न्यायिक निगरानी भी बनी रहेगी।




















