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भोपाल मास्टर प्लान 2047 का ड्राफ्ट जारी, जानिए आपके इलाके में क्या-क्या बदल सकता है?

भोपाल Master Plan 2047 का ड्राफ्ट जारी होने के बाद शहर में आवासीय और व्यावसायिक जमीन के इस्तेमाल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
भोपाल मास्टर प्लान 2047 का ड्राफ्ट जारी, जानिए आपके इलाके में क्या-क्या बदल सकता है?

MP सरकार ने भोपाल मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट जारी कर दिया, लेकिन इससे आवासीय इलाकों में चल रही दुकानों को फिलहाल सीलिंग से राहत नहीं मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में साफ किया है कि नए मास्टर प्लान में किसी क्षेत्र का लैंडयूज बदलने का प्रस्ताव आना भर पर्याप्त नहीं होगा। प्लान को अंतिम रूप देने और लागू करने से पहले सुप्रीम कोर्ट की अनुमति जरूरी होगी। ऐसे में ड्राफ्ट जारी होने का मौजूदा सीलिंग कार्रवाई पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा।

चार प्रमुख आधारों पर तैयार हुआ मास्टर प्लान

भोपाल विकास योजना-2047 को मुख्य रूप से चार आधारों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इनमें प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण, आधुनिक और नागरिक हितैषी विकास, शहर में जरूरी बदलावों को बढ़ावा देना और रोजगार व आर्थिक गतिविधियों का विस्तार शामिल है। योजना में भोपाल की प्राकृतिक पहचान को बनाए रखते हुए विकास को आगे बढ़ाने की बात कही गई है। इसमें भोजताल, वन क्षेत्रों, पहाड़ियों, तालाबों और बाघ भ्रमण क्षेत्र जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर दिया गया है। साथ ही नागरिकों के लिए बेहतर सुविधाएं और आसान आवाजाही उपलब्ध कराने की योजना है।

आवासीय इलाकों में सीलिंग का खतरा बरकरार

आवासीय इलाकों में चल रही दुकानों और व्यावसायिक गतिविधियों को फिलहाल सीलिंग से राहत नहीं मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर के आदेश में साफ किया है कि सिर्फ नए मास्टर प्लान में लैंडयूज बदलने का प्रस्ताव आने से मौजूदा कार्रवाई नहीं रुकेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, जब तक नए मास्टर प्लान को अंतिम रूप देकर लागू नहीं किया जाता, तब तक मौजूदा नियमों के आधार पर कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार ने कोर्ट को बताया है कि ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और इसे प्रकाशित कर जनता से दावे-आपत्तियां ली जाएंगी।

हालांकि, कोर्ट की अनुमति के बिना नए प्लान को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा। कोर्ट ने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि जिन इलाकों का उपयोग विशेष रूप से आवासीय क्षेत्र के लिए तय है, वहां व्यावसायिक गतिविधियां न चलें। ऐसे मामलों में नियमों के तहत सीलिंग की कार्रवाई हो सकती है। वहीं, जिन क्षेत्रों का लैंडयूज स्पष्ट रूप से केवल आवासीय या व्यावसायिक तय नहीं है, वहां मिश्रित उपयोग पर विचार किया जा सकता है। ऐसे मामलों में फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने की संभावना है। यानी ड्राफ्ट जारी होने के बावजूद आवासीय क्षेत्रों में चल रही दुकानों को तत्काल राहत नहीं मिली है।

एक ही इलाके में घर और दुकान का प्रस्ताव

नए मास्टर प्लान में मिश्रित भूमि उपयोग यानी एक ही क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति का प्रस्ताव रखा गया है। सड़क की चौड़ाई के आधार पर कुछ क्षेत्रों में घर के साथ दुकान या अन्य कारोबार की अनुमति दी जा सकती है। इसका उद्देश्य लोगों को घर और काम की जगह के बीच लंबी दूरी तय करने से राहत देना और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है। चौड़ी सड़कों के आसपास जमीन के इस्तेमाल के लिए एफएआर और भवन की ऊंचाई से जुड़े नियमों में अधिक छूट का प्रस्ताव भी रखा गया है।

हरित क्षेत्र 16 से बढ़कर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव

भोपाल की पहचान उसकी हरियाली और प्राकृतिक वातावरण से भी जुड़ी है। प्रस्तावित विकास योजना में हरित क्षेत्र को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। मौजूदा 2005 की योजना में करीब 16 प्रतिशत हरित क्षेत्र बताया गया है, जबकि नई विकास योजना में इसे बढ़ाकर करीब 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। कॉलोनी स्तर पर खुले क्षेत्रों का हिस्सा भी 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने की योजना है। भोजताल और उसके जलग्रहण क्षेत्र, पहाड़ियों, जंगल, तालाबों, जलाशयों और बाघ भ्रमण क्षेत्रों को संरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। भानपुर खंती के पुनर्विकास के तहत यहां गोल्फ कोर्स का प्रस्ताव भी शामिल है।

डिजिटल ट्विन सिटी से होगी निगरानी

शहर में होने वाले निर्माण और विकास कार्यों की निगरानी के लिए डिजिटल ट्विन सिटी व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है। इसका उद्देश्य शहर की गतिविधियों पर डिजिटल माध्यम से नजर रखना और शहरी समस्याओं की पहचान करना है। इसके जरिए अवैध निर्माण, यातायात और दूसरी समस्याओं पर समय रहते कार्रवाई करने की व्यवस्था विकसित करने की योजना है। सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्थानों पर लगे निजी सीसीटीवी कैमरों की नेटवर्किंग और सार्वजनिक भवनों की बाउंड्री वॉल को पारदर्शी रखने जैसे प्रावधान भी प्रस्तावित हैं।

पार्किंग की समस्या से निपटने की तैयारी

भोपाल में बढ़ते वाहनों के साथ पार्किंग भी बड़ी चुनौती बनती जा रही है। प्रस्तावित योजना में मल्टीलेवल और मैकेनाइज्ड पार्किंग को बढ़ावा देने की बात कही गई है। सामुदायिक खुले क्षेत्रों के नीचे, आरओबी और फ्लाईओवर के नीचे भी पार्किंग विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा बेसमेंट पार्किंग के लिए जमीन के संयुक्त उपयोग की अनुमति देने की बात कही गई है।

भौंरी में बनेगी एजुकेशन और AI सिटी

भोपाल के भौंरी क्षेत्र को शिक्षा और नई तकनीक से जोड़ने की योजना है। यहां एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी EKAI सिटी विकसित करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य शिक्षा, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े संस्थानों और गतिविधियों को एक साथ बढ़ावा देना है। इससे भोपाल में शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र के विकास के लिए नए अवसर तैयार करने की योजना है।

51 किलोमीटर लंबा होगा ग्रोथ कॉरिडोर

मास्टर प्लान की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर का प्रस्ताव है। इसके लिए करीब 3,000 हेक्टेयर जमीन प्रस्तावित की गई है। यह कॉरिडोर EKAI सिटी, एयरपोर्ट, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक और थोक व्यापार क्षेत्र सहित शहर के अलग-अलग उपनगरों को जोड़ने की परिकल्पना करता है। ग्रोथ कॉरिडोर में होटल, स्वास्थ्य सेवाएं, आईटी, एआई और डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक, थोक व्यापार, हाइपरमार्केट, मॉल, मल्टीप्लेक्स, कॉरपोरेट ऑफिस, एजुकेशन हब और आवास जैसी गतिविधियों के विकास का प्रस्ताव है।

BRTS से MRTS तक विस्तार की योजना

ग्रोथ कॉरिडोर में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए बीआरटीएस कॉरिडोर का प्रस्ताव है, जिसे भविष्य में एमआरटीएस में बदले जाने की संभावना रखी गई है। इसके साथ विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम और इंदौर की ओर जाने वाले मार्गों को भी ग्रोथ कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है। इससे भोपाल को आसपास के क्षेत्रों से बेहतर तरीके से जोड़ने और भविष्य के विस्तार को व्यवस्थित करने का लक्ष्य रखा गया है।

अब जनता दे सकेगी सुझाव और आपत्तियां

भोपाल विकास योजना-2047 अभी प्रारूप के स्तर पर है। अब नागरिक इसके प्रस्तावों को देखकर अपनी आपत्तियां और सुझाव प्रशासन के सामने रख सकेंगे। यानी शहर के भविष्य के विकास से जुड़े कई प्रावधानों पर लोगों की प्रतिक्रिया भी प्रक्रिया का हिस्सा होगी।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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