देर रात खाना बन रहा है साइलेंट किलर!हेल्दी रहने के लिए डिनर टाइम तय करना जरूरी

आज के समय में लोग फिट रहने के लिए जिम जाते हैं, डाइटिंग करते हैं और हेल्दी फूड पर ध्यान देते हैं। लेकिन सेहत के लिए सिर्फ खाना ही नहीं, खाने का समय भी उतना ही जरूरी होता है। अब डॉक्टर और वैज्ञानिक भी मानने लगे हैं कि रात का खाना कितनी देर से खाते हैं, इसका सीधा असर शरीर पर पड़ता है।
भारत की परंपरा में जल्दी खाने की आदत
प्राचीन भारत में लोग सूर्यास्त से पहले ही भोजन कर लेते थे। इसके पीछे कई कारण थे- प्राकृतिक जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) के साथ तालमेल, बेहतर पाचन व्यवस्था और उस समय बिजली व रोशनी की सुविधा न होना। आयुर्वेद के अनुसार सूर्यास्त के बाद पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है, जिससे खाना पचाना कठिन हो जाता है।
देर रात खाना क्यों बनता है सेहत की समस्या?
देर से खाना खाने का असर सीधे शरीर पर पड़ता है। इससे फैट बर्निंग की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इंसुलिन की कार्यक्षमता कम हो जाती है। नींद से जुड़े हार्मोन प्रभावित होते हैं। पाचन तंत्र कमजोर पड़ने लगता है। रात में देर से खाने पर शरीर सोते समय भी भोजन पचाने में लगा रहता है, जिससे सुबह उठने पर भारीपन, पेट फूलना और थकान महसूस होती है।
सही समय पर खाना क्यों जरूरी है
शोध बताते हैं कि जल्दी रात का खाना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। इससे इंसुलिन संवेदनशीलता बेहतर होती है। ब्लड शुगर नियंत्रण में रहती है। नींद की गुणवत्ता सुधरती है। वजन बढ़ने का खतरा कम होता है। सूर्यास्त के बाद शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन बढ़ता है, जो नींद लाने में मदद करता है। इसी समय इंसुलिन का स्राव कम हो जाता है। अगर इस समय खाना खाया जाए, तो फैट जमा होने का खतरा बढ़ जाता है और नींद भी खराब होती है।
सिर्फ 2 घंटे की देरी भी नुकसानदायक
खाने के समय में थोड़ा सा अंतर भी बड़ा असर डाल सकता है। अगर आप शाम 7 बजे खाना खाते हैं, तो नींद बेहतर आती है और शुगर लेवल संतुलित रहता है। लेकिन अगर वही खाना रात 9:30 बजे खाते हैं, तो शुगर तेजी से बढ़ सकती है। डायबिटीज और फैटी लिवर से पीड़ित लोगों के लिए देर रात खाना और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है।











