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हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत महत्व माना जाता है। हर महीने दो एकादशी आती हैं। माघ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। इस व्रत को करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और भाग्य का साथ मिलता है।
माघ महीना भगवान कृष्ण को बहुत प्रिय माना जाता है, इसलिए इस महीने की एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन गंगा स्नान, भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
पंचांग के अनुसार-
जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी को रखा जाएगा
एकादशी तिथि शुरू: 28 जनवरी शाम 4:35 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 29 जनवरी दोपहर 1:55 बजे
पारण (व्रत खोलना) 30 जनवरी को किया जाएगा
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के दिन किया जाता है। मान्यता है कि अगर समय पर पारण न किया जाए, तो दोष लगता है।
पारण का शुभ समय (30 जनवरी 2026)
सुबह 7:10 बजे से 9:20 बजे तक
द्वादशी तिथि समाप्त: सुबह 11:09 बजे
ब्रह्म मुहूर्त - 05:25 ए एम से 06:18 ए एम
प्रातः सन्ध्या - 05:52 ए एम से 07:11 ए एम
अभिजित मुहूर्त - 12:13 पी एम से 12:56 पी एम
विजय मुहूर्त - 02:22 पी एम से 03:05 पी एम
गोधूलि मुहूर्त - 05:55 पी एम से 06:22 पी एम
सायाह्न सन्ध्या - 05:58 पी एम से 07:17 पी एम
अमृत काल - 09:26 पी एम से 10:54 पी एम
निशिता मुहूर्त - 12:08 ए एम, जनवरी 30 से 01:01 ए एम, 30 जनवरी
रवि योग - 07:11 ए एम से 07:31 ए एम
जया एकादशी पितरों की शांति और मुक्ति के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। मान्यता है कि अगर पितर अशांत होते हैं, तो परिवार में बार-बार बीमारी, काम में रुकावट, धन संकट, असफलता जैसी समस्याएं आती हैं। जया एकादशी का व्रत करने से पितरों को मुक्ति मिलती है और परिवार को कष्टों से राहत मिलती है।