Manisha Dhanwani
27 Jan 2026
वॉशिंगटन डीसी। भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच होने वाले ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर अमेरिका की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने यूरोपीय देशों पर रूस-यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से फंड करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि, यूरोप भारत से ऐसे रिफाइंड ऑयल प्रोडक्ट्स खरीद रहा है, जो रूसी तेल से बनाए जाते हैं। इस तरह वह उसी युद्ध को फाइनेंस कर रहा है, जिसमें वह खुद शामिल है।
मीडिया को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा, यूरोपीय देश भारत से रिफाइंड ऑयल प्रोडक्ट्स खरीद रहे हैं, जो रूसी तेल से बने हैं। इसका मतलब है कि, वे खुद के खिलाफ चल रही जंग को फंड कर रहे हैं। उन्होंने यह बयान ऐसे समय पर दिया है, जब भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच FTA को लेकर औपचारिक समझौते का ऐलान होने वाला है।
27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में होने वाले 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में इस ऐतिहासिक समझौते की औपचारिक घोषणा होने की संभावना है। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा शामिल होंगे। EU ने इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा है।
करीब 18 साल की लंबी बातचीत के बाद भारत और EU के बीच यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट तैयार हुआ है। इसका उद्देश्य दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार को आसान बनाना, टैरिफ बाधाएं कम करना और नए बाजार खोलना है।
इस समझौते से-
सरल शब्दों में कहें तो यह डील ट्रेड के लिए टोल-फ्री रास्ता बनेगी।
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FTA के तहत कई सेक्टर्स पर खास फोकस किया गया है-
यूरोप को फायदा
भारत को फायदा
इन सेक्टर्स पर EU की ओर से टैरिफ में बड़ी राहत दी जाएगी।
भारत के दबाव पर कृषि और डेयरी उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा गया है। EU भारत के फाइनेंशियल और लीगल सर्विस सेक्टर में ज्यादा पहुंच चाहता है, लेकिन इस पर अभी संतुलन बनाया जा रहा है।
FTA के साथ-साथ भारत और EU के बीच रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, साइबर सिक्योरिटी, आतंकवाद विरोधी सहयोग और सप्लाई चेन सुरक्षा पर भी सहमति बन रही है।
इस समझौते के तहत छात्रों, रिसर्चर्स, सीजनल वर्कर्स और हाई-स्किल प्रोफेशनल्स की आवाजाही को आसान बनाया जाएगा। इससे भारत और यूरोप के बीच शिक्षा, रिसर्च और रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा। टैलेंट मूवमेंट को बढ़ावा मिलेगा और दोनों क्षेत्रों के बीच स्किल, टेक्नोलॉजी और नॉलेज एक्सचेंज को मजबूती मिलेगी, जिससे युवाओं और प्रोफेशनल्स के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए अवसर खुलेंगे।
अमेरिका की नाराजगी के बावजूद भारत-EU FTA को वैश्विक राजनीति में एक बड़े रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यह डील भारत को अमेरिका और चीन के बीच संतुलन बनाने में मदद करेगी और यूरोप को एशिया में मजबूत साझेदार दिलाएगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि, यह समझौता आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यापार संतुलन, ऊर्जा नीति और रणनीतिक गठजोड़ की दिशा बदल सकता है।
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