Naresh Bhagoria
18 Jan 2026
वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज अपने सीधे और गहरे विचारों के लिए जाने जाते हैं। उनकी बातें मन को शांति देती हैं और जीवन को सही रास्ता दिखाती हैं। बड़ी संख्या में भक्त अपनी उलझनों और सवालों के साथ उनके पास आते हैं और महाराज जी उन्हें बहुत आसान भाषा में समझाते हैं।
हाल ही में एक महिला भक्त ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि गलती और पाप में असली अंतर क्या होता है और इन दोनों का प्रायश्चित कैसे किया जाए।
प्रेमानंद महाराज ने बताया कि गलती वह होती है जो अनजाने में या बिना सोचे-समझे हो जाए।
उदाहरण के तौर पर, अगर चलते समय किसी से अनजाने में टक्कर हो जाए, तो वह एक साधारण गलती है, क्योंकि उसमें किसी को नुकसान पहुंचाने की इच्छा नहीं होती।
जब कोई व्यक्ति पूरी समझ और अपनी इच्छा से कोई गलत काम करता है, तो वह पाप कहलाता है।
ऐसा कर्म पाप की श्रेणी में आता है।
गलती: अनजाने में हुई भूल, बिना बुरी नीयत के
पाप: जानबूझकर किया गया गलत काम, जिसमें इच्छा और संकल्प शामिल हो
महाराज जी के अनुसार, नीयत ही सबसे बड़ा फर्क है।
प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि गलती हो या पाप, दोनों का उपाय है।
भगवान का नाम लेने से मन शुद्ध होता है और आत्मा को शांति मिलती है।
महाराज जी के अनुसार, नाम जप + भक्ति + अच्छे कर्म = सच्चा प्रायश्चित
जो व्यक्ति नियमित रूप से भगवान का नाम लेता है और अपने आचरण को बेहतर बनाता है, वही अपने जीवन को पवित्र और सुंदर बना सकता है।