Shivani Gupta
19 Jan 2026
उत्तर प्रदेश में स्थित काशी को महादेव की नगरी कहा जाता है। यहां हर जगह महादेव का वास माना जाता है। इसलिए यह नगर हिंदू धर्म के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
काशी में गंगा नदी के तट पर मणिकर्णिका घाट है, जिसे मोक्षदायिनी घाट या महाश्मशान भी कहा जाता है। कहा जाता है कि यहां हमेशा चिताएं जलती रहती हैं।
यह घाट केवल अंतिम संस्कार का स्थल नहीं है, बल्कि हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति की गहरी आध्यात्मिक पहचान भी है। लोग यहां मनोकामना नहीं, बल्कि शांति, मुक्ति और मोक्ष के लिए आते हैं।
कहा जाता है कि काशी में मृत्यु होना मंगलकारी है। यहां अंतिम संस्कार से आत्मा जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाती है। धर्मग्रंथों में बताया गया है कि काशी में मृत्यु से मोक्ष प्राप्ति होती है।
श्लोक में कहा गया कि मरणं मंगलं यत्र विभूतिश्च विभूषणम्, कौपीनं यत्र कौशेयं सा काशी केन मीयते।
इसका अर्थ है कि काशी में मृत्यु होना शुभ है और यहां प्राण त्यागने से आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है।
मणिकर्णिका घाट की अग्नि कभी नहीं बुझती, इसे अखंड अग्नि भी कहा जाता है। यह अग्नि समय की सीमाओं से परे है और जीवन-मरण के रहस्य को दर्शाती है।
मणिकर्णिका नाम की उत्पत्ति देवी सती (पार्वती) के कान की मणि ‘मणिकर्ण’ से हुई मानी जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां पार्वती का श्राप इस घाट पर है, इसलिए यह हमेशा चिताओं से जलती रहती है।
हाल ही में मणिकर्णिका घाट पर नवीनीकरण और पुनर्विकास के दौरान कुछ मूर्तियों और कलाकृतियों को हटाए जाने की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई।
कुछ वीडियो AI जनरेटेड या फेक बताई जा रही हैं। इस पर सियासी विवाद पैदा हो गया। घटना की जांच अभी जारी है।