ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय, कर्म और अनुशासन का देवता माना जाता है। जब शनि शुभ स्थिति में होते हैं, तो व्यक्ति को मेहनत का फल, सम्मान, स्थिरता और सफलता मिलती है। लेकिन जब शनि अशुभ प्रभाव में होते हैं, तो जीवन में संघर्ष, देरी, तनाव और मानसिक दबाव बढ़ने लगता है। ऐसे समय में लोग शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव को कम करने के उपाय करते हैं। इन उपायों में लोहे का छल्ला (अंगूठी) पहनना सबसे सरल और लोकप्रिय उपाय माना जाता है।
ज्योतिष के अनुसार हर धातु का किसी न किसी ग्रह से संबंध होता है। लोहे को शनि देव की धातु माना जाता है। मान्यता है कि-
हर व्यक्ति के लिए यह जरूरी नहीं होता, लेकिन कुछ विशेष स्थितियों में यह बहुत लाभकारी माना जाता है-
जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, उनके लिए यह सुरक्षा कवच जैसा काम करता है।
अगर काम बनते-बनते बिगड़ जाते हों, मेहनत के बाद भी सफलता न मिल रही हो, तो यह उपयोगी हो सकता है।
मान्यता है कि यह अंगूठी राहु और केतु के अशुभ प्रभाव को भी कम करती है।
ज्योतिष के अनुसार लोहे का छल्ला हमेशा मध्यमा (मिडिल फिंगर) में पहनना चाहिए।
कारण-
सबसे शुभ माना जाता है घोड़े की नाल का लोहा।
शनिवार को सूर्यास्त के बाद पहनना शुभ माना जाता है।
अंगूठी पहनने से पहले कच्चे दूध या गंगाजल से साफ करें। इससे अंगूठी की पवित्रता बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर मानी जाती है।