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भारत ने रूस पर निर्भरता घटाने के लिए अमेरिका से ईरान और वेनेज़ुएला का तेल खरीदने की मांगी अनुमति

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भारत ने रूस पर निर्भरता घटाने के लिए अमेरिका से ईरान और वेनेज़ुएला का तेल खरीदने की मांगी अनुमति

न्यूयार्क/नई दिल्ली। भारत ने एक बार फिर अमेरिका से आग्रह किया है कि यदि वह रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय कटौती करता है, तो उसे प्रतिबंधित देशों ईरान और वेनेज़ुएला से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति दी जाए। भारत का तर्क है कि यदि एक साथ रूस, ईरान और वेनेज़ुएला तीनों बड़े तेल उत्पादक देशों की आपूर्ति बंद कर दी जाती है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ जाएंगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बनेगा। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात में यह बात रखी। भारतीय अधिकारियों ने दोहराया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए विविध स्रोत चाहता है। भारत को रूस से आयात घटाने की शर्त केवल तभी स्वीकार्य होगी, जब वैकल्पिक सस्ते स्रोतों से खरीद की अनुमति दी जाए। अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने इस पर सीधी टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि भारत का रूस से तेल की खरीद अमेरिका के रूस पर वित्तीय दबाव बनाने के प्रयासों को कमजोर करता है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में  सोमवार को अमेरिका गया भारतीय प्रतिनिधिमंडल वापस लौट आया है। 

रूसी तेल की खरीद भारत के लिए लाभ का सौदा

दरअसल, रूस पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद उसने अपने कच्चे तेल की खरीद पर छूट दी थी। इसी कारण भारत जैसे देशों के लिए यह सौदा आकर्षक साबित हुआ। इसी आकर्षण में भारत ने रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी। इससे उसकी आयात लागत काफी कम हुई। आंकड़े बताते हैं कि जुलाई में भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी कच्चा तेल औसतन 68.90 डॉलर प्रति बैरल में खरीदा, जबकि सऊदी अरब से यही कीमत 77.50 डॉलर और अमेरिका से 74.20 डॉलर रही। इस सस्ते रूसी तेल ने भारत के आयात बिल को काफी हद तक नियंत्रित किया है। लेकिन अमेरिका चाहता है कि भारत रूस पर अपनी निर्भरता घटा कर उसके खिलाफ दबाव बढ़ाए। भारत की 90% कच्चे तेल की आवश्यकता आयात से पूरी होती है। ऐसे में सस्ते स्रोतों तक पहुंच सीमित करना सीधे-सीधे देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर असर डालता है।

भारत एकतरफा दबाव के आने के मूड में नहीं

यही कारण है कि भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूयॉर्क में कहा कि आने वाले समय में भारत अपने ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों को प्राप्त करने में अमेरिकी तेल और गैस की बड़ी भूमिका चाहता है। इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि भारत अमेरिका से सहयोग चाहता है लेकिन एकतरफा दबाव को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। ईरान और वेनेज़ुएला से तेल खरीदना भारत के लिए नया नहीं है। भारत ने 2019 तक ईरान से नियमित रूप से कच्चा तेल खरीदा, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आयात रोकना पड़ा। इसी तरह रिलायंस इंडस्ट्रीज ने हाल ही में वेनेज़ुएला से आयात बंद कर दिया, क्योंकि अमेरिका ने प्रतिबंध और कड़े कर दिए हैं। यदि अब अमेरिका इस दिशा में छूट देता है तो भारत फिर से इन स्रोतों का लाभ उठा सकता है और अपनी लागत को नियंत्रित कर सकता है।

खाड़ी देशों या अमेरिका से तेल खरीदना महंगा

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के दबाव में यदि भारत रूस से आयात घटा देता है और साथ ही ईरान-वेनेज़ुएला का रास्ता बंद रहता है, तो उसे खाड़ी देशों से महंगा तेल खरीदना पड़ेगा। इससे न सिर्फ आयात बिल बढ़ेगा बल्कि घरेलू ईंधन की कीमतों में भी उछाल आ सकता है। ऐसे में भारत की मांग वस्तुतः संतुलन बनाने का प्रयास है। एक ओर वह अमेरिका के साथ रणनीतिक सहयोग बनाए रखना चाहता है, तो दूसरी ओर अपनी ऊर्जा सुरक्षा और सस्ती आपूर्ति को भी सुनिश्चित करना चाहता है। तेल बाजार की स्थिति भी आने वाले समय में चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ओपेक प्लस और अन्य उत्पादक देशों के उत्पादन बढ़ाने की संभावना है, जिससे अगले साल तेल की अधिक आपूर्ति हो सकती है और कीमतों पर दबाव बन सकता है। हालांकि, अगर रूस, ईरान और वेनेज़ुएला जैसे बड़े उत्पादकों से आपूर्ति पर एक साथ रोक लगती है, तो कीमतों के तेजी से चढ़ने का खतरा भी उतना ही बढ़ जाएगा।

Aniruddh Singh
By Aniruddh Singh

अनिरुद्ध प्रताप सिंह। नवंबर 2024 से पीपुल्स समाचार में मुख्य उप संपादक के रूप में कार्यरत। दैनिक जाग...Read More

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