Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

गोल्डन रोबोट अवॉर्ड विजेता डॉ. हेमल की इच्छा :बोले- मौका मिला तो बाबा बागेश्वर कैंसर अस्पताल में दूंगा सेवा

छतरपुर में जन्मे पद्मश्री डॉ. अशोक हेमल को न्यूयॉर्क में गोल्डन रोबोट सर्जिकल अवॉर्ड-2025 मिला। वे यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने बताया कि, उन्होंने भारत में पहली यूरोलॉजी रोबोटिक सर्जरी की थी। डॉ. हेमल ने कहा कि, उम्र 66 हो चुकी है, लेकिन वे देश लौटकर कैंसर मरीजों की सेवा करना चाहते हैं और मौका मिलने पर बाबा बागेश्वर कैंसर अस्पताल में सेवाएं देने की इच्छा जताई।
बोले- मौका मिला तो बाबा बागेश्वर कैंसर अस्पताल में दूंगा सेवा
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। मध्यप्रदेश के छतरपुर में जन्मे पदमश्री डॉ. अशोक हेमल का नाम कैंसर इलाज के लिए विश्व स्तर पर जाना जाने लगा है। उन्हें 5 दिसंबर को न्यूयॉर्क में आयोजित विश्व यूरोलॉजी रोबोटिक्स सम्मेलन में गोल्डन रोबोट सर्जिकल अवॉर्ड-2025 प्रदान किया गया है।

    यह पुरस्कार पाने वाले वे पहले भारतीय हैं। इसके पहले उन्हें भारत के राष्ट्रपति पद्मश्री और डॉ. बीसी राय अवॉर्ड दे चुके हैं। अवॉर्ड मिलने के बाद पीपुल्स समाचार ने उनका पहला साक्षात्कार लिया। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश

    सवाल: आपको गोल्डन रोबोट सर्जिकल अवॉर्ड क्यों मिला?

    जवाब: 20 साल तक एम्स दिल्ली में प्रोफेसर था। तब से यूरोलॉजी कैंसर के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। भारत में पहली यूरोलॉजी रोबोटिक्स सर्जरी एम्स, नई दिल्ली में की थी।

    सवाल: अपने इतने बड़े सफर को कम शब्दों में बताएंगे?

    जवाब: जन्म छतरपुर में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा राजनगर हायर सेंकडरी स्कूल में और बीएससी महाराजा कॉलेज छतरपुर से की। इसके बाद जीआर मेडिकल कॉलेज ग्वालियर और पीजीआई चंडीगढ़ में आगे की पढ़ाई की। डॉक्टर बनने के बाद यही लक्ष्य लेकर चला कि अपने जिले, प्रदेश और देश की पहचान विश्व स्तर पर बना सकूं।

    ये भी पढ़ें: धीरेंद्र शास्त्री संग CM डॉ. मोहन यादव ने सड़क पर बैठकर किया भोजन, लाखों भक्त उमड़े

    सवाल: वर्तमान में कहां कार्यरत हैं?

    जवाब: अभी वेक फॉरेस्ट विश्वविद्यालय अमेरिका में डायरेक्टर रोबोटिक सर्जरी के रूप में कार्यरत हूं।

    सवाल: विदेश में ही रहेंगे या अपने देश में आकर कैंसर पीड़ितों का इलाज करेंगे?

    जवाब: 66 वर्ष की उम्र हो गई है। फिलहाल भारत के साथ-साथ अमेरिका में भी कैंसर मरीजों की सेवा कर रहा हूं। लेकिन, पूरा निश्चय है कि अपने वतन वापस आऊंगा और कैंसर रोगियों के निदान और उपचार के लिए देश भर में काम करुंगा।

    सवाल: आपके जिले के लोंगों को बहुत उम्मीदें हैं, उनके लिए क्या करेंगे?

    जवाब: अगर भविष्य में मौका मिला तो बाबा बागेश्वर कैंसर अस्पताल में सेवाएं दूंगा। इसके पहले छतरपुर में स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया। मेरा छोटा भाई डॉ. आलोक हेमल निदेशक और बाल रोग विभाग के प्रोफेसर, डॉ. आरएमएल अस्पताल, नई दिल्ली में बाल चिकित्सा कैंसर विशेषज्ञ है। वे भी भविष्य में छतरपुर स्थित बाबा बागेश्वर कैंसर अस्पताल में अपनी सेवाएं देंगे।

    ये भी पढ़ें: पीएम मोदी ने बागेश्वर धाम में की पूजा, कैंसर अस्पताल का किया भूमिपूजन, विपक्ष पर साधा निशाना, बोले- कुछ नेता हमारी परंपरा को दे रहे गाली

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...

    Latest Posts