Naresh Bhagoria
27 Jan 2026
मुंबई से सटे ठाणे जिले के मीरा-भायंदर इलाके में बना एक डबल डेकर फ्लाईओवर इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। वजह है इसका अनोखा और चौंकाने वाला डिजाइन, जिसे देखकर लोग हैरान हैं। फ्लाईओवर का वीडियो वायरल होते ही यूजर्स ने इसे इंजीनियरिंग का अजीब नमूना बताते हुए जमकर मजाक उड़ाया है, वहीं कई लोग इसे सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बता रहे हैं।
इस फ्लाईओवर की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरी तरह एक जैसा नहीं है। आधा फ्लाईओवर चार लेन का है, जबकि आगे जाकर यह अचानक दो लेन में बदल जाता है। बीच फ्लाईओवर में ही दो लेन खत्म हो जाती हैं और आगे सिर्फ बीच की दो लेन ही बनी हैं।

दूर से देखने पर यह फ्लाईओवर क्रिकेट के बैट जैसा नजर आता है नीचे चौड़ा और ऊपर पतला। यही वजह है कि लोग इसके डिजाइन पर सवाल उठा रहे हैं।
इस फ्लाईओवर को देखकर कुछ महीने पहले भोपाल में सामने आया 90 डिग्री मोड़ वाला पुल याद आ गया। उस पुल की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई थीं और देशभर में उसकी इंजीनियरिंग को लेकर बहस छिड़ गई थी। मीम्स बने, आलोचना हुई और डिजाइन पर सवाल उठे। अब मीरा-भायंदर का यह फ्लाईओवर भी उसी तरह चर्चा में आ गया है।
इस फ्लाईओवर का वीडियो एक सोशल मीडिया पेज ने एक्स पर शेयर किया है। वीडियो वायरल होते ही लोगों के कमेंट्स की बाढ़ आ गई। कुछ ने इसे मजाकिया अंदाज में इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया, तो कुछ ने जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों पर घटिया प्लानिंग के आरोप लगाए।
सबसे बड़ी चिंता सड़क सुरक्षा को लेकर है। लोगों का कहना है कि अगर कोई वाहन चार लेन पर तेज रफ्तार में आ रहा हो और अचानक सड़क दो लेन में बदल जाए, तो एक्सीडेंट का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। कई लोगों का मानना है कि अगर सड़क को संकरा करना ही था, तो इसे धीरे-धीरे टेपरिंग डिजाइन में बनाया जाना चाहिए था, ताकि ड्राइवरों को समय मिल सके।
इस पूरे विवाद के बीच अब मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) ने अपनी सफाई दी है। MMRDA का कहना है कि यह फ्लाईओवर अचानक पतला नहीं होता, बल्कि यह डिजाइन जगह की उपलब्धता और भविष्य की सड़क योजना को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

अथॉरिटी के अनुसार, फिलहाल यह फ्लाईओवर भायंदर ईस्ट के लिए दो लेन के तौर पर बनाया गया है। भविष्य में जब भायंदर वेस्ट की ओर कनेक्टिंग रोड तैयार होगी, तब बाकी दो लेन को भी जोड़ा जाएगा। MMRDA का कहना है कि इसे अधूरी या खराब डिजाइन नहीं, बल्कि फेज वाइज प्लानिंग के तौर पर देखा जाना चाहिए।
हालांकि अथॉरिटी की सफाई के बावजूद लोगों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर अब भी सवाल उठ रहे हैं कि जब तक पूरा नेटवर्क तैयार नहीं होता, तब तक इस फ्लाईओवर पर सफर करना कितना सुरक्षित रहेगा।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर आगे क्या कदम उठाता है और लोगों की सुरक्षा को लेकर क्या बदलाव किए जाते हैं।