Shivani Gupta
27 Jan 2026
हेल्थ डेस्क। नवजात शिशु के लिए मां का दूध सिर्फ आहार नहीं, बल्कि जीवन की पहली सुरक्षा कवच होता है। जन्म के बाद मिलने वाला यह प्राकृतिक पोषण बच्चे के शरीर और दिमाग दोनों की मजबूत नींव रखता है। यही वजह है कि डॉक्टर, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) और यूनिसेफ पहले छह महीनों तक केवल मां का दूध देने की सलाह देते हैं।
शिशु के जीवन के शुरुआती छह महीने उसके विकास के लिए सबसे अहम होते हैं। इस दौरान मां का दूध बच्चे को वो सभी पोषक तत्व देता है, जिनकी उसे जरूरत होती है। इसमें मौजूद प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और मिनरल्स बिल्कुल संतुलित मात्रा में होते हैं। खास बात यह है कि, मां का दूध बच्चे की उम्र और जरूरत के अनुसार खुद को ढाल लेता है, जो किसी भी फॉर्मूला दूध या गाय के दूध में संभव नहीं है।
मां के दूध में मौजूद एंटीबॉडी और एंजाइम बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। इससे बच्चा डायरिया, निमोनिया, सर्दी-खांसी, कान के संक्रमण जैसी बीमारियों से काफी हद तक सुरक्षित रहता है। डिलीवरी के बाद निकलने वाला पहला दूध यानी कोलोस्ट्रम बच्चे के लिए प्राकृतिक वैक्सीन जैसा काम करता है, जो उसे शुरुआती संक्रमणों से बचाता है।
रिसर्च में सामने आया है कि, मां का दूध पीने वाले बच्चों का ब्रेन डेवलपमेंट बेहतर होता है। ऐसे बच्चों की सीखने की क्षमता मजबूत होती है और मानसिक विकास भी संतुलित रहता है। इसका मतलब है कि, ब्रेस्टफीडिंग सिर्फ शरीर नहीं, बल्कि बच्चे के दिमाग के विकास के लिए भी बेहद जरूरी है।
मां का दूध हमेशा साफ, सुरक्षित और सही तापमान पर उपलब्ध रहता है। इसे उबालने या स्टरलाइज करने की जरूरत नहीं होती। साथ ही फॉर्मूला दूध, बोतल और अन्य उपकरणों पर होने वाला खर्च भी बचता है, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।
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ब्रेस्टफीड किए गए बच्चों में मोटापा और कुपोषण का खतरा कम देखा गया है। मां का दूध बच्चे के मेटाबॉलिज्म और खाने की आदतों को संतुलित करता है, जिससे आगे चलकर मोटापे जैसी समस्याओं से बचाव होता है।
बाल रोग विशेषज्ञ के अनुसार, एक साल से पहले बच्चे को गाय का दूध नहीं देना चाहिए। इसके पीछे कई कारण हैं-
डॉक्टरों के अनुसार, जन्म से छह महीने तक केवल मां का दूध देना चाहिए और इसके बाद भी दो साल या उससे अधिक समय तक बच्चे को ब्रेस्टफीड कराया जा सकता है। मां का दूध बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित, प्राकृतिक और संपूर्ण आहार है, जो न सिर्फ उसे बीमारियों से बचाता है, बल्कि स्वस्थ, मजबूत और समझदार भविष्य की नींव भी तैयार करता है।
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