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Health Alert :क्या आप भी अपने बच्चे को पिलाते हैं गाय का दूध... तो हो जाएं सावधान!

नवजात शिशु के लिए मां का दूध सबसे संपूर्ण और प्राकृतिक आहार माना जाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व, एंटीबॉडी और एंजाइम बच्चे की इम्यूनिटी मजबूत करते हैं और दिमागी विकास में मदद करते हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि पहले 6 महीने केवल ब्रेस्टफीडिंग करानी चाहिए और 1 साल से पहले गाय का दूध देना बच्चे की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
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क्या आप भी अपने बच्चे को पिलाते हैं गाय का दूध... तो हो जाएं सावधान!
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    हेल्थ डेस्क। नवजात शिशु के लिए मां का दूध सिर्फ आहार नहीं, बल्कि जीवन की पहली सुरक्षा कवच होता है। जन्म के बाद मिलने वाला यह प्राकृतिक पोषण बच्चे के शरीर और दिमाग दोनों की मजबूत नींव रखता है। यही वजह है कि डॉक्टर, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) और यूनिसेफ पहले छह महीनों तक केवल मां का दूध देने की सलाह देते हैं।

    पहले छह महीने क्यों जरूरी है मां का दूध?

    शिशु के जीवन के शुरुआती छह महीने उसके विकास के लिए सबसे अहम होते हैं। इस दौरान मां का दूध बच्चे को वो सभी पोषक तत्व देता है, जिनकी उसे जरूरत होती है। इसमें मौजूद प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और मिनरल्स बिल्कुल संतुलित मात्रा में होते हैं।  खास बात यह है कि, मां का दूध बच्चे की उम्र और जरूरत के अनुसार खुद को ढाल लेता है, जो किसी भी फॉर्मूला दूध या गाय के दूध में संभव नहीं है।

    इम्यून सिस्टम को बनाता है मजबूत

    मां के दूध में मौजूद एंटीबॉडी और एंजाइम बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। इससे बच्चा डायरिया, निमोनिया, सर्दी-खांसी, कान के संक्रमण जैसी बीमारियों से काफी हद तक सुरक्षित रहता है। डिलीवरी के बाद निकलने वाला पहला दूध यानी कोलोस्ट्रम बच्चे के लिए प्राकृतिक वैक्सीन जैसा काम करता है, जो उसे शुरुआती संक्रमणों से बचाता है।

    दिमागी विकास में भी मददगार

    रिसर्च में सामने आया है कि, मां का दूध पीने वाले बच्चों का ब्रेन डेवलपमेंट बेहतर होता है। ऐसे बच्चों की सीखने की क्षमता मजबूत होती है और मानसिक विकास भी संतुलित रहता है। इसका मतलब है कि, ब्रेस्टफीडिंग सिर्फ शरीर नहीं, बल्कि बच्चे के दिमाग के विकास के लिए भी बेहद जरूरी है।

    सुरक्षित, साफ और हमेशा उपलब्ध

    मां का दूध हमेशा साफ, सुरक्षित और सही तापमान पर उपलब्ध रहता है। इसे उबालने या स्टरलाइज करने की जरूरत नहीं होती। साथ ही फॉर्मूला दूध, बोतल और अन्य उपकरणों पर होने वाला खर्च भी बचता है, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।

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    मोटापा और कुपोषण से भी बचाव

    ब्रेस्टफीड किए गए बच्चों में मोटापा और कुपोषण का खतरा कम देखा गया है। मां का दूध बच्चे के मेटाबॉलिज्म और खाने की आदतों को संतुलित करता है, जिससे आगे चलकर मोटापे जैसी समस्याओं से बचाव होता है।

    एक साल से पहले गाय का दूध क्यों नहीं?

    बाल रोग विशेषज्ञ के अनुसार, एक साल से पहले बच्चे को गाय का दूध नहीं देना चाहिए। इसके पीछे कई कारण हैं-

    • गाय के दूध में प्रोटीन और मिनरल्स की मात्रा अधिक होती है, जिससे शिशु की किडनी पर दबाव पड़ता है।
    • इसमें आयरन और विटामिन C जैसे जरूरी पोषक तत्व कम होते हैं।
    • इससे आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया हो सकता है।
    • कुछ मामलों में आंतों को नुकसान पहुंच सकता है और मल के साथ खून आने की समस्या भी हो सकती है।

    क्या कहते हैं डॉक्टर्स

    डॉक्टरों के अनुसार, जन्म से छह महीने तक केवल मां का दूध देना चाहिए और इसके बाद भी दो साल या उससे अधिक समय तक बच्चे को ब्रेस्टफीड कराया जा सकता है। मां का दूध बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित, प्राकृतिक और संपूर्ण आहार है, जो न सिर्फ उसे बीमारियों से बचाता है, बल्कि स्वस्थ, मजबूत और समझदार भविष्य की नींव भी तैयार करता है।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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