अडाणी समूह ने वित्तीय रणनीति में किया बड़ा बदलाव, कम ब्याज दर की वजह से घरेलू बैंकों पर बढ़ाई निर्भरता

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अडाणी समूह ने वित्तीय रणनीति में किया बड़ा बदलाव, कम ब्याज दर की वजह से घरेलू बैंकों पर बढ़ाई निर्भरता

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मुंबई। अडाणी समूह ने अपनी वित्तीय रणनीति में बड़ा परिवर्तन किया है और अब वह तेजी से भारतीय बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर अधिक निर्भर होता जा रहा है। अडाणी समूह की कुल कर्ज की राशि 2.6 लाख करोड़ से अधिक है। इसका लगभग 50% हिस्सा भारतीय बैंकों से लिया गया है। एक साल पहले यह आंकड़ा 40% था, यानी घरेलू वित्तपोषण में 10% की उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। यह बदलाव भारत में बदलती बैंकिंग व्यवस्था और कम ब्याज को देखकर उठाया गया है। अडाणी समूह ने पाया कि बह्य स्रोतों की तुलना में घरेलू स्रोतों से पूंजी जुटाना कहीं बेहतर विकल्प है। इसी वजह से समूह ने घरेलू बैंकों पर अपनी निर्भरता बढ़ा दी है। इससे समूह को न केवल कर्ज की लागत कम करने में मदद मिल रही है, बल्कि इसकी वजह से समूह की स्थिरता को भी ताकत मिली है।

12 माह में समूह का कुल कर्ज 20% बढ़ा

जून 2025 तक के 12 महीनों में अडाणी समूह के कुल कर्ज में 20% की बढ़ोतरी हुई है। अब इसके कुल कर्ज में से आधा हिस्सा भारतीय रुपए में लिया गया है, जबकि पहले डॉलर में लिए गए कर्ज का अनुपात अधिक होता था। पहले समूह की कुल उधारी में डॉलर बॉन्ड्स का हिस्सा 31% था, जो अब घटकर 23% रह गया है। विदेशी बैंकों से लिए गए डॉलर लोन का हिस्सा भी थोड़ा घटकर 27% रह गया है। सरकारी बैंकों (पीएसयू) की हिस्सेदारी में खासा इजाफा हुआ है। इन बैंकों का योगदान पिछले साल 13% था, जो अब बढ़कर 18% हो गया है। इसके साथ-साथ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) और अन्य वित्तीय संस्थानों का समूह के कुल कर्ज में 25% हिस्सा हैं, जबकि एक साल पहले यह 19% था।

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2 साल में 1.3 लाख करोड़ बढ़ी बैंकों की राशि

दो साल की अवधि में भारतीय बैंकों की ओर से दी गई राशि 1.3 लाख करोड़ रुपए बढ़ी है, जो दिखाती है कि भारतीय बैंक अब अडाणी समूह की वित्तीय नींव में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अडाणी समूह ने निवेशकों को बताया है कि उसने बंदरगाहों और बिजली जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक अनुबंधों के माध्यम से स्थिर नकदी प्रवाह सुनिश्चित किया है, जिससे इसकी क्रेडिट रेटिंग में सुधार हुआ है। इसके अलावा समूह के पास 60,000 करोड़ रुपए की नकद राशि भी है, जो कुल कर्ज का लगभग 25% है। यह रकम वित्तीय अनिश्चितताओं से निपटने के लिए एक बफर की तरह काम करती है। हाल ही में की गई लेनदेनें भी इस घरेलू रुझान को दिखाते हैं। उदाहरण के लिए, अडाणी एयरपोर्ट ने कई अंतरराष्ट्रीय बैंकों से 150 मिलियन डॉलर का सिंडिकेटेड लोन लिया है, जबकि अडाणी पोर्ट्स ने एमयूएफजी बैंक से 125 मिलियन डॉलर का द्विपक्षीय कर्ज प्राप्त किया है।

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अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी समूह की स्थिति मजबूत

आर्थिक प्रदर्शन के मोर्चे पर भी वित्तवर्ष 25 में समूह ने रिकॉर्ड एबिटा 89,806 करोड़ रुपए दर्ज किया है, जो 8.2% की बढ़ोतरी है। कर पश्चात लाभ (पीएटी) 40,565 करोड़ रुपए रहा और पूंजीगत व्यय 1.26 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। हालांकि खर्च बढ़ा है, फिर भी समूह का नेट डेब्ट-टू-एबिटा अनुपात 2.6 रहा, जो वित्तीय दृष्टि से संतुलित है। 90% से अधिक कमाई एए रेटिंग या उससे ऊपर की परिसंपत्तियों से होती है, जिससे समूह को कम ब्याज दरों पर पूंजी मिल रही है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी समूह की मजबूत स्थिति है, जहां उसने 9 अरब डॉलर की राशि जुटाई है। इस पूरे बदलाव से यह साफ है कि अडाणी समूह अब ज्यादा सतर्क, रणनीतिक और घरेलू वित्तीय संस्थानों पर केंद्रित होकर अपने ऋण प्रबंधन को मजबूती दे रहा है।

Aniruddh Singh
By Aniruddh Singh

अनिरुद्ध प्रताप सिंह। नवंबर 2024 से पीपुल्स समाचार में मुख्य उप संपादक के रूप में कार्यरत। दैनिक जाग...Read More

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