Shivani Gupta
30 Nov 2025
मुंबई। महंगाई का दबाव कम होने से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 3 दिसंबर से शुरू हो रही मौद्रिक नीति समिति की बैठक में नीतिगत दर को 0.25 प्रतिशत कम कर सकता है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर 8.2 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि को देखते हुए केंद्रीय बैंक ब्याज दर को स्थिर रख सकता है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति पिछले दो महीनों से सरकार के तय दायरे की निचली सीमा (दो प्रतिशत) से भी कम है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अर्थव्यवस्था में आई तेजी के कारण आरबीआई ब्याज दरों को यथावत रख सकता है। यह तेजी राजकोषीय समेकन, लक्षित सार्वजनिक निवेश और जीएसटी दर कटौती जैसे विभिन्न सुधारों से समर्थित है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 3-5 दिसंबर 2025 तक होनी है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा पांच दिसंबर को एमपीसी बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा करेंगे। केंद्रीय बैंक ने पिछले साल फरवरी में दरों में कमी शुरू की और कुल एक प्रतिशत की कटौती करके रेपो दर को 5.5 प्रतिशत कर दिया था।
कुछ विशेषज्ञों के अनुसार मुद्रास्फीति का दबाव कम होने से आरबीआई मौद्रिक नीति समिति की बैठक में नीतिगत ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर सकता है। एचडीएफसी बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार इस साल वृद्धि अनुमान से अधिक और मुद्रास्फीति अनुमान से कम है। दूसरी छमाही में वृद्धि पर बने जोखिम और वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही तक मुद्रास्फीति के चार प्रतिशत से काफी नीचे रहने की उम्मीद को देखते हुए लगता है कि आने वाली नीतिगत दर में फिर 0.25 प्रतिशत की कटौती हो सकती है।
बैंक आॅफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा आने वाली नीति में रेपो दर पर कांटे का मुकाबला होगा। चूंकि मौद्रिक नीति आगे की सोच वाली होती है और उस हिसाब से इस समय नीतिगत दर उचित स्तर पर दिख रही है। उन्होंने कहा, इन परिस्थितियों में नहीं लगता कि नीतिगत दर में कोई बदलाव होना चाहिए। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती हो सकती है, वृद्धि मजबूत बनी हुई है, लेकिन अक्टूबर में खुदरा मुद्रास्फीति में भारी गिरावट ने कटौती के लिए अतिरिक्त जगह बना दी है।