Manisha Dhanwani
29 Nov 2025
Naresh Bhagoria
28 Nov 2025
पाकिस्तान ने हाल ही में 27वां संविधान संशोधन पास किया, जिसके तहत आर्मी चीफ आसिम मुनीर की शक्तियों को बढ़ा दिया गया है। इस फैसले पर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने गंभीर सवाल उठाए, जिसके बाद पाकिस्तान की सरकार भड़क गई और सफाई देने लग गई।
UN मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने जेनेवा में बयान जारी कर कहा कि 27वां संशोधन बिल्कुल उसी तरह जल्दबाजी में पास किया गया जैसा 26वां संशोधन किया गया था। इस संशोधन पर ना तो कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली गई और ना ही सिविल सोसाइटी से चर्चा हुई। इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता कमजोर हुई है और सेना की जवाबदेही पर खतरा बढ़ गया है। उनके बयान से पाकिस्तान की सरकार बौखला गई।
PAK विदेश मंत्रालय ने UN के बयान पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह संशोधन पाकिस्तान की संसद ने दो-तिहाई बहुमत से पास किया है, और यह पूरी तरह लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। संविधान में बदलाव करना हमारे चुने हुए प्रतिनिधियों का अधिकार है। UN के बयान में जमीनी सच्चाई नहीं दिखाई गई है। सरकार ने दावा किया कि संशोधन पूरी तरह संविधान की प्रक्रिया के मुताबिक किया गया है।
शहबाज शरीफ सरकार ने कहा कि पाकिस्तान संविधान के तहत मानवाधिकार, सम्मान, आजादी और कानून के राज को प्राथमिकता देता है। उनके फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए। विदेश मंत्री इशाक डार के कार्यालय ने भी UN से अपील की कि वे पाकिस्तान के निर्णय को स्वीकारें।
27वें संविधान संशोधन पर पाकिस्तान में कड़ा विरोध भी हुआ। विरोध की वजहें-
कहा जा रहा है कि इस संशोधन से पाकिस्तान में सेना का दखल और गहरा हो गया है, जबकि न्यायपालिका कमज़ोर हो रही है।