Manisha Dhanwani
17 Jan 2026
Naresh Bhagoria
15 Jan 2026
दंतेवाड़ा। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प, तय से पूर्व होना भी सुनिश्चित हो चुका है। शाह के संकल्प के बीच उनके छत्तीसगढ़ में आयोजित डीजीपी और आईजी कॉन्फ्रेंस के बीच रविवार को 37 नक्सलियों ने हिंसा की राह छोड़कर पुनर्वास नीति के जरिए समाज की मुख्यधारा में जुड़ने का फैसला करते हुए आत्मसमर्पण कर दिया है। इनमें से 27 नक्सलियों पर कुल 65 लाख के इनाम घोषित थे। आत्मसमर्पित नक्सलियों में भैरमगढ़ एरिया कमेटी, इन्द्रावती एरिया कमेटी और माड़ इलाके के नक्सली शामिल हैं। सरकार की पुनर्वास पहल पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन योजना से प्रभावित होकर सभी ने दंतेवाड़ा डीआरजी कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आत्मसमर्पण कर दिया है।
इस अभियान को सफल बनाने में डीआरजी, बस्तर फाइटर्स, विशेष शाखा,सीआरपीएफ की कई कंपनियों और आरएफटी जगदलपुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पुनर्वास नीति की वजह से पिछले 20 महीनों में दंतेवाड़ा में 165 इनामी माओवादी समेत 508 लोग आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इसके अलावा लोन वरार्टू अभियान के तहत अब तक 333 इनामी समेत 1160 माओवादी हथियार छोड़ चुके हैं।
आत्मसमर्पण करने वालों में कई कुख्यात एवं इनामी माओवादी शामिल हैं। इनका स्वागत पुलिस उपमहानिरीक्षक दंतेवाड़ा रेंज कमलोचन कश्यप, डीआईजी सीआरपीएफ राकेश चौधरी, एसपी दंतेवाड़ा गौरव राय, सीआरपीएफ 111वीं, 230वीं और 80वीं बटालियन के कमांडेंटों सहित अन्य अधिकारियों ने किया।
बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने कहा कि पूना मारगेम बस्तर में स्थायी शांति और समग्र विकास की दिशा में परिवर्तनकारी पहल बनकर उभर रहा है। आत्मसमर्पित माओवादियों को पुनर्वास नीति के तहत 50 हजार रुपए की तात्कालिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, कृषि भूमि सहित अन्य सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।