वायरल गर्ल "मोनालिसा" की जन्मतिथि बदलने का आदेश रद्द, हाईकोर्ट ने कहा- पहले युवती को सुनें
महेश्वर / इंदौर। चर्चित "वायरल गर्ल्" इंटरफेथ मैरिज और जन्मतिथि विवाद से जुड़े मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने महेश्वर नगर परिषद के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके जरिए युवती के जन्म प्रमाण पत्र में जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 से बदलकर 30 दिसंबर 2009 कर दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिए बिना जन्मतिथि में बदलाव नहीं किया जा सकता।मामले की सुनवाई जस्टिस गजेंद्र सिंह की पीठ ने की। कोर्ट ने नगर परिषद को निर्देश दिया कि युवती के पिता की ओर से दिए गए आवेदन पर कानून के अनुसार दोबारा निर्णय लिया जाए और इस प्रक्रिया में युवती का पक्ष भी सुना जाए।
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कोर्ट ने वास्तविक जन्मतिथि पर नहीं दिया फैसला
हाईकोर्ट ने फिलहाल यह तय नहीं किया है कि युवती की वास्तविक जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 है या 30 दिसंबर 2009। अदालत का आदेश जन्मतिथि बदलने की प्रक्रिया और संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर नहीं दिए जाने तक सीमित है।युवती और उसके पति की ओर से दलील दी गई कि जन्मतिथि में बदलाव का सीधा असर युवती की वयस्कता और उससे जुड़े कानूनी अधिकारों पर पड़ता है। उनका कहना था कि जन्म प्रमाण पत्र में बदलाव करने से पहले युवती को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।
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पिता ने अस्पताल का रिकॉर्ड पेश किया था
पहले युवती के जन्म प्रमाण पत्र, आधार, पैन और वोटर आईडी में जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज थी। इसी रिकॉर्ड के आधार पर वह 1 जनवरी 2026 को बालिग मानी गई थी और 11 मार्च 2026 को उसकी शादी हुई।बाद में युवती के पिता ने सरकारी अस्पताल का रिकॉर्ड पेश किया, जिसमें जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 दर्ज थी। इसी रिकॉर्ड के आधार पर महेश्वर नगर परिषद ने पुराने जन्म प्रमाण पत्र को रद्द कर नई जन्मतिथि वाला प्रमाण पत्र जारी कर दिया था।
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जन्मतिथि बदलने से बढ़ा वयस्कता का विवाद
मामले में राज्य सरकार और युवती के पिता की ओर से कहा गया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रिकॉर्ड में 30 दिसंबर 2009 की जन्मतिथि दर्ज है। दूसरी ओर युवती और उसके पति की ओर से जन्मतिथि बदलने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए।हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब नगर परिषद को पिता के आवेदन पर नए सिरे से निर्णय लेना होगा। इस बार युवती को सुनवाई का अवसर देना जरूरी होगा।
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सरकार की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने रखा पक्ष
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। उनके साथ अतिरिक्त महाधिवक्ता सोनल गुप्ता, उप महाधिवक्ता श्रेय राज सक्सेना और सरकारी अधिवक्ता आदित्य गर्ग भी मौजूद रहे।
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शादी और पॉक्सो केस के बाद विवाद में आया मामला
वायरल गर्ल की मुलाकात केरल में फिल्म शूटिंग के दौरान एक युवक से हुई थी। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और मार्च 2026 में दोनों ने शादी कर ली। इसके बाद उसकी उम्र और विवाह को लेकर विवाद शुरू हुआ।राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की ओर से शादी के समय युवती के नाबालिग होने का दावा किया गया। इसके बाद खरगोन पुलिस ने उसके पति के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।परिवार की ओर से आरोप लगाया गया था कि युवती को बहला-फुसलाकर शादी के लिए राजी किया गया। वहीं युवती ने अपने बयानों में माता-पिता पर प्रताड़ना और दूसरी जगह शादी के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए थे।
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फिल्म निर्देशक के खिलाफ भी पॉक्सो केस
युवती ने 29 अप्रैल 2026 को फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा और तीन अन्य लोगों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई थी। केरल की एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की।युवती ने आरोप लगाया था कि नाबालिग होने के दौरान फिल्म की शूटिंग के समय उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया। निर्देशक ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे अपने खिलाफ साजिश बताया था।
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केरल हाईकोर्ट ने भी सुरक्षा को लेकर दिया था अंतरिम आदेश
इसी मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में केरल हाईकोर्ट ने युवती की सुरक्षा को लेकर अंतरिम आदेश जारी किया था। अदालत ने कहा था कि उसकी अनुमति के बिना युवती को किसी व्यक्ति के हवाले नहीं किया जाएगा और उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं ले जाया जाएगा।युवती को पहले से मिली पुलिस सुरक्षा भी जारी रखने के निर्देश दिए गए थे।अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद जन्मतिथि विवाद में अगली प्रक्रिया महेश्वर नगर परिषद के स्तर पर होगी। परिषद को युवती को सुनवाई का अवसर देकर पिता के आवेदन पर कानून के अनुसार नया फैसला लेना होगा।




















