वायरल गर्ल मोनालिसा केस में बड़ा फैसला!पति फरमान खान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के मंडलेश्वर स्थित स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने वायरल गर्ल मोनालिसा के पति की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। विशेष न्यायाधीश रवि झारोला ने साफ कहा कि आरोपी को फिलहाल राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने माना कि आरोपी के फरार होने और सबूतों से छेड़छाड़ करने की आशंका बनी हुई है। कोर्ट के अनुसार, जांच अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए इस समय जमानत देना सही नहीं होगा।
पूरा मामला क्या है? FIR से शुरू हुई कहानी
यह पूरा मामला 25 मार्च को दर्ज की गई FIR से जुड़ा है। यह FIR वायरल गर्ल के पिता ने दर्ज कराई थी। पिता का आरोप है कि आरोपी युवक उनकी नाबालिग बेटी को फिल्मों में काम दिलाने का झांसा देकर केरल ले गया था। वहां उसे कुछ समय तक अपने साथ रखा और बाद में बहला-फुसलाकर उससे शादी कर ली। इस शिकायत के बाद मामला गंभीर हो गया और पुलिस जांच शुरू हुई।
कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?
बुधवार को हुई सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बचाव पक्ष के वकील जैरी लोपेज और लखन भावरे ने अदालत में कहा कि लड़की अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी। उन्होंने दावा किया कि दोनों ने आपसी सहमति से शादी की है। वकीलों ने यह भी कहा कि लड़की ने केरल के थंपानूर थाने में खुद को बालिग साबित किया था। इसलिए आरोपी पर लगाए गए आरोप गलत हैं और उसे जमानत मिलनी चाहिए।
पीड़िता पक्ष की दलील
दूसरी तरफ विशेष लोक अभियोजक पीएस अलावा और पीड़िता की मां के वकील विजय जोशी ने कोर्ट में महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश किए। उन्होंने लड़की का जन्म प्रमाण पत्र दिखाया और कहा कि शादी के समय वह नाबालिग थी। उन्होंने यह भी बताया कि बचाव पक्ष द्वारा पेश किए गए कुछ दस्तावेज कानूनी रूप से सही नहीं हैं।
कोर्ट ने क्या कहा?
सभी दलीलों को सुनने और केस डायरी देखने के बाद कोर्ट ने साफ टिप्पणी की कि पुलिस जांच अभी पूरी नहीं हुई है। पीड़िता का बयान दर्ज होना बाकी है और आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि अगर आरोपी को अग्रिम जमानत दी जाती है तो वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है और गवाहों को प्रभावित कर सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया।
केरल हाईकोर्ट का पुराना आदेश
इस मामले में पहले केरल हाईकोर्ट ने एक अलग फैसला दिया था। 3 जून को कोर्ट ने वायरल गर्ल को पहले बालिग माना था। कोर्ट ने आरोपी को एक महीने की ट्रांजिट बेल भी दी थी। जज कौसर एडप्पागथ ने कहा था कि लड़की के जन्म प्रमाण पत्र में जन्म तिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज है, जिससे वह बालिग प्रतीत होती है।
मध्य प्रदेश पुलिस का पक्ष
मध्य प्रदेश पुलिस ने इस फैसले का विरोध किया था। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट में कहा था कि जन्म प्रमाण पत्र फर्जी है। पुलिस का दावा है कि लड़की नाबालिग है और उम्र साबित करने वाले दस्तावेज सही नहीं हैं।
विवाह और धर्म को लेकर विवाद
केरल हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह भी मुद्दा उठा कि दोनों अलग-अलग धर्मों से हैं। सरकारी पक्ष ने कहा कि लड़की हिंदू है और लड़का मुस्लिम। ऐसे में मंदिर में हुआ विवाह कानूनी रूप से मान्य नहीं हो सकता। हालांकि, दोनों पक्षों ने कोर्ट में यह भी कहा कि उन्हें अलग-अलग धर्म के कारण सामाजिक खतरा हो सकता है और ऑनर किलिंग की आशंका है।
दोनों की मुलाकात कैसे हुई?
जानकारी के अनुसार, दोनों की मुलाकात केरल में एक फिल्म शूटिंग के दौरान हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और मार्च 2026 में दोनों ने शादी कर ली। इसके बाद यह मामला सामने आया और विवाद शुरू हो गया।
मामला कैसे बढ़ा?
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस शादी पर सवाल उठाए। आयोग का कहना था कि शादी के समय लड़की की उम्र सिर्फ 16 साल थी और दस्तावेजों में गड़बड़ी की गई थी। इसके बाद खरगोन पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया।











