मोनालिसा दंपती को हाईकोर्ट से राहत, जबरन कार्रवाई पर अंतरिम रोक बरकरार

इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने महाकुंभ-2025 के दौरान सोशल मीडिया पर चर्चा में आई मोनालिसा और उसके पति को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई पर अंतरिम रोक जारी रखने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को निर्धारित की है।
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मामला जन्म प्रमाण-पत्र में कथित हेरफेर और अंतरधार्मिक विवाह को नाबालिग विवाह बताकर आपराधिक मामला दर्ज किए जाने से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि लड़की के जन्म रिकॉर्ड में बदलाव कर विवाह को अवैध साबित करने की कोशिश की गई है।
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मोनालिसा महाकुंभ-2025 के दौरान रुद्राक्ष की मालाएं बेचते हुए सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। बाद में वह एक फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में केरल गई, जहां उसकी मुलाकात एक फिल्म निर्देशक से हुई। दोनों ने मार्च 2026 में विवाह कर लिया।
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इसके बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की ओर से शिकायत के बाद मामला तूल पकड़ गया। आयोग का दावा है कि विवाह के समय मोनालिसा की उम्र 16 वर्ष थी और विवाह के लिए कथित तौर पर फर्जी जन्म प्रमाण-पत्र का इस्तेमाल किया गया। शिकायत के आधार पर पति के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया।
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दंपती का कहना है कि लड़की के पिता ने जन्म रिकॉर्ड में हेरफेर कर उन्हें झूठे मामले में फंसाने की साजिश रची। उनका आरोप है कि बदले हुए दस्तावेजों के आधार पर विवाह को अवैध बताकर आपराधिक कार्रवाई शुरू कराई गई।
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इससे पहले केरल हाईकोर्ट ने भी दंपती को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देते हुए पति को मध्यप्रदेश की सक्षम अदालत में जाने के लिए ट्रांजिट बेल प्रदान की थी। वहीं, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहले पति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुका है और यह टिप्पणी की थी कि लड़की की वास्तविक जन्मतिथि का विवाद विचारण का विषय है।
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अब हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मामले की अगली सुनवाई तक दंपती के खिलाफ किसी प्रकार की जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। मामले की सुनवाई 17 अगस्त को होगी, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क और दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।











